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Hindi News ›   India News ›   Expert opinion, on interim budget Arvind Pangariya, Former Vice President of the Policy Commission

चुनावी वर्ष में उम्मीद से ज्यादा राहत, आम जनता की आशाओं के अनुरूप बजट

Sat, 02 Feb 2019 03:16 AM IST
संदीप भट्ट न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दिल्ली Published by: संदीप भट्ट Updated Sat, 02 Feb 2019 03:16 AM IST
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Expert opinion, on interim budget  Arvind Pangariya, Former Vice President of the Policy Commission
नीति आयोग के पूर्व उपाध्यक्ष अरविंद पनगड़िया - फोटो : amar ujala

कई साल से मैं किसानों को सालाना आर्थिक सहायता देने की वकालत कर रहा था जिसे सरकार ने अब लागू किया है। खासतौर पर सरकार ने छोटे किसानों के लिए सीधे छह हजार रुपये सालाना की योजना शुरू कर नई पहल शुरू की है। देश की 65 फीसद आबादी जिस कार्य में यानी कृषि में लगी है और वह तमाम प्राकृतिक व अन्य पीड़ाओं के चलते दो जून की रोटी जुटाने में भी असमर्थ हो जाती है।

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उन्हें प्रधानमंत्री की इस योजना से सहारा मिलेगा। खास बात ये है कि सरकार ने रियल एस्टेट सेक्टर को ध्यान में रखकर कैपिटल गेन पर छूट और सस्ते घर के लिए आयकर में छूट को जारी रखा। एक ओर सरकार ने आम आदमी को पांच लाख रुपये तक की आय को इनकम टैक्स मुक्त कर दिया है।
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दूसरी ओर सैनिकों को मिलने वाली बोनस राशि को दोगुना कर दिया है। अब सैनिकों को 3,500 रुपये के स्थान पर 7,000 रुपये बोनस के रूप में मिलेंगे। साथ ही ग्रेच्युटी की राशि बढ़ाकर 20 लाख रुपए कर दी गई है।
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यह अंतरिम बजट है और सरकार ने उम्मीद से ज्यादा श्रमिक, किसान और मध्यम वर्ग को राहत मुहैया करायी है। छोटे कारोबारियों को राहत देने के लिए सरकारी विभागों द्वारा 25 फीसद खरीद का दरवाजा भी खोला है।

इसके अलावा ग्रामीण क्षेत्रों को अगले पांच साल में डिजिटल तकनीक से सबल बनाने का लक्ष्य रखा गया है जो ग्रामीण भारत की तस्वीर बदलने वाला कदम हो सकता है। चुनावी साल में सरकार ने आम जनता की आशाओं के अनुरूप बजट पेश किया है।


बीते कई साल से किसानों को सालाना आर्थिक सहायता देने की वकालत मैंने की थी। कर रहा था।  आज सरकार ने उसे अंजाम दे दिया। लेकिन इस दौरान यह आशंका जन्म ले रही थी कि राजकोषीय घाटा काफी बढ़ ना जाए पर उसमें भी ज्यादा बढ़ोत्तरी नहीं हुई है। यह बस फिसलकर 3.4 प्रतिशत पर पहुंचा है। आम जनता की आशाओं के अनुरूप यह बजट पेश किया गया है। 

 (अरविंद पनगढ़िया, नीति आयोग के पूर्व उपाध्यक्ष )

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