अविश्वास प्रस्ताव : 9 बड़े राज्य, 10 प्रमुख क्षेत्रीय दल और तय होगा 2019 का गणित
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लोकसभा में आज मोदी सरकार के खिलाफ पहले अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा हो रही है और शाम में वोटिंग होगी। अविश्वास प्रस्ताव पर कौन किसके साथ ये तो वक्त ही तय करेगा कि संवैधानिक प्रकिया के दायरे में क्या-क्या हो सकता है लेकिन देश के दो मुख्य दल भाजपा और कांग्रेस ने मिशन 2019 को लेकर अभी से तैयारियां शुरू कर दी हैं। भाजपा और कांग्रेस ने अपने कुनबे को बढ़ाने के लिए अभी से खेमेबंदी शुरू कर दी है। एनडीए और यूपीए दोनों ने क्षेत्रीय दलों के साथ उचित सामंजस्य बनाना शुरू कर दिया है।
राजनीतिक समीक्षकों का मानना है कि कांग्रेस ने उपचुनाव के नतीजों से अनुभव लेते हुए क्षेत्रीय दलों के साथ मिलकर भाजपा को 2019 में हराने के लिए मास्टर प्लान बनाना शुरू कर दिया है तो वहीं भाजपा ने भी अपने सभी सहयोगी दलों के साथ रिश्तों में मजबूती बनाना शुरू कर दिया है। मौजूदा हालात में संसद के मॉनसून सत्र में टीडीपी की तरफ से लाए गए अविश्वास प्रस्ताव का वैसे तो कोई औचित्य ही नहीं है क्योंकि पूर्ण बहुमत वाली मोदी सरकार को यहां अभी कोई खतरा नहीं है। हालांकि अविश्वास प्रस्ताव के बहाने 2019 के आम चुनाव से पहले कांग्रेस संयुक्त विपक्ष के जरिए एनडीए की घेराबंदी में जुटी है।
दरअसल, अभी तक संयुक्त विपक्ष का कोई आकार-प्रकार सामने नहीं आया है क्योंकि क्षेत्रीय दलों की अनदेखी के कारण ही विपक्ष में फूट सामने आती रहती है। कई दल संयुक्त विपक्ष के नाम पर एक साथ बड़े मंचों पर दिखते तो हैं पर सीटों के बंटवारे के नाम पर उनमें सहमति नहीं नजर आ रही। ऐसे में अब अविश्वास प्रस्ताव के नाम पर आम चुनाव से करीब 10 महीने पहले कई क्षेत्रीय दलों ने अपने पत्ते खोले हैं। इससे देश में एनडीए बनाम संयुक्त विपक्ष की तस्वीर भी साफ होने लगी है।
सीटों के लिहाज से देश के 9 बड़े राज्यों में जहां भाजपा को क्षेत्रीय दलों से सबसे ज्यादा चुनौती मिलने की संभावना है। जहां क्षेत्रीय पार्टियां राज्य की राजनीति में अहम भूमिका निभाती हैं। उन 9 राज्यों में लोकसभा की 340 सीटें हैं। 10 प्रमुख क्षेत्रीय दल जहां कांग्रेस और 7 एनडीए की तरफ नजर आते दिख रहे हैं। इनमें कइयों ने अविश्वास प्रस्ताव के दौरान वोटिंग से दूर रहकर भविष्य की संभावनाओं को भी जिंदा रखा है।
क्षेत्रीय दलों के गढ़ में भाजपा और कांग्रेस की 2019 को लेकर चुनावी रणनीति
महाराष्ट्र-48 सीटें
शिवसेना केंद्र और महाराष्ट्र में एनडीए सरकार का हिस्सा है। हालांकि वह लगातार कहती रही है कि 2019 का चुनाव अकेले लड़ेगी। पर गुरुवार को एक बार फिर उसने यू-टर्न लेते हुए अविश्वास प्रस्ताव में मोदी सरकार के पक्ष में वोट करने का फैसला किया है। महाराष्ट्र विधानसभा में 288 सीटें हैं। 122 भाजपा और 63 शिवसेना के पास हैं। दोनों विधानसभा चुनाव अकेले लड़ चुकी हैं। भाजपा 24 सीटों पर लड़ी थी, 23 जीती थी। शिवसेना 20 में 18 जीती थी।
ओडिशा-21 सीटें
माना जा रहा है सत्तारूढ़ बीजू जनता दल एनडीए के खिलाफ वोट करेगी। पार्टी ने सांसदों को व्हिप जारी किया है। सांसदों को शुक्रवार उपस्थित रहने को कहा गया है।
बीजेडी के 20, भाजपा के 1 सांसद हैं। भाजपा को 21.50% वोट मिले थे।
कर्नाटक-28 सीटें
राज्य में कांग्रेस-जेडीएस की गठबंधन सरकार है। जेडीएस का प्रस्ताव के पक्ष में रहना तय है। दोनों अगला लोकसभा चुनाव भी साथ लड़ सकते हैं। भाजपा के पास 17, कांग्रेस के 9 और जेडीएस के 2 सांसद हैं।
तमिलनाडु-39 सीटें
तमिलनाडु की सत्तारूढ़ एआईएडीएमके ने अविश्वास से हटने फैसला किया है। सीएम पलानीसामी ने कहा कि कावेरी मुद्दे पर किसी ने साथ नहीं दिया, इसलिए यह फैसला लिया गया है। ऐसे में कयास लग रहे हैं, 2019 चुनाव से पहले एआईएडीएमके, एनडीए में शामिल हो सकती है। पहले भी एआईएडीएमके और भाजपा की नजदीकियों की चर्चा रही है। एआईएडीएमके के 37, भाजपा का 1 सांसद है। डीएमके यूपीए का घटक है।
उत्तरप्रदेश-80 सीटें
सपा का अविश्वास प्रस्ताव के पक्ष में वोट देना पक्का माना जा रहा है। बसपा के लोकसभा में सांसद नहीं हैं। ये गठबंधन भी कर सकते हैं। भाजपा के 69, सपा के 7, कांग्रेस और अपना दल के 2-2 सांसद हैं।
आंध्र+तेलंगाना-42 सीटें
आंध्र प्रदेश की सत्तारूढ़ पार्टी टीडीपी ने 2014 लोकसभा चुनाव भाजपा के साथ लड़ा था। पर अब वह एनडीए से दूर है। अविश्वास प्रस्ताव टीडीपी ने ही लाई है। वहीं, तेलंगाना की सत्तारूढ़ टीआरएस हमेशा भाजपा के खिलाफ रही है। हालांकि जगन रेड्डी की पार्टी वाईएसआरसीपी का अभी स्टैंड पता नहीं है। भाजपा और जगन रेड्डी के जल्द साथ आने की खबरें आती रही हैं। यहां टीडीपी के 16, वाईएसआरसीपी के 9 और टीआरएस के 11 सांसद हैं।
बिहार-40 सीटें
लालू यादव की आरजेडी संयुक्त विपक्ष के पक्ष में हमेशा से रही है। वह कांग्रेस के साथ अविश्वास प्रस्ताव के पक्ष में वोट करेगी। राज्य में एनडीए के 33 सांसद हैं, आरजेडी के 4, कांग्रेस के 2 सांसद हैं।