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Exclusive: ऐसे तो 2019 तक साफ हो चुकी गंगा नदी

Mon, 13 Nov 2017 06:04 PM IST
शशिधर पाठक/ अमर उजाला, नई दिल्ली
शशिधर पाठक/ अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Mon, 13 Nov 2017 06:04 PM IST
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Exclusive: Plan to clean Ganga river by 2019 is impossible
- फोटो : अमर उजाला

केंद्रीय जल संसाधन, नदी विकास एवं गंगा पुनरुद्धार मंत्री नितिन गडकरी चाहे जो दावा करें, लेकिन 2019 तक गंगा मइया का जल निर्मल हो पाना असंभव है। साढ़े तीन साल बीत जाने के बाद भी निर्मल गंगा के प्रवाह को लेकर सरकार के हाथ खाली हैं। 

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पिछले महीने नितिन गडकरी ने गंगा स्वच्छता अभियान को लेकर मंत्रालय के अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की थी। इसके बाद केंद्रीय मंत्री ने राज्यमंत्री सत्यपाल सिंह को जिम्मेदारी सौंपी, लेकिन सूत्र बताते हैं कि दोनों केंद्रीय मंत्री गंगा स्वच्छता अभियान से खुश नहीं हैं। सूत्र बताते हैं कि हालात की गंभीरता को देखकर गडकरी ने अपना मुख्य ध्यान गंगा और यमुना में जलमार्ग को विकसित करने पर कर लिया है।
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इस बारे में अमर उजाला ने परियोजना के निदेशक यूपी सिंह से प्रतिक्रिया जाननी चाही तो उन्होंने मीटिंग में व्यस्त होने का हवाला देकर कुछ भी कहने से इनकार कर दिया जबकि हालत यह है कि केंद्र ने गंगा स्वच्छता अभियान के तहत 184 परियोजनाओं को अपनी मंजूरी दी थी।
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इनमें सीवेज प्रणाली, घाटों और शवदाह का निर्माण, नदी के सामने दोनों ओर का विकास, नदी के किनारों पर सफाई, संस्थागत विकास, जैव विविधता, ग्रामीण स्वच्छता की 15856 करोड़ की परियोजनाएं शामिल हैं, लेकिन इनमें से महज 46 ही पूरी हो पाई हैं।

क्या है स्थिति: सीवेज और स्वच्छता

Exclusive: Plan to clean Ganga river by 2019 is impossible

राष्ट्रीय गंगा स्वच्छता मिशन के तहत सरकार ने 13626 करोड़ रुपये की लागत से 90 सीवेज प्रबंधन परियोजना को मंजूरी दी है। यह प्रणाली गंगा नदी से सीधे तौर पर जुड़े उत्तराखंड, यूपी, बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल जैसे पांच राज्यों में अपरोक्ष रूप से यमुना नदी से जुड़े हरियाणा और दिल्ली जैसे राज्य में पूरी की जानी है। इनमें से महज 18 परियोजनाओं को ही पूरा किया जा सका है। 28 परियोजनाओं पर सुस्त गति से काम चल रहा है, जबकि  44 के लिए अभी टेंडर आदि भी जारी नहीं हो पाए हैं। 

इनमें से उत्तराखंड में 30 में से केवल 13 परियोजना, यूपी में 25 में से सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट की इलाहाबाद की केवल 4 परियोजना ही पूरी हो सकी हैं। वहीं इलाहाबाद, कानपुर, वाराणसी, नरौरा, मुरादाबाद, गढ़मुक्तेश्वर, कन्नौज समेत अन्य स्थानों पर बनने वाले 21 सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट की रफ्तार बेहद सुस्त है।

नहीं खर्च हो पाएंगे पैसे
इसी तरह से बिहार में 20, झारखंड में 2, पश्चिम बंगाल में 9 सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट की स्थिति कछुए जैसी चाल के सिवा कुछ नहीं है। दिल्ली में भी कोंडली और रिठाला जोन में भी दो सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट बनने हैं, लेकिन इनकी रफ्तार भी काफी सुस्त है। यही हाल हरियाणा के सोनीपत और पानीपत में बनने वाले प्लांट का भी है। ऐसे में जिस रफ्तार से सरकार गंगा को साफ कर रही है, उससे अगले पांच सालों में भी गंगा में निर्मल जल के प्रवाह की संभावना न के बराबर है। इतना ही नहीं, इसके लिए आवंटित राशि के भी खर्च हो पाने की संभावना न ही है। 

ध्यान जल मार्ग पर
मंत्रालय के अधिकारियों के अनुसार गडकरी ने फिलहाल अपना ध्यान जलमार्ग के विकास पर फोकस कर लिया है। वह गंगा में मोटरबोट, स्टीमर, उन्नत नाव तथा जल पर्यटन को बढ़ावा देने की संभावनाओं पर काम कर रहे हैं। इसके लिए उन्होंने मंत्रालय के अफसरों को खास दिशा-निर्देश भी दिया है। रहा सवाल गंगा, यमुना का तो सरकार जनता को दिखने वाले काम की तरफ ध्यान केंद्रित कर रही है। इसमें घाटों की सफाई, नदी के दोनों छोर की स्वच्छता आदि प्रमुख है।

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