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Ground Report @Karimnagar: भाजपा के बंडी संजय की प्रतिष्ठा पर दांव, केंद्रीय योजनाओं व ध्रुवीकरण से उम्मीद
Fri, 24 Nov 2023 06:12 AM IST
जलज मिश्रा
नितिन यादव, हैदराबाद
नितिन यादव, हैदराबाद
Published by: जलज मिश्रा
Updated Fri, 24 Nov 2023 06:12 AM IST
सार
करीमनगर और उससे काटकर बनाए गए तीन अन्य जिलों की कुल 13 सीटों पर इस बार मुकाबला कुछ अलग है। भाजपा के बड़े चेहरे भी यहीं से मैदान में हैं। पिछले कुछ समय में कुछ सांप्रदायिक मुद्दों ने भी इस क्षेत्र की राजनीति को गरमा दिया था और अब इसका असर भी है।
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Telangana Election 2023
- फोटो : AMAR UJALA
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विस्तार
यह वो जमीन है जहां से तेलंगाना बनाने के आंदोलन की चिंगारी फूटी थी। करीमनगर से मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव यानी केसीआर सांसद रह चुके हैं और पूर्व प्रधानमंत्री पीवी नरसिंह राव भी इसी जिले के रहने वाले थे। उनका गृहनगर हुस्नाबाद में है। आंध्र प्रदेश अलग होने के बाद नए तेलंगाना में पुराने जिलों को बांटकर दस जिले से 33 जिले कर दिए गए।
करीमनगर और उससे काटकर बनाए गए तीन अन्य जिलों की कुल 13 सीटों पर इस बार मुकाबला कुछ अलग है। भाजपा के बड़े चेहरे भी यहीं से मैदान में हैं। पिछले कुछ समय में कुछ सांप्रदायिक मुद्दों ने भी इस क्षेत्र की राजनीति को गरमा दिया था और अब इसका असर भी है। पिछले दिनों बीआरएस के गृह मंत्री महमूद अली ने मुख्यमंत्री केसीआर की समानता पैगंबर मोहम्मद के दौर के एक बादशाह से कर दी तो लोगों में नाराजगी हुई। हालांकि बाद में उन्होंने माफी भी मांग ली।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का भी कार्यक्रम प्रस्तावित
भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और बड़े चेहरे बंडी संजय करीमनगर सदर से मैदान में हैं। वह करीमनगर से सांसद हैं। वह विधायक का चुनाव पिछली बार भी हार गए थे। लेकिन भाजपा ने यहां खुद को लगातार मजबूत किया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का भी 27 नवंबर को करीमनगर में कार्यक्रम प्रस्तावित है। स्थानीय निवासी गर्व से बताते हैं कि यहीं के एसआरके कॉलेज में केसीआर ने 2001 में अलग तेलंगाना राज्य के लिए पहली सभा की थी। करीमनगर के प्रवेश द्वार पर करीमनगर स्मार्ट सिटी का बोर्ड दिखता है। पता चलता है कि यह केंद्रीय परियोजना का हिस्सा है। लोग स्वीकारते भी हैं कि शहर के विकास में स्मार्ट सिटी परियोजना ने काफी योगदान दिया है।
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करीमनगर की राजनीति भाजपा नेता बंडी संजय के इर्द-गिर्द
करीमनगर की राजनीति फिलहाल तो भाजपा नेता बंडी संजय के इर्द-गिर्द ही घूमती है। स्थानीय पत्रकारों ने बताया कि यहां शहर के मुख्य बाजार की ओर जाने वाली सड़क के बीच में धार्मिक स्थल आ रहा था। सड़क चौडीकरण के लिए उसे हटाया जाना जरूरी था। करीब दस साल पहले बंडी संजय ने इस मामले को जोर से उठाया। उन्होंने और उनके समर्थकों ने दूसरे पक्ष के धार्मिक स्थल को हटाने की जोरदार पैरवी की। जानकार कहते हैं कि धार्मिक स्थल तो नहीं हटा लेकिन बंडी संजय लाइमलाइट में आ गए। तीन लाख वोटरों की वाले इस विधानसभा क्षेत्र में 70 हजार मुस्लिम वोटरों की संख्या है। जीतने के बाद बीआरएस ने इन्हें साधने के लिए कई मुस्लिम संगठनों के कार्यालयों के लिए जगह दी। भाजपा ने इसे भी चुनाव में मुद्दा बनाया हुआ है। कांग्रेस के प्रत्याशी पूर्वमला शीनू मुकाबले को त्रिकोणीय बनाए हुए हैं।
भाजपा के बड़े चेहरे की परीक्षा
करीमनगर जिले की हुजूराबाद सीट से भाजपा के एक और बड़े चेहरे इटाला राजेंद्र की परीक्षा है। वह बीआरएस से दो बार विधायक रह चुके हैं। बाद में भाजपा के टिकट पर उपचुनाव लड़ा। बीआरएस सरकार ने पूरी ताकत लगा दी थी लेकिन इटाला राजेंद्र सीट बचाने में कामयाब रहे थे। उन्होंने बीआरएस के गुल्लू श्रीनिवास को करीब 24 हजार वोटों से हराया था। इस बार उनके सामने बीआरएस से कौशिक रेड्डी है। रेड्डी 2018 का विधानसभा चुनाव कांग्रेस से लड़े थे, इसके बाद बीआरएस ने उन्हें एमएलसी बनाया। अब विधानसभा चुनाव लड़ रहे हैं। कांग्रेस से युवा यू प्रणव मैदान में हैं।
मुस्लिम वोट यहां पर बंट रहे हैं
हुजूराबाद के ऑटो ड्राइवर बन्नी कहते हैं कि इस बार कांग्रेस का जोर है। वह भी मानते हैं कि यहां की सीट से भाजपा जीत सकती है लेकिन प्रदेश में कांग्रेस की सरकार के बारे में भी सुना जा रहा है। चाय की दुकान पर बैठे सादिक का मानना है कि मुस्लिम वोट यहां पर बंट रहे हैं। ज्यादा बीआरएस के साथ हैं और कुछ कांग्रेस के खाते में जाएंगे। रामपुर इलाके में मिले युवा सुधीर तो सीधा बोलते हैं कि इस सीट पर भाजपा का किसी से मुकाबला नहीं है। वह आधी हिंदी और आधी अंग्रेजी में कहते हैं कि जब सौ विधायक मिलकर उपचुनाव में नहीं हरा पाए तो अब कौन सामने आएगा।
नगर पालिका में ओवैसी के सात पार्षद जीते थे
वैसे तो हैदराबाद से बाहर एएमआईएम की कोई खास दस्तक नहीं हैं। लेकिन पिछले नगर पालिका चुनाव में एआईएमआईएम के सात प्रत्याशी जीते थे। एक बार डिप्टी मेयर भी रह चुका है। स्थानीय पत्रकार इन चुनावों में पार्षदों के असर को अहम मानते हैं। एक बाइक शोरूम के संचालक हबीब का कहना है कि यहां के लोग पढ़े-लिखे हैं और सोच समझकर ही वोट डालेंगे। शाकिर का कहना है कि मुस्लिम वोटर बीआरएस और कांग्रेस दोनों की ओर हैं। कांग्रेस ने अपनी छह गारंटियों में काफी कुछ दिया है। युवा रिजवान का कहना है, बीआरएस के विधायक कई बार चुने जा चुके हैं, अब बदल कर भी देखा जाना चाहिए। वह मानते हैं कि धार्मिक स्थल हटाने के मामले को बंडी संजय ने गर्माया था लेकिन एमपी बनने के बाद उन्होंने ऐसे बयानों से परहेज किया है।
आईआईटी से पढ़ीं उषा मैदान में
पिद्दापल्ली जिले में बसपा प्रत्याशी दसारी उषा ने मुकाबले को रोचक बना दिया है। 27 वर्षीय उषा ने आईआईटी खड़गपुर से बीटेक करने के बाद समाज सेवा का फैसला किया। युवा चेहरे को लोग काफी पसंद भी कर रहे हैं। बसपा सुप्रीमो मायावती ने भी उषा के लिए रैली को संबोधित किया। उनके सामने बीआरएस से विधायक मनोहर रेड्डी और कांग्रेस के विजय रमना राव और भाजपा से प्रदीप राव हैं। जिले की मंथनी सीट पर कांग्रेस के श्रीधर बाबू, सुनील रेड्डी मैदान में हैं। रामगुंडम से बीजेपी से संध्या रानी, कांग्रेस से मक्खन सिंह और बीआरएस से विधायक सीके चंदर हैं।
करीमनगर जिले की दूसरी सीटों पर भी कड़ा मुकाबला
मानाकुंड: कांग्रेस के सत्यनारायण मजबूती से डटे हैं। भाजपा के आरापल्ली मोहन कांग्रेस से बीआरएस होते हुए आए हैं। बीआरएस से रसमाया हैं। विकास न होना एक बड़ा मुद्दा है।
हुस्नाबाद: यह क्षेत्र नक्सल प्रभावित रहा है। लंबाड़ा जनजाति की संख्या भी खासी है। कम्युनिस्ट पार्टियों का भी कैडर है और वह कांग्रेस को समर्थन कर रहा है। करीमनगर के पूर्व एमपी पूनम प्रभाकर कांग्रेस से मैदान में हैं तो बीआरएस के वर्तमान विधायक सतीश और भाजपा से बोम्मा श्रीराम हैं।
सुपरडंडी: एससी रिजर्व सीट से बीआरएस से विधायक रवि शंकर के सामने कांग्रेस से वी सत्यनारायण और बीजेपी से महिला उम्मीदवार बी शोभा हैं।
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करीमनगर और उससे काटकर बनाए गए तीन अन्य जिलों की कुल 13 सीटों पर इस बार मुकाबला कुछ अलग है। भाजपा के बड़े चेहरे भी यहीं से मैदान में हैं। पिछले कुछ समय में कुछ सांप्रदायिक मुद्दों ने भी इस क्षेत्र की राजनीति को गरमा दिया था और अब इसका असर भी है। पिछले दिनों बीआरएस के गृह मंत्री महमूद अली ने मुख्यमंत्री केसीआर की समानता पैगंबर मोहम्मद के दौर के एक बादशाह से कर दी तो लोगों में नाराजगी हुई। हालांकि बाद में उन्होंने माफी भी मांग ली।
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का भी कार्यक्रम प्रस्तावित
भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और बड़े चेहरे बंडी संजय करीमनगर सदर से मैदान में हैं। वह करीमनगर से सांसद हैं। वह विधायक का चुनाव पिछली बार भी हार गए थे। लेकिन भाजपा ने यहां खुद को लगातार मजबूत किया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का भी 27 नवंबर को करीमनगर में कार्यक्रम प्रस्तावित है। स्थानीय निवासी गर्व से बताते हैं कि यहीं के एसआरके कॉलेज में केसीआर ने 2001 में अलग तेलंगाना राज्य के लिए पहली सभा की थी। करीमनगर के प्रवेश द्वार पर करीमनगर स्मार्ट सिटी का बोर्ड दिखता है। पता चलता है कि यह केंद्रीय परियोजना का हिस्सा है। लोग स्वीकारते भी हैं कि शहर के विकास में स्मार्ट सिटी परियोजना ने काफी योगदान दिया है।
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करीमनगर की राजनीति भाजपा नेता बंडी संजय के इर्द-गिर्द
करीमनगर की राजनीति फिलहाल तो भाजपा नेता बंडी संजय के इर्द-गिर्द ही घूमती है। स्थानीय पत्रकारों ने बताया कि यहां शहर के मुख्य बाजार की ओर जाने वाली सड़क के बीच में धार्मिक स्थल आ रहा था। सड़क चौडीकरण के लिए उसे हटाया जाना जरूरी था। करीब दस साल पहले बंडी संजय ने इस मामले को जोर से उठाया। उन्होंने और उनके समर्थकों ने दूसरे पक्ष के धार्मिक स्थल को हटाने की जोरदार पैरवी की। जानकार कहते हैं कि धार्मिक स्थल तो नहीं हटा लेकिन बंडी संजय लाइमलाइट में आ गए। तीन लाख वोटरों की वाले इस विधानसभा क्षेत्र में 70 हजार मुस्लिम वोटरों की संख्या है। जीतने के बाद बीआरएस ने इन्हें साधने के लिए कई मुस्लिम संगठनों के कार्यालयों के लिए जगह दी। भाजपा ने इसे भी चुनाव में मुद्दा बनाया हुआ है। कांग्रेस के प्रत्याशी पूर्वमला शीनू मुकाबले को त्रिकोणीय बनाए हुए हैं।
भाजपा के बड़े चेहरे की परीक्षा
करीमनगर जिले की हुजूराबाद सीट से भाजपा के एक और बड़े चेहरे इटाला राजेंद्र की परीक्षा है। वह बीआरएस से दो बार विधायक रह चुके हैं। बाद में भाजपा के टिकट पर उपचुनाव लड़ा। बीआरएस सरकार ने पूरी ताकत लगा दी थी लेकिन इटाला राजेंद्र सीट बचाने में कामयाब रहे थे। उन्होंने बीआरएस के गुल्लू श्रीनिवास को करीब 24 हजार वोटों से हराया था। इस बार उनके सामने बीआरएस से कौशिक रेड्डी है। रेड्डी 2018 का विधानसभा चुनाव कांग्रेस से लड़े थे, इसके बाद बीआरएस ने उन्हें एमएलसी बनाया। अब विधानसभा चुनाव लड़ रहे हैं। कांग्रेस से युवा यू प्रणव मैदान में हैं।
मुस्लिम वोट यहां पर बंट रहे हैं
हुजूराबाद के ऑटो ड्राइवर बन्नी कहते हैं कि इस बार कांग्रेस का जोर है। वह भी मानते हैं कि यहां की सीट से भाजपा जीत सकती है लेकिन प्रदेश में कांग्रेस की सरकार के बारे में भी सुना जा रहा है। चाय की दुकान पर बैठे सादिक का मानना है कि मुस्लिम वोट यहां पर बंट रहे हैं। ज्यादा बीआरएस के साथ हैं और कुछ कांग्रेस के खाते में जाएंगे। रामपुर इलाके में मिले युवा सुधीर तो सीधा बोलते हैं कि इस सीट पर भाजपा का किसी से मुकाबला नहीं है। वह आधी हिंदी और आधी अंग्रेजी में कहते हैं कि जब सौ विधायक मिलकर उपचुनाव में नहीं हरा पाए तो अब कौन सामने आएगा।
नगर पालिका में ओवैसी के सात पार्षद जीते थे
वैसे तो हैदराबाद से बाहर एएमआईएम की कोई खास दस्तक नहीं हैं। लेकिन पिछले नगर पालिका चुनाव में एआईएमआईएम के सात प्रत्याशी जीते थे। एक बार डिप्टी मेयर भी रह चुका है। स्थानीय पत्रकार इन चुनावों में पार्षदों के असर को अहम मानते हैं। एक बाइक शोरूम के संचालक हबीब का कहना है कि यहां के लोग पढ़े-लिखे हैं और सोच समझकर ही वोट डालेंगे। शाकिर का कहना है कि मुस्लिम वोटर बीआरएस और कांग्रेस दोनों की ओर हैं। कांग्रेस ने अपनी छह गारंटियों में काफी कुछ दिया है। युवा रिजवान का कहना है, बीआरएस के विधायक कई बार चुने जा चुके हैं, अब बदल कर भी देखा जाना चाहिए। वह मानते हैं कि धार्मिक स्थल हटाने के मामले को बंडी संजय ने गर्माया था लेकिन एमपी बनने के बाद उन्होंने ऐसे बयानों से परहेज किया है।
आईआईटी से पढ़ीं उषा मैदान में
पिद्दापल्ली जिले में बसपा प्रत्याशी दसारी उषा ने मुकाबले को रोचक बना दिया है। 27 वर्षीय उषा ने आईआईटी खड़गपुर से बीटेक करने के बाद समाज सेवा का फैसला किया। युवा चेहरे को लोग काफी पसंद भी कर रहे हैं। बसपा सुप्रीमो मायावती ने भी उषा के लिए रैली को संबोधित किया। उनके सामने बीआरएस से विधायक मनोहर रेड्डी और कांग्रेस के विजय रमना राव और भाजपा से प्रदीप राव हैं। जिले की मंथनी सीट पर कांग्रेस के श्रीधर बाबू, सुनील रेड्डी मैदान में हैं। रामगुंडम से बीजेपी से संध्या रानी, कांग्रेस से मक्खन सिंह और बीआरएस से विधायक सीके चंदर हैं।
करीमनगर जिले की दूसरी सीटों पर भी कड़ा मुकाबला
मानाकुंड: कांग्रेस के सत्यनारायण मजबूती से डटे हैं। भाजपा के आरापल्ली मोहन कांग्रेस से बीआरएस होते हुए आए हैं। बीआरएस से रसमाया हैं। विकास न होना एक बड़ा मुद्दा है।
हुस्नाबाद: यह क्षेत्र नक्सल प्रभावित रहा है। लंबाड़ा जनजाति की संख्या भी खासी है। कम्युनिस्ट पार्टियों का भी कैडर है और वह कांग्रेस को समर्थन कर रहा है। करीमनगर के पूर्व एमपी पूनम प्रभाकर कांग्रेस से मैदान में हैं तो बीआरएस के वर्तमान विधायक सतीश और भाजपा से बोम्मा श्रीराम हैं।
सुपरडंडी: एससी रिजर्व सीट से बीआरएस से विधायक रवि शंकर के सामने कांग्रेस से वी सत्यनारायण और बीजेपी से महिला उम्मीदवार बी शोभा हैं।