Gujarat: अध्ययन से खुलासा, कोरोना की पहली लहर में सरकारी आंकड़ों के मुकाबले हुई थीं दोगुनी मौतें
अध्ययन में दावा किया गया है कि मौतों में सबसे तेज वृद्धि अप्रैल 2021 के अंत में देखी गई थी, जिसमें मृत्यु दर में अनुमानित संख्या के मुकाबले 678 प्रतिशत की वृद्धि हुई थी।
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एक अध्ययन के अनुसार, मार्च 2020 से अप्रैल 2021 तक गुजरात की 162 नगर पालिकाओं में से 90 में कोरोना की पहली लहर के दौरान मौतों की संख्या राज्य की आधिकारिक कोविड-19 मृत्यु दर से दोगुनी थी। हार्वर्ड टी. एच. चैन स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ, यूएस के शोधकर्ताओं और सहयोगियों ने पूरे गुजरात में 162 नगर पालिकाओं में से 90 के नागरिक मृत्यु रजिस्टरों के डेटा का उपयोग किया, ताकि सभी मौतों के कारणों पर कोविड-19 महामारी के प्रभाव का अनुमान लगाया जा सके। पीएलओएस ग्लोबल पब्लिक हेल्थ जर्नल में मंगलवार को प्रकाशित अध्ययन में मार्च 2020 से अप्रैल 2021 तक महामारी के दौरान अधिक मृत्यु दर का अनुमान लगाया गया है।
90 नगर पालिकाओं में 21,300 अतिरिक्त मौतों का अनुमान
अध्ययन के लेखकों ने कहा, हमने इस अवधि में इन 90 नगर पालिकाओं में 21,300 अतिरिक्त मौतों का अनुमान लगाया है, जो अपेक्षित से 44 प्रतिशत अधिक है। इन अतिरिक्त मौतों में से अधिकांश मौतें किसी अन्य आपदा के सामने नहीं आने की स्थित में कोविड-19 से हुई मौतें मानी जा सकती हैं। शोधकर्ताओं ने कहा कि इस अवधि के दौरान आधिकारिक सरकारी आंकड़ों ने पूरे गुजरात में कोविड-19 के कारण 10,098 मौतों की सूचना मिली।
मौतों में सबसे तेज वृद्धि अप्रैल 2021 के अंत में देखी गई, जिसमें मृत्यु दर में अनुमानित संख्या से 678 प्रतिशत की वृद्धि हुई थी। अध्ययन में पाया गया कि मृत्यु दर में सबसे अधिक वृद्धि अन्य आयु समूहों की तुलना में 40 से 65 आयु वर्ग में देखी गई। शोधकर्ताओं ने कहा कि 2011 की जनगणना के आधार पर इन 90 नगर पालिकाओं के लिए अतिरिक्त मृत्यु दर का अनुमान लगभग 8 प्रतिशत आबादी का प्रतिनिधित्व करता है। भारत में महामारी की डेल्टा लहर मई 2021 में चरम पर होने से पहले भी गुजरात राज्य के लिए ये मौतें आधिकारिक कोविड-19 मौतों की संख्या से अधिक है।
भारत में महामारी से संबंधित मृत्यु दर आधिकारिक आंकड़ों से बहुत अधिक होने का अंदेशा
पहले के अध्ययनों से निष्कर्ष निकला है कि भारत में महामारी से संबंधित मृत्यु दर आधिकारिक आंकड़ों से बहुत अधिक है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने पिछले एक साल में ऐसे अनुमानों और आकलन पद्धति को चुनौती दी थी। लेखकों ने कहा कि यह अध्ययन आधिकारिक मृत्यु पंजीकरण डेटा रिकॉर्डिंग के पहले बिंदु से सीधे डेटा का उपयोग करते हुए मार्च 2020 से अप्रैल 2021 तक गुजरात में उच्च मृत्यु दर के मजबूत प्रमाण देता है। हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के अलावा इस टीम में नेशनल फाउंडेशन फॉर इंडिया, नई दिल्ली, स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ मेडिसिन और यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया, बर्कले, यूएस के शोधकर्ता भी शामिल थे।