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चीन-अमेरिका को छोड़ सैमसंग ने भारत में ही क्यों खोली दुनिया की सबसे बड़ी मोबाइल फैक्ट्री ?

Mon, 09 Jul 2018 04:34 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Mon, 09 Jul 2018 04:34 PM IST
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Except china us why Samsung has opened worlds largest mobile factory in India

दुनिया की सबसे बड़ी सूचना प्रौद्योगिकी कंपनी सैमसंग इलेक्ट्रॉनिक्स ने भारत में दुनिया की सबसे बड़ी मोबाइल फैक्ट्री की स्थापना की है। यह फैक्ट्री उत्तर प्रदेश केे नोएडा में स्थापित की गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति मून जे इन के साथ सैमसंग के इस संयंत्र का उद्घाटन करेंगे। नोएडा के सेक्टर-81 में स्थित यह नई यूनिट 5,000 करोड़ रुपये के निवेश से तैयार हुई है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, अगले कुछ साल में भारत में 10 हजार करोड़ रुपये का निवेश आने की संभावना है, जबकि चार से पांच लाख रोजगार के अवसर पैदा होंगे। 

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यह प्रधानमंत्री मोदी की पहल 'मेक इन इंडिया' के तहत सबसे बड़ी उपलब्धि है, क्योंकि 2014 में 'मेक इन इंडिया' की जब शुरुआत हुई थी, उस समय भारत में मोबाइल कंपनियों का बाजार लगभग 19,000 करोड़ रुपये का था। लेकिन इस पहल के बाद महज दो सालों में ही इसमें रिकॉर्ड 373 फीसदी की बढ़ोतरी हुई। 2016-17 में यह बाजार 90,000 करोड़ तक पहुंच गया था। 'मेक इन इंडिया' की घोषणा के बाद से लगभग 40 मोबाइल फोन कंपनियों ने अपना प्लांट भारत में स्थापित किया है। अब ये आंकड़ा और भी बढ़ गया होगा।
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नई फैक्ट्री को लेकर कंपनी का हर साल 12 करोड़ मोबाइल तैयार करने का दावा है। फिलहाल नोएडा और तमिलनाडु की फैक्ट्री से 6.7 करोड़ मोबाइल का उत्पादन होता है। नोएडा की यह फैक्ट्री 1997 में शुरू हुई थी और 2005 में यहां मोबाइल का उत्पादन शुरू हुआ था। साल 2012 में एस सीरीज का फ्लैगशिप स्मार्टफोन एस3 लॉन्च हुआ जो नोएडा की फैक्ट्री में ही तैयार हुआ था।
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इन सबके बावजूद सबसे बड़ा सवाल ये है कि आखिर सैमसंग ने चीन और अमेरिका जैसे संपन्न देशों को छोड़कर इतनी बड़ी मोबाइल फैक्ट्री भारत में ही लगाने की क्यों सोची, जबकि चीन तो दुनिया का सबसे बड़ा मोबाइल विनिर्माण (मैन्यूफैक्चरिंग) हब है। चीन में सस्ते से सस्ता और अच्छे से अच्छा मोबाइल बनता है और इसी के आधार पर यह दुनिया का सबसे बड़ा विनिर्माण (मैन्यूफैक्चरिंग) हब बना है। 

भारतीय बाजार पर पकड़ के लिए हरसंभव प्रयास
दरअसल, भारतीय मोबाइल बाजार में अपनी पकड़ बनाए रखने के लिए सैमसंग इन दिनों हरसंभव उपाय कर रही है। इसी रणनीति के तहत नोएडा में नए संयंत्र का निर्माण किया गया है। इस संयंत्र के निर्माण के समय बताया गया था कि उक्त संयंत्र की सालाना उत्पादन क्षमता 12 करोड़ मोबाइल फोन होगी। इससे वह भारतीय मोबाइल फोन बाजार में एक बार फिर अपनी स्थिति मजबूत कर सकेगी।    

भारत में ही दुनिया की सबसे बड़ी मोबाइल फैक्ट्री क्यों ?

सैमसंग ने दुनिया के कई बड़े देशों को छोड़कर भारत में ही अपनी सबसे बड़ी फैक्ट्री लगाने की क्यों सोची, यह सबसे बड़ा सवाल है। इसके कई कारण हैं। एक तो यहां मोबाइल कंपनियों को अपनी फैक्ट्री लगाने में ज्यादा माथापच्ची नहीं करनी पड़ती जबकि दूसरे देशों में इन कंपनियों को कई तरह की कानूनी प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ता है और दूसरा ये कि वहां टैक्स की भी अधिकता होती है, श्रम लागत भी ज्यादा होती है और भारत की अपेक्षा वहां का मोबाइल बाजार भी काफी छोटा है। 

भारत में विनिर्माण कंपनियों के लिए इसलिए फायदेमंद होता है क्योंकि यहां एक बड़ा घरेलू बाजार है। इसलिए वैश्विक निर्माता यहां जोखिम लेने के लिए भी तैयार रहते हैं। दूसरे देशों की अपेक्षा भारत उनके लिए एक बेहतरीन विकल्प है। यही कारण है कि कई अंतरराष्ट्रीय कंपनियों ने अपनी विनिर्माण इकाई भारत में खोला है। 

इलेक्ट्रानिक्स दुनिया की दिग्गज कंपनी एलजी के प्रबंध निदेशक किम की वान का कहना है कि हमने महसूस किया है कि भारत में निवेश करने का यही सही समय है। यहां स्मार्टफोन्स की मांग तेजी से बढ़ रही है। 
वहीं, मोबाइल फोन कंपनी लावा के प्रबंध निदेशक और चेयरमैन हरि ओम राय का कहना है कि दुनिया का सबसे बड़ा विनिर्माण हब चीन में इंजीनियरिंग और श्रम की लागत लगातार बढ़ रही है और खपत भी कम है, जिसकी वजह से वहां फैक्ट्रियां खोलना अब आसान नहीं रह गया है। जबकि इसके विपरीत, भारत इस क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है। यहां श्रम लागत बहुत ही कम है, खपत ज्यादा है और यहां प्रतिभावान सॉफ्टवेयर इंजीनियरों की संख्या भी भारी मात्रा है, जो कंपनियों के लिए काफी फायदेमंद होता है। 

इसके अलावा भारत में व्यवसाय करना काफी आसान है, बुनियादी ढांचा (इंफ्रास्ट्रक्चर) तेजी से बढ़ रहा है, जीएसटी के तहत लाभकारी नीतियां हैं और इनकम टैक्स बहुत ही कम है। इसके अलावा यहां से मध्य पूर्व और अफ्रीकी देशों में उत्पादों का निर्यात भी काफी सुगम है। यहीं वे कारक हैं जिनकी वजह से मोबाइल कंपनियों ने यहां निवेश करना शुरू किया है और आज भारत चीन के बाद दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा विनिर्माण (मैन्यूफैक्चरिंग) हब बन चुका है। 

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