फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Ex-DU professor Saibaba released from Nagpur jail after acquittal in Maoist links case

Maoist links case: HC से राहत मिलने के बाद डीयू के पूर्व प्रोफेसर साईबाबा जेल से हुए रिहा, जानें पूरा मामला

Thu, 07 Mar 2024 02:59 PM IST
काव्या मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नागपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नागपुर Published by: काव्या मिश्रा Updated Thu, 07 Mar 2024 02:59 PM IST
सार

जीएन साईबाबा और उनके सह-आरोपियों को 2014 में माओवादी गुटों से जुड़े होने और भारत विरोधी गतिविधियों में शामिल होने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। आरोपियों ने सजा के खिलाफ बॉम्बे हाईकोर्ट में अपील दायर की थी, जहां से उन्हें बरी कर दिया गया। 

विज्ञापन
Ex-DU professor Saibaba released from Nagpur jail after acquittal in Maoist links case
जीएन साईबाबा - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

दिल्ली विश्वविद्यालय के पूर्व प्रोफेसर जीएन साईबाबा आखिरकार गुरुवार को जेल से बाहर आ गए। दो दिन पहले ही बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर बेंच ने साईबाबा समेत पांच अन्य को माओवादी लिंक के एक कथित मामले में बरी कर दिया था। साथ ही उनकी उम्रकैद की सजा को रद्द करने का फैसला सुनाया था।

विज्ञापन


नागपुर केंद्रीय कारागार से रिहा होने के बाद साईबाबा ने कहा, 'मेरा स्वास्थ्य बहुत खराब है। मैं बात करने की स्थिति में नहीं हूं। पहले मुझे इलाज की जरूरत है, तब मैं कुछ बोल सकूंगा।' इस मौके पर साईबाबा ने पत्रकारों से कहा, इस बात की पूरी संभावना थी कि मैं जीवित बाहर नहीं आ पाता, लेकिन यह आश्चर्य है...जेल का क्रूर जीवन भुगतने के बावजूद मैं जीवित बाहर आ गया। इससे पहले, उन्होंने मीडियाकर्मियों से बात करने से इन्कार करते हुए कहा था, 'मेरी तबीयत बहुत खराब है। मैं बात नहीं कर सकता। मुझे पहले मेडिकल ट्रीटमेंट लेना होगा, उसके बाद ही मैं कुछ बोल पाऊंगा। हालांकि, वकीलों और पत्रकारों के अनुरोध के बाद उन्होंने अपना मन बदल लिया।
विज्ञापन


अपने आठ साल के कारावास को याद करते हुए साईबाबा ने कहा कि जेल के अंदर उनकी कोई पहुंच नहीं थी। मैं अपनी व्हीलचेयर से बाहर नहीं निकल सकता था। न खुद शौचालय जा सकता था और न ही स्नान कर सकता था। यह आश्चर्य की बात है कि मैं आज जेल से जीवित बाहर आ गया। परिवार का एक सदस्य जेल के बाहर जीएन साईबाबा का इंतजार कर रहा था। 
विज्ञापन
विज्ञापन


यह है मामला
जीएन साईबाबा और उनके सह-आरोपियों को 2014 में माओवादी गुटों से जुड़े होने और भारत विरोधी गतिविधियों में शामिल होने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। आरोपियों ने सजा के खिलाफ अपील दायर की थी। अब साईबाबा, हेम मिश्रा, महेश तिर्की, विजय तिर्की, नारायण सांगलिकर, प्रशांत राही और पांडु नरोटे (मृतक) को बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर बेंच ने बरी कर दिया।

बता दें, साईबाबा, महेश तिर्की, हेम मिश्रा और प्रशांत राही को उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी। जबकि विजय तिर्की को 2017 में एक विशेष अदालत ने 10 साल जेल की सजा सुनाई थी। विजय जमानत पर बाहर था, जबकि नरोटे की पिछले साल स्वाइन फ्लू से संक्रमित होने के बाद जेल में मौत हो गई थी।

क्या थे आरोप
बता दें कि साल 2014 में नक्सलियों से संबंध मामले में साई बाबा की गिरफ्तारी हुई थी। साई बाबा फिलहाल नागपुर सेंट्रल जेल में बंद थे। गिरफ्तारी से पहले व्हीलचेयर से चलने वाले प्रोफेसर साई बाबा दिल्ली विश्वविद्यालय के राम लाल आनंद कॉलेज में अंग्रेजी पढ़ाते थे। जांच एजेंसियों के अनुसार वह छत्तीसगढ़ के अबुजमाड़ के जंगलों में छिपे हुए नक्सलियों और प्रोफेसर के बीच एक कूरियर के रूप में काम कर रहे थे।

बॉम्बे हाईकोर्ट ने कर दिया था बरी
पिछले साल, दिल्ली विश्वविद्यालय के पूर्व प्रोफेसर जीएन साईबाबा और अन्य को बरी करते हुए बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर खंडपीठ ने कहा कि था जब 2014 में निचली अदालत ने अभियोजन पक्ष के आरोप पत्र का संज्ञान लिया तो उस समय साईबाबा के खिलाफ यूएपीए के तहत अभियोजन चलाने की मंजूरी नहीं दी गई थी। यूएपीए के तहत वैध मंजूरी न होने के कारण निचली अदालत की कार्यवाही ‘अमान्य’ है और इसलिए निचली अदालत का आदेश रद्द किए जाने के लायक है। मामले में पहले गिरफ्तार पांच आरोपियों के खिलाफ 2014 में यूएपीए के तहत अभियोग चलाने को मंजूरी दी गई थी और साईबाबा के खिलाफ इसकी अनुमति 2015 में दी गई।

हाईकोर्ट की एक अन्य पीठ ने 14 अक्टूबर, 2022 को इस बात का संज्ञान लेते हुए साईबाबा को बरी कर दिया था कि यूएपीए के तहत वैध मंजूरी के अभाव में मुकदमे की कार्यवाही ‘अमान्य’ थी। महाराष्ट्र सरकार ने उसी दिन फैसले को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।

शीर्ष अदालत ने शुरू में आदेश पर रोक लगा दी और बाद में अप्रैल 2023 में हाईकोर्ट के आदेश को रद्द कर दिया और साईबाबा द्वारा दायर अपील पर नए सिरे से सुनवाई करने का निर्देश दिया। शारीरिक असमर्थता के कारण व्हीलचेयर पर रहने वाले 54 वर्षीय साईबाबा 2014 में मामले में गिरफ्तारी के बाद से नागपुर केंद्रीय कारागार में बंद हैं।


वर्ष 2017 में, महाराष्ट्र के गढ़चिरौली जिले की एक सत्र अदालत ने कथित माओवादी संबंधों और देश के खिलाफ युद्ध छेड़ने जैसी गतिविधियों में शामिल होने के लिए साईबाबा, एक पत्रकार और जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) के एक छात्र सहित पांच अन्य को दोषी ठहराया था। सत्र अदालत ने उन्हें यूएपीए और भारतीय दंड संहिता के विभिन्न प्रावधानों के तहत दोषी ठहराया था।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed