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सामूहिक दुष्कर्म मामला: आरोप पत्र में खुलासा- पूर्व मुख्य सचिव ने सबूतों को मिटाने के लिए किया पद का दुरुपयोग
Sat, 18 Feb 2023 06:45 PM IST
निर्मल कांत
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पोर्ट ब्लेयर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पोर्ट ब्लेयर
Published by: निर्मल कांत
Updated Sat, 18 Feb 2023 06:45 PM IST
सार
आरोप पत्र के मुताबिक, पूर्व मुख्य सचिव के निजी सहायक बी. सोनी से पूछताछ के दौरान यह पता चला है कि आरोपी नारायण ने वॉट्सऐप के जरिए सोनी को कुछ वॉइस नोट भेजे थे, जो इस मामले में साक्ष्य नष्ट करने के संबंध में महत्वपूर्ण सबूत हैं।
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आरोपी जितेंद्र नारायण
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
अंडमान-निकोबार द्वीप समूह में एक युवती (21 वर्षीय) से दुष्कर्म के मामले में पूर्व मुख्य सचिव जितेंद्र नारायण के खिलाफ विशेष जांच दल ने आरोप पत्र दायर किया है। आरोप पत्र में खुलासा किया गया है कि नारायण ने पिछले साल अपने आधिकारिक आवास पर अपनी मौजूदगी के सबूत नष्ट करने के लिए पद का दुरुपयोग किया।
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आरोप पत्र के मुताबिक, पूर्व मुख्य सचिव के निजी सहायक बी. सोनी से पूछताछ के दौरान यह पता चला है कि आरोपी नारायण ने वॉट्सऐप के जरिए सोनी को कुछ वॉइस नोट भेजे थे, जो इस मामले में साक्ष्य नष्ट करने के संबंध में महत्वपूर्ण सबूत हैं।
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आरोप पत्र में पोर्ट ब्लेयर में नारायण के आलीशान सरकारी बंगले में लगाए गए 'नेटवर्क वीडियो रिकॉर्डर' (एनवीआर) को हटाने और 25 जुलाई, 2022 को एक निजी एयरलाइन के जरिए के 4 टीबी हार्ड ड्राइव को दिल्ली भेजने का भी जिक्र किया गया है।
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सोनी के मोबाइल फोन को जब्त किया गया था और जांच व तारीख निकालने के लिए सेंट्रल फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (सीएफएसएल) भेजा गया था। जिसके बाद यह पता चला (नारायण और सोनी के चैट के आधार पर) कि उसने निजी एयरलाइन के जरिए दिल्ली के लिए 4 टीबी की हार्ड डिस्क ड्राइव भेजी थी।
पीड़िता के वकील फटिक चंद्र दास ने कहा, पूर्व मुख्य सचिव जितेंद्र नारायण के मामले में पुलिस ने कोर्ट के समक्ष आरोप पत्र दायर किया है, जिसे मैंने पीड़िता की ओर से एक वकील के रूप में देखा है और मैंने एसआईटी की विस्तृत रिपोर्ट देखी है। यह उचित सबूतों पर आधारित है, और मूल्यवान सामग्री चार्जशीट में उपलब्ध है। मैं पुलिस के प्रयास की सराहना करता हूं। अब यह मामला पोर्ट ब्लेयर में हाईकोर्ट की सर्किट बेंच के समक्ष 20 फरवरी को सूचीबद्ध किया गया है। जमानत याचिका का विरोध करने के लिए मैं पीड़िता की ओर से पेश होऊंगा।
आरोपपत्र से यह भी पता चला है कि 27 जुलाई, 2020 को दिल्ली रवाना होने से पहले (उनका स्थानांतरण पत्र मिलने पर) नारायण ने सीसीटीवी तकनीशियन सवाब हुसैन को अपने आवास पर बुलाया और उससे हार्ड डिस्क में डाटा हटाने या मिटाने के लिए कहा। आरोपपत्र में कहा गया है, हुसैन ने उनसे कहा कि डाटा डिलीट करने में काफी समय लगेगा, जिसके बाद नारायण ने उन्हें एनवीआर से हार्ड डिस्क हटाने के लिए कहा और उसने दो 4 टीबी हार्ड डिस्क हटा दीं और उन्हें 23 जुलाई, 2022 को नारायण को सौंप दिया।
इसमें कहा गया है, जितेंद्र नारायण ने इस घटना को अपने गलत कामों से संबंधित सबूतों को नष्ट करने के इरादे से अंजाम दिया, जिसमें निर्दोष पीड़ित का शोषण (जिसकी पुष्टि एपीडब्ल्यूडी और वेबस्टेप टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड द्वारा प्राप्त दस्तावेजों से की गई थी) और गवाहों के बयान शामिल थे।
आरोपपत्र के मुताबिक, जांच में यह भी पता चला कि जब भी पीड़िता सहित कोई भी महिला गेस्ट पोर्ट ब्लेयर में उनके बंगले में आती थी, तो रसोइयों को रसोई में कैद कर दिया जाता था और उन्हें तब तक बाहर नहीं आने के लिए कहा जाता था जब तक कि उन्हें बताया नहीं जाता था, और अन्य कर्मचारियों और चौकीदारों को घर के पीछे बिजली के कमरे में जाने के लिए निर्देशित किया जाता था।
नारायण ने सिक्योरिटी गार्डों को यह भी निर्देश दिया था कि वे महिला के वाहनों की एंट्री रिकॉर्ड न करें, और गार्डों को कुछ मेहमानों के प्रवेश से पहले गेट खुले रखने के लिए कहा गया था। आरोपपत्र में एक गवाह की रिपोर्ट से पता चला है कि कर्मचारी उसके अत्यधिक आक्रामक और अपमानजनक व्यवहार के कारण उससे डरे हुए थे।
आरोप पत्र में यह भी कहा गया है कि मार्च 2022 में एक दिन पूर्व मुख्य सचिव नारायण ने आरएल ऋषि (निलंबित श्रम आयुक्त और मामले के आरोपियों में से एक) को वॉट्सऐप के जरिए वीओआईपी कॉल में एक लड़की को अपने बंगले में लाने का निर्देश दिया, और फिर ऋषि ने संदीप सिंह उर्फ रिंकू (पोर्ट ब्लेयर स्थित व्यवसायी, जो एक आरोपी भी है) से संपर्क किया और पीड़िता को नारायण के निर्देश को पूरा करने के लिए राजी किया।