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जान की बाजी लगाने में यूपी पुलिस देश में सबसे आगे, हर तीसरे दिन एक पुलिसकर्मी शहीद

Fri, 21 Oct 2016 05:30 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, आगरा
ब्यूरो/अमर उजाला, आगरा Updated Fri, 21 Oct 2016 05:30 AM IST
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Every third day a UP policeman lost their life
- फोटो : demo pic

यूपी पुलिस की छवि भले ही देश में सबसे तेज तर्रार न हो। लेकिन कर्तव्य निभाने के लिए जान की बाजी लगाने में प्रदेश के पुलिसकर्मी सबसे आगे हैं। इस कर्तव्यनिष्ठा की गवाही शहादत के ताजा आंकड़े दे रहे हैं। एक सितंबर 2015 से 31 अगस्त 2016 तक देश में कुल 479 पुलिसकर्मियों ने ड्यूटी के दौरान अपनी जान गंवाई है। इनमें यूपी से सबसे ज्यादा 116 हैं।

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इनमें एक  एडिशनल एसपी, चार इंस्पेक्टर और 16 सब इंस्पेक्टर और 57 कांस्टेबल शामिल हैं। आज पुलिस स्मृति दिवस पर इन सभी को श्रद्धासुमन अर्पित किए जाएंगे। खूंखार अपराधियों से लोहा लेते वक्त शहीद हुए पुलिसकर्मियों में आगरा जोन के बहादुर भी शामिल हैं। इनमें सबसे पहला नाम है मथुरा के एसपी सिटी रहे मुकुल द्विवेदी का। वह दो जून को मथुरा में ही आपरेशन जवाहर बाग में शहीद हुए।
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उन्हीं के साथ अंजाम की परवाह किए बगैर अपनी जान हथेली पर रखकर हथियारों से लैस हजारों कब्जाधारियों के बीच पहुंचे थे तत्कालीन एसओ फरह संतोष यादव। उन्होंने भी बहादुरी के साथ मुकाबला किया और कर्तव्य की वेदी पर अपने प्राणों की आहुति दे दी। इनके अतिरिक्त फैजाबाद में थाना इनायतनगर के मलेथू बुजुर्ग के घने जंगल में 22 जून को पशु तस्करों के साथ मुठभेड़ में कांस्टेबल सत्य प्रकाश सरोज को गोली लगी। उनकी उपचार के दौरान 25 जून को मृत्यु हो गई।

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24 राज्यों में 182 की जान गई

Every third day a UP policeman lost their life

गौतमबुद्धनगर के दादरी में 25 अप्रैल को अपराधियों के साथ मुठभेड़ में अदम्य साहस का परिचय देते हुए दरोगा अख्तर खान शहीद हो गए। उनकी गर्दन में गोली लगी थी। 22 जून को बदायूं के थाना बिनावर के घट बेहटी के जंगल में बदमाशों के साथ मुठभेड़ में पेट में गोली लगने से दरोगा सर्वेश कुमार ने वीरगति प्राप्त की। इससे पूर्व बदायूं में ही 17 फरवरी को थाना बिल्ली में तैनात कांस्टेबल भीम सेन और सहीम खान पर क्रुद्ध भीड़ ने हमला कर दिया। दोनों मुकाबला करते करते घायल हो गए। अस्पताल में उनकी मौत हो गई।

अकेले यूपी से 116 पुलिसकर्मियों ने जान गंवाई है। सूची में शामिल अन्य 24 राज्यों में कर्तव्य निभाने के दौरान 182 पुलिसकमियों की जान गई है। यूपी के बाद दूसरे नंबर पर जम्मू कश्मीर और पश्चिमी बंगाल संयुक्त रूप से हैं, यहां के 23-23 पुलिसकर्मी मारे गए हैं। कर्नाटक के 22, छत्तीसगढ़ के 19 , दिल्ली के 17 , उत्तराखंड के 10 , गुजरात के तीन हैं। हरियाणा, तेलंगाना, राजस्थान, पंजाब के एक -एक हैं। इनके अतिरिक्त अर्द्धसैनिक बलों के जवान हैं। 

आपरेशन जवाहर बाग में शहीद हुए पुलिसकर्मियों की बहादुरी को आज महकमा नमन करेगा।  लेकिन  एक सच यह भी है कि इन बहादुरों को छोड़कर भाग जाने पुलिसकर्मियों को आज तक बर्खास्त नहीं किया गया है। जांच चल रही है लेकिन नतीजे तक नहीं पहुंच पा रही है। इनमें सिपाही से लेकर अफसर तक शामिल हैं। सिपाही और दरोगा सस्पेंड किए गए लेकिन अफसरों तो किसी तरह का कोई एक्शन हुआ ही नहीं।

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