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EV Sales 2026: महंगे पेट्रोल-डीजल ने बदली दुनिया की रफ्तार, इलेक्ट्रिक कारों पर तेजी से बढ़ा भरोसा

Sat, 23 May 2026 05:14 AM IST
हिमांशु सिंह चंदेल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: हिमांशु सिंह चंदेल Updated Sat, 23 May 2026 05:14 AM IST
सार

महंगे पेट्रोल-डीजल, तेल संकट और जलवायु परिवर्तन की चिंता के बीच दुनिया भर में इलेक्ट्रिक कारों की मांग तेजी से बढ़ रही है। आईईए की रिपोर्ट के मुताबिक 2026 में ईवी बिक्री 2.3 करोड़ के पार जा सकती है। बैटरियों की घटती कीमतें और सरकारी प्रोत्साहन योजनाएं भी इसकी बड़ी वजह हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में दुनिया की सड़कों पर इलेक्ट्रिक वाहनों का दबदबा बढ़ सकता है। आइए, विस्तार रिपोर्ट को पढ़ते हैं...

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EV Sales 2026 Soaring Petrol Diesel Prices Have Change Worlds Pace Trust in Electric Cars Rises Rapidly
क्यों तेजी से बढ़ रही है इलेक्ट्रिक कारों की मांग? - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

दुनिया भर में बढ़ती तेल की कीमतों, पेट्रोल-डीजल के महंगे होने और जलवायु परिवर्तन के खतरे ने अब लोगों को तेजी से इलेक्ट्रिक वाहनों यानी ईवी की तरफ मोड़ दिया है। पहले जहां ईवी को सिर्फ भविष्य की तकनीक माना जाता था, वहीं अब यह आम लोगों की जरूरत बनती जा रही है। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी यानी आईईए की ताजा रिपोर्ट ‘ग्लोबल ईवी आउटलुक 2026’ के मुताबिक इस साल दुनिया भर में इलेक्ट्रिक कारों की बिक्री 2.3 करोड़ के पार जा सकती है। इसका मतलब है कि हर दस नई कारों में करीब तीन पूरी तरह इलेक्ट्रिक होंगी। बढ़ते ईंधन खर्च और पर्यावरण को बचाने की चिंता ने ईवी बाजार को नई रफ्तार दे दी है।
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क्यों तेजी से बढ़ रही है इलेक्ट्रिक कारों की मांग?
आईईए की रिपोर्ट के अनुसार इलेक्ट्रिक कारों की बढ़ती बिक्री के पीछे कई बड़े कारण हैं। सबसे बड़ा कारण पेट्रोल और डीजल की लगातार बढ़ती कीमतें हैं। आम लोग अब ऐसी गाड़ियों की तलाश में हैं जिनका खर्च कम हो और जो लंबे समय में सस्ती पड़ें। इसके अलावा बैटरियों की कीमतों में गिरावट आने से ईवी पहले के मुकाबले ज्यादा सस्ती हो गई हैं। कई देशों की सरकारें भी ईवी खरीदने पर टैक्स में छूट और सब्सिडी दे रही हैं। रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष 2025 इलेक्ट्रिक वाहन बाजार के लिए ऐतिहासिक साल साबित हुआ। पहली बार दुनिया भर में 2 करोड़ से ज्यादा इलेक्ट्रिक कारों की बिक्री हुई और कुल ऑटो बाजार में इनकी हिस्सेदारी करीब 25 फीसदी तक पहुंच गई। दुनिया के लगभग 100 देशों में ईवी बिक्री ने नया रिकॉर्ड बनाया।
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मुद्दा आंकड़ा / जानकारी
2026 में संभावित ईवी बिक्री 2.3 करोड़
2025 में वैश्विक ईवी हिस्सेदारी 25 फीसदी
हर 10 नई कारों में ईवी करीब 3
एशिया-प्रशांत क्षेत्र में वृद्धि 80 फीसदी
2035 तक संभावित ईवी संख्या 51 करोड़ से ज्यादा


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क्या भविष्य में सड़कों पर इलेक्ट्रिक गाड़ियों का दबदबा होगा?
रिपोर्ट में कहा गया है कि अगर मौजूदा रफ्तार बनी रही तो आने वाले वर्षों में दुनिया की सड़कों पर इलेक्ट्रिक गाड़ियों का दबदबा बढ़ जाएगा। अनुमान है कि 2035 तक दुनिया में इलेक्ट्रिक वाहनों की संख्या 8 करोड़ से बढ़कर 51 करोड़ के पार पहुंच सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन और प्रदूषण को कम करने के लिए भी ईवी अहम भूमिका निभाएंगी। इलेक्ट्रिक वाहन पेट्रोल-डीजल वाली गाड़ियों की तुलना में कम प्रदूषण फैलाते हैं। यही वजह है कि अब कई देश पेट्रोल और डीजल वाहनों को धीरे-धीरे कम करने की तैयारी कर रहे हैं। ऑटो कंपनियां भी लगातार नई ईवी लॉन्च कर रही हैं ताकि ग्राहकों को ज्यादा विकल्प मिल सकें।


शुरुआती गिरावट के बाद बाजार में फिर कैसे आई तेजी?
आईईए की रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2026 की पहली तिमाही में चीन और अमेरिका में कुछ नीतिगत बदलावों के कारण वैश्विक ईवी बिक्री में करीब 8 फीसदी की हल्की गिरावट दर्ज की गई थी। हालांकि इसके बाद बाकी देशों में तेज मांग ने बाजार को फिर संभाल लिया। चीन को छोड़कर पूरे एशिया-प्रशांत क्षेत्र में ईवी बिक्री 80 फीसदी तक बढ़ गई। इससे साफ है कि अब इलेक्ट्रिक वाहन केवल विकसित देशों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि विकासशील देशों में भी तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि चार्जिंग नेटवर्क बढ़ने और नई तकनीक आने से आने वाले समय में ईवी का इस्तेमाल और आसान हो जाएगा।

दक्षिण-पूर्व एशिया क्यों बन रहा नया ईवी हॉटस्पॉट?
आईईए ने दक्षिण-पूर्व एशिया को तेजी से उभरता हुआ ईवी बाजार बताया है। रिपोर्ट के मुताबिक वियतनाम और थाईलैंड जैसे देशों में पिछले साल इलेक्ट्रिक कारों की बिक्री दोगुनी से ज्यादा बढ़ी। इन देशों के कुल ऑटो बाजार में ईवी की हिस्सेदारी करीब 20 फीसदी तक पहुंच गई है। अनुमान है कि 2035 तक इस क्षेत्र में इलेक्ट्रिक कारों की हिस्सेदारी 60 फीसदी तक पहुंच सकती है। कम लागत वाली ईवी, सरकारी योजनाएं और बढ़ती पर्यावरण जागरूकता इस बदलाव की बड़ी वजह मानी जा रही है। अब दुनिया का ऑटो बाजार तेजी से इलेक्ट्रिक दौर की तरफ बढ़ रहा है।
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