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चिंताजनक: तापमान में 1.5 डिग्री वृद्धि के साथ 2024 होगा सबसे गर्म वर्ष, युवाओं पर गर्मी का ज्यादा असर

Tue, 10 Dec 2024 05:10 AM IST
दीपक कुमार शर्मा एजेंसी, नई दिल्ली
एजेंसी, नई दिल्ली Published by: दीपक कुमार शर्मा Updated Tue, 10 Dec 2024 05:10 AM IST
सार

यूरोप जलवायु परिवर्तन एजेंसी कॉपरनिकस ने अध्ययन में बताया कि नवंबर 2023 का अब तक का सबसे गर्म महीना नवंबर था। इस बार नवंबर में सतह पर हवा का औसत तापमान 14.10 डिग्री सेल्सियस रहा, जो 1991 से 2020 के औसत तापमान से 0.73 डिग्री सेल्सियस ज्यादा था। इसके अलावा इस साल गर्मी ने रिकॉर्ड तोड़ते हुए इतिहास का दूसरा सबसे गर्म महीना नवंबर दर्ज किया। 

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European Agency Claim 2024 hottest year till date Climate change temperature surging
जलवायु परिवर्तन - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

जलवायु परिवर्तन के कारण 2024 अब तक का सबसे गर्म वर्ष साबित होगा। इस वर्ष का औसत तापमान पूर्व-औद्योगिक काल के तापमान से 1.5 डिग्री सेल्सियस अधिक रहने का अनुमान है। इस वृद्धि को जलवायु परिवर्तन के प्रमुख संकेत के रूप में देखा जा रहा है, जो कि वैश्विक तापमान में बदलाव को दिखाते हैं।

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यूरोप जलवायु परिवर्तन एजेंसी कॉपरनिकस ने अध्ययन में बताया कि नवंबर 2023 का अब तक का सबसे गर्म महीना नवंबर था। इस बार नवंबर में सतह पर हवा का औसत तापमान 14.10 डिग्री सेल्सियस रहा, जो 1991 से 2020 के औसत तापमान से 0.73 डिग्री सेल्सियस ज्यादा था। इसके अलावा इस साल गर्मी ने रिकॉर्ड तोड़ते हुए इतिहास का दूसरा सबसे गर्म महीना नवंबर दर्ज किया। नवंबर 2024 में औसत वैश्विक तापमान पूर्व-औद्योगिक काल के स्तर से 1.62 डिग्री सेल्सियस ज्यादा रहा। साथ ही यह औसत वैश्विक तापमान 1.5 डिग्री सेल्सियस से अधिक रहा है।
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1901 के बाद नवंबर माह दूसरा सबसे गर्म
आईएमडी के अनुसार, देश में 1901 के बाद दूसरा सबसे गर्म 2024 का नवंबर महीना रहा, जब औसत अधिकतम तापमान 29.37 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो कि सामान्य से 0.62 डिग्री अधिक था। यह औसत वैश्विक तापमान से 0.72 डिग्री सेल्सियस अधिक था। वहीं, 2023 की तुलना में इस साल के तापमान में 0.14 डिग्री सेल्सियस की वृद्धि हुई है।
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इस साल 1.5 डिग्री सेल्सियस की सीमा पार करेगा तापमान
वैज्ञानिकों का दावा है कि 2023 का औसत तापमान 1.48 डिग्री सेल्सियस अधिक था और 2024 में यह बढ़कर 1.5 डिग्री सेल्सियस से अधिक हो सकता है। यह जलवायु परिवर्तन के बढ़ते प्रभाव और मानवीय गतिविधियों के कारण बढ़ते ग्लोबल वार्मिंग का स्पष्ट संकेत है।

खतरनाक हो रहे हालात
शोधकर्ता जेफ्री श्रेडर ने कहा, गर्मी और नमी के बढ़ते स्तर के कारण युवा लोग ज्यादा खतरे में आ रहे हैं। जलवायु परिवर्तन के कारण यह चलन भविष्य में और भी खतरनाक साबित हो सकता है। शोधकर्ताओं ने कहा कि ऐसा अनुमान है कि बढ़ते तापमान से यूरोप में सदी की अंत तक मौतों की संख्या तीन गुना बढ़ सकती है।


युवाओं पर गर्मी का ज्यादा असर
गर्मी का असर बुजुर्गों की तुलना में युवाओं पर अधिक होता है। 1998 से 2019 के बीच मैक्सिको में किए गए अध्ययन से पता चला है कि गर्मी से होने वाली मौतों में युवाओं की संख्या बुजुर्गों की तुलना में नौ गुना अधिक थी। हालांकि, अब तक के अध्ययन में यही माना जा रहा था कि जलवायु परिवर्तन के कारण बढ़ती जा रही ताप लहर का सबसे ज्यादा असर बुजुर्गों और छोटे बच्चों पर होता है। साइंस अडवांसेज जर्नल की रिपोर्ट के मुताबिक, शोधकर्ताओं ने इसके लिए दो संभावनाएं बताई हैं। पहली, गर्मी का असर खुले में काम करने वालों पर ज्यादा हो सकता है और ऐसा करने वालों में युवा ज्यादा होते हैं। दूसरा, युवा अपने शारीरिक सीमाओं को नहीं समझते और ताप के दौरान बाहर जोखिम भरे काम करते हैं।

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