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Cash For Query: महुआ की सांसदी रद्द, आचार समिति की सिफारिश मंजूर; TMC नेता बोलीं- यह BJP के अंत की शुरुआत
Fri, 08 Dec 2023 04:10 PM IST
गुलाम अहमद
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: गुलाम अहमद
Updated Fri, 08 Dec 2023 04:10 PM IST
सार
चर्चा के दौरान तृणमूल कांग्रेस ने आसन से कई बार यह आग्रह किया कि महुआ मोइत्रा को सदन में उनका पक्ष रखने का मौका मिले। हालांकि, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने पहले इसकी इजाजत नहीं दी। उन्होंने इसके लिए संसदीय परिपाटी का हवाला दिया।
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Mahua Moitra
- फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा को रिश्वत लेकर सवाल पूछने के मामले में शुक्रवार को लोकसभा की सदस्यता से निष्कासित कर दिया गया। संसदीय कार्य मंत्री प्रह्लाद जोशी ने निष्कासन का प्रस्ताव पेश किया। इसे सदन ने ध्वनिमत से पारित कर दिया। इससे पहले सदन में लोकसभा की आचार समिति की रिपोर्ट पर चर्चा हुई। रिपोर्ट में महुआ को निष्कासित करने की सिफारिश की गई थी। फैसले के बाद महुआ ने कहा कि एथिक्स कमेटी के पास निष्कासित करने का कोई अधिकार नहीं है। यह आपके अंत की शुरुआत है।
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चर्चा के दौरान तृणमूल कांग्रेस ने आसन से कई बार यह आग्रह किया कि महुआ मोइत्रा को सदन में उनका पक्ष रखने का मौका मिले। हालांकि, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने पहले इसकी इजाजत नहीं दी। उन्होंने इसके लिए संसदीय परिपाटी का हवाला दिया।
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नौ नवंबर को रिपोर्ट की गई थी
इससे पहले भाजपा सांसद विनोद कुमार सोनकर की अध्यक्षता वाली आचार समिति ने गत नौ नवंबर को अपनी एक बैठक में महुआ मोइत्रा को लोकसभा से निष्कासित करने की सिफारिश वाली रिपोर्ट को स्वीकार किया था।
समिति के छह सदस्यों ने रिपोर्ट के पक्ष में मतदान किया था
समिति के छह सदस्यों ने रिपोर्ट के पक्ष में मतदान किया था। इनमें कांग्रेस से निलंबित सांसद परणीत कौर भी शामिल थीं। समिति के चार विपक्षी सदस्यों ने रिपोर्ट पर असहमति जताई थी। विपक्षी सदस्यों ने रिपोर्ट को फिक्स्ड मैच करार दिया था। उन्होंने कहा था कि भाजपा सांसद निशिकांत दुबे शिकायत में कोई भी दम नहीं है।
महुआ मोइत्रा ने कही यह बात
लोकसभा सदस्य के रूप में अपने निष्कासन पर महुआ मोइत्रा ने कहा कि अगर इस मोदी सरकार ने सोचा कि मुझे चुप कराकर वे अदाणी मुद्दे को खत्म कर देंगे, मैं आपको यह बता दूं कि इस कंगारू कोर्ट ने पूरे भारत को केवल यह दिखाया है कि आपने जल्दबाजी और उचित प्रक्रिया का दुरुपयोग किया है। यह दर्शाता है कि अदाणी आपके लिए कितने महत्वपूर्ण है और आप एक महिला सांसद को रोकने के लिए उसे किस हद तक परेशान करेंगे। उन्होंने आगे कहा कि एथिक्स कमेटी के पास निष्कासित करने का कोई अधिकार नहीं है। यह आपके अंत की शुरुआत है।
उन्होंने कहा कि लोकसभा की आचार समिति, इसकी रिपोर्ट ने सभी नियमों को तोड़ा है। यह हमें झुकने के लिए मजबूर करने का एक हथियार है। मुझे उस आचार संहिता के उल्लंघन का दोषी पाया गया है, जो अस्तित्व में ही नहीं है। आचार समिति मुझे उस बात के लिए दंडित कर रही है, जो लोकसभा में सामान्य, स्वीकृत है तथा जिसे प्रोत्साहित किया गया है। आचार समिति के निष्कर्ष पूरी तरह से दो व्यक्तियों की लिखित गवाही पर आधारित हैं, जिनके कथन असल में एक-दूसरे के विरोधाभासी हैं।
500 पेज की रिपोर्ट कई अहम सिफारिशें
समिति ने 500 पेज की रिपोर्ट बनाई थी। इसमें संसद की गरिमा को बचाने व राष्ट्रीय सुरक्षा को महत्व देने के लिए कई अहम सिफारिश की गई थीं। महुआ पर रिश्वत ले कर अदाणी समूह के खिलाफ कारोबारी हीरानंदानी को लाभ पहुंचाने के लिए सवाल पूछने के आरोप हैं। खुद महुआ ने स्वीकार किया था कि उन्होंने संसद में सवाल पूछने के पोर्टल से जुड़ी अपनी आईडी-पासवर्ड साझा किए थे। हीरानंदानी ने महुआ को रिश्वत देने की बात स्वीकारी थी।