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मुद्दा: एथेनॉल मिश्रण उपयोगी है, पर्याप्त नहीं

Mon, 20 Jul 2026 07:27 AM IST
Atul Agarwal अतुल अग्रवाल
Updated Mon, 20 Jul 2026 07:27 AM IST
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सार
एथेनॉल मिश्रण जैसी पहलें उपयोगी हो सकती हैं, लेकिन ऊर्जा सुरक्षा के मद्देनजर स्थायी समाधान के लिए अक्षय ऊर्जा की ओर देखना होगा।
 
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ethanol blending not enough renewable energy key to india energy independence
सौर ऊर्जा से किसानों को मिलेगी बिजली - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

पश्चिम एशिया में जब भी तनाव बढ़ता है, भारत में सबसे पहले पेट्रोल-डीजल की कीमतों को लेकर चिंता शुरू हो जाती है। दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा कच्चे तेल का उपभोक्ता भारत अपनी जरूरत का 90 प्रतिशत से अधिक पेट्रोलियम आयात करता है। घरेलू उत्पादन वर्षों से लगभग ठहरा हुआ है, जबकि तेजी से बढ़ते शहरीकरण, आय में वृद्धि और परिवहन की बढ़ती मांग के कारण खपत लगातार बढ़ रही है। नतीजतन देश का तेल आयात बिल हर वर्ष 100 अरब डॉलर से अधिक पहुंच जाता है।



पिछले कई दशकों में भारत ने इस निर्भरता को कम करने के लिए तेल आपूर्ति के स्रोतों में विविधता लाने, रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार बनाने व पेट्रोल में एथेनॉल मिश्रण जैसी कई पहलें की हैं। ये प्रयास उपयोगी अवश्य हैं, लेकिन पर्याप्त नहीं। इनसे जोखिम कुछ हद तक कम होता है, परंतु मूल समस्या जस की तस रहती है, क्योंकि पूरा ढांचा अब भी तरल ईंधनों पर आधारित है। वास्तविक परिवर्तन तेल में नहीं, बल्कि बिजली के तारों से बहने वाली ऊर्जा में है। विशेष रूप से यदि बिजली का उत्पादन सौर, पवन, जल और अन्य घरेलू अक्षय स्रोतों से हो, तो यही भारत को तेल पर निर्भरता कम करने, ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करने, प्रदूषण घटाने और जलवायु लक्ष्यों को हासिल करने का सबसे प्रभावी मार्ग प्रदान कर सकती है। इसका तर्क सीधा है।


भारत में लगभग पूरा पेट्रोल और करीब 70 प्रतिशत डीजल वाहनों के ईंधन के रूप में खपता है। ऐसे में आंतरिक दहन इंजन (आईसीई) वाले प्रत्येक वाहन की जगह यदि एक इलेक्ट्रिक वाहन लेता है, तो देश के कच्चे तेल के आयात की आवश्यकता सीधे कम होती है। तेल के विपरीत, बिजली का उत्पादन अनेक घरेलू स्रोतों- सौर, पवन, जल, परमाणु, बायोमास और कोयले से किया जा सकता है। पेट्रोल की जगह बिजली से तय किया गया हर किलोमीटर केवल कार्बन उत्सर्जन कम नहीं करता, बल्कि आयातित ऊर्जा पर भारत की रणनीतिक निर्भरता भी घटाता है। इसके आर्थिक लाभ भी अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।

भारत दुनिया के सबसे तेजी से बढ़ते अक्षय ऊर्जा बाजारों में शामिल है और सौर ऊर्जा की लागत विश्व में सबसे कम स्तरों पर पहुंच चुकी है। अक्षय ऊर्जा से उत्पादित हर अतिरिक्त यूनिट बिजली आयातित तेल का विकल्प बनती है और देश की संपत्ति विदेश भेजने के बजाय भारत के भीतर ही निवेश और रोजगार का आधार तैयार करती है। अक्षय ऊर्जा क्षमता अभूतपूर्व गति से बढ़ी है और बैटरी भंडारण, पंप्ड हाइड्रो तथा आधुनिक ग्रिड व्यवस्था में बड़े निवेश हो रहे हैं। आज की ऊर्जा संरचना में भी इलेक्ट्रिक वाहन पारंपरिक वाहनों की तुलना में अधिक ऊर्जा दक्ष हैं। इलेक्ट्रिक मोटर लगभग 90 प्रतिशत ऊर्जा को गति में बदल देती है, जबकि पेट्रोल और डीजल इंजन अपनी अधिकांश ऊर्जा गर्मी के रूप में नष्ट कर देते हैं। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि जैसे-जैसे बिजली उत्पादन और अधिक स्वच्छ होगा, वैसे-वैसे सभी इलेक्ट्रिक वाहन स्वतः ही और अधिक पर्यावरण-अनुकूल बन जाएंगे। पेट्रोल या डीजल वाहन को यह लाभ कभी नहीं मिल सकता।

बिजली में भारत की ऊर्जा अर्थव्यवस्था को पूरी तरह बदलने की क्षमता है। राजस्थान का एक सौर संयंत्र, तमिलनाडु का पवन ऊर्जा पार्क या पूर्वोत्तर का जलविद्युत स्टेशन भारत की ऊर्जा आत्मनिर्भरता को मजबूत करता है। इसलिए यह बदलाव केवल तकनीकी नहीं, बल्कि रणनीतिक भी है; स्वदेशी ऊर्जा पर निर्भरता से घरेलू ऊर्जा आधारित आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ने का बदलाव। यदि परिवहन भारत की तेल निर्भरता का सबसे बड़ा कारण है, तो ऊर्जा परिवर्तन का केंद्र भी वही होना चाहिए। आज इलेक्ट्रिक स्कूटर लाखों शहरी उपभोक्ताओं के लिए आर्थिक रूप से लाभकारी विकल्प बन चुके हैं। बैटरी चार्ज करने की लागत पेट्रोल भरवाने की तुलना में काफी कम है व रखरखाव का खर्च भी बहुत घट जाता है, क्योंकि इलेक्ट्रिक मोटर में लगने वाले पुर्जे कम होते हैं। सार्वजनिक परिवहन वाहनों, माल ढुलाई के ट्रकों, सिंचाई के पंपों को बिजली, बैटरी और सौर ऊर्जा से संचालित करने पर तेल आयात पर से निर्भरता कम की जा सकती है। इससे देश में नई औद्योगिक पारिस्थितिकी का भी निर्माण होगा।

 ‘विकसित भारत 2047’ और ‘नेट जीरो 2070’ के लक्ष्यों को हासिल करने के लिए भारत को स्वच्छ, सुरक्षित और आत्मनिर्भर ऊर्जा व्यवस्था की आवश्यकता है। परिवहन और उपकरणों का व्यापक विद्युतीकरण न केवल तेल आयात घटाएगा, बल्कि लोगों को सस्ती यात्रा, स्वच्छ हवा और वैश्विक तेल संकटों से भी राहत देगा।

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