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पर्यावरण की चिंता : ईयू के 27 देशों में 2040 से इलेक्ट्रिक कारें ही चलेंगी

Thu, 15 Jul 2021 07:52 AM IST
Kuldeep Singh अमर उजाला रिसर्च टीम, नई दिल्ली
अमर उजाला रिसर्च टीम, नई दिल्ली Published by: Kuldeep Singh Updated Thu, 15 Jul 2021 07:52 AM IST
सार

  • 2030 तक कार्बन उत्सर्जन कम करने का लक्ष्य 37 से बढ़ाकर 65 प्रतिशत किया
  • अगले 20 सालों में पेट्रोल-डीजल कारों की बिक्री हो जाएगी बंद 
  • 2035 से कारों पर उत्सर्जन मानक कड़े किए जाएंगे

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Environmental concern: European countries will stop petrol-diesel cars in 20 years
Electric Car - फोटो : Unsplash

विस्तार

यूरोपीय संघ के तहत आने वाले 27 देशों ने बुधवार को प्रस्ताव रखा कि अगले 20 साल में पेट्रोल-डीजल कारों (कम्बश्चन इंजन आधारित) की बिक्री बंद कर देंगे। इनकी जगह इलेक्ट्रिक मोटर से चलने वाली कारें लेंगी। यह प्रस्ताव जलवायु परिवर्तन रोकने की दिशा में बनाया गया है, और संसद द्वारा पारित करने पर इसे लागू कर दिया जाएगा।

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ईयू के 27 देशों में 2040 से इलेक्ट्रिक कारें ही चलेंगी, 35 से कड़े कर दिए जाएंगे उत्सर्जन मानक
यूरोपीय संघ के जलवायु परिवर्तन मामलों पर बने आयोग के प्रस्ताव के मुताबिक, 2035 से ही कारों पर उत्सर्जन मानक इतने कड़े कर दिए जाएंगे, कि इनका इस्तेमाल आर्थिक लिहाज से बेहद मुश्किल हो जाएगा। वहीं 2030 तक कार्बन उत्सर्जन को मौजूदा स्तर से 37 प्रतिशत कम करने का जो लक्ष्य था, उसे भी बढ़ाकर 65 प्रतिशत किया जा रहा है।
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कंपनियों ने पहले से की तैयारी
यूरोपीय संघ के इस कदम का अनुमान पहले से लगाया जाने लगा था। यहां की कई कार कंपनियों ने पहले ही बदलाव पर काम करना शुरू कर दिया। फॉक्सवैगन का दावा है कि वे यूरोप में 2035 के बाद कम्बश्चन इंजन की कोई कार नहीं बेचेंगे।
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बीएमडब्ल्यू और रैनो ने प्लग इन हाइब्रिड कार बनाना शुरू किया है, जिनमें कम्बश्चन इंजन और इलेक्ट्रिक मोटर दोनों हैं। हालांकि आने वाले समय में इसमें से कम्बश्चन इंजन हटाने की बात कही जा रही है। कई कंपनी इलेक्ट्रिक कारों के उत्पादन के लिए भारी निवेश किया है।

3.57 लाख करोड़ निवेश
विश्व की चौथी बड़ी कार निर्माता कंपनी स्टेलांटिस ने 3.57 लाख करोड़ रुपये साल 2025 तक निवेश करके अपनी अधिकतर कार बिजली की मोटर से चलने वाली तकनीक पर बनाने का निर्णय लिया है। बहुत से नए मॉडल बाजार में लगातार उतारे जा रहे हैं। 

अभी बिक रही 9 में से 1 कार इलेक्ट्रॉनिक 
महामारी के दौरान यूरोप में कारों की बिक्री में तेज गिरावट आई। लेकिन इलेक्ट्रॉनिक कारों की बिक्री बढ़ी। मौजूदा आंकड़ों के अनुसार यहां बिक रही हर नो में से एक कार इलेक्ट्रॉनिक है। हालांकि पब्लिक चार्जिंग स्टेशनों की कमी से फिलहाल लोग इन्हें खरीदने में संशय में हैं।


संशय दूर करने के लिए कई सरकारों ने निवेश की घोषणा की है। कार कंपनियों भी चार्जिंग स्टेशनों के लिए सरकार से ही निवेश करवाने पर तुली है। लेकिन विशेषज्ञ मानते हैं कि निजी क्षेत्र को स्टेशनों पर भी काम करना होगा। लाखों इलेक्ट्रिक कारों के लिए हजारों जगह बनाना केवल सरकार के लिए संभव नहीं है।

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