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Joshimath Crisis: जोशीमठ भू-धंसाव का असर! बॉर्डर पर सड़कों के निर्माण के लिए पर्यावरण विभाग की मंजूरी जरूरी

Tue, 14 Feb 2023 01:08 PM IST
नितिन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: नितिन गौतम Updated Tue, 14 Feb 2023 01:08 PM IST
सार

पर्यावरण मंत्रालय ने निर्देशों  में कहा है कि प्रोजेक्ट के खतरे और इसके पर्यावरण पर पड़ने वाले असर की किसी सक्षम अथॉरिटी से समीक्षा के बाद ही प्रोजेक्ट की शुरुआत की जाए। 

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environment safeguard compulsary for all raods project 100 km of border loc joshimath crisis
होटलों की तीन-तीन मंजिल तक ध्वस्त - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

उत्तराखंड के जोशीमठ में हुए भू-धंसाव के बाद केंद्र सरकार ने अहम निर्देश जारी किए हैं। दरअसल केंद्र सरकार ने अंतरराष्ट्रीय सीमा और लाइन ऑफ कंट्रोल के 100 किलोमीटर के दायरे में सभी सड़कों-हाईवे के निर्माण के लिए संबंधित विभागों से पर्यावरणीय मंजूरी लेना अनिवार्य कर दिया है। सरकार ने इसके लिए स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसिजर (एसओपी) जारी किया है। केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय ने बीती छह फरवरी को एसओपी जारी करते हुए निर्देश दिया कि सड़कों-हाईवे के निर्माण के लिए सुरंग खोदने से पहले आपदा प्रबंधन की योजना, संवेदनशील पर्यावरण संबंधित अध्ययन और खतरे की समीक्षा करना जरूरी कर दिया गया है। खास बात ये है कि नए निर्देश सरकार के पुराने निर्देशों के सात माह बाद आए हैं, जिसमें सरकार ने अंतरराष्ट्रीय सीमा और एलओसी के 100 किलोमीटर के दायरे में पर्यावरणीय मंजूरी लेने की छूट दे दी थी। 

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'भू-धंसाव रोकने के होने चाहिए इंतजाम'
पर्यावरण मंत्रालय ने निर्देशों  में कहा है कि प्रोजेक्ट के खतरे और इसके पर्यावरण पर पड़ने वाले असर की किसी सक्षम अथॉरिटी से समीक्षा के बाद ही प्रोजेक्ट की शुरुआत की जाए। निर्देशों में कहा गया है कि अगर प्रोजेक्ट किसी पहाड़ी इलाके में चल रहा है तो उससे पहले भू-धंसाव, स्लोप के स्थायित्व संवेदनशीलता आदि का अध्ययन करना जरूरी है। भूकंप संबंधित अध्ययन भी किसी प्रतिस्पर्धी संस्थान द्वारा कराना अनिवार्य कर दिया गया है। साथ ही भू-धंसाव मैनेजमेंट की योजना बनाकर और सारे जरूरी कदम उठाने के बाद ही निर्माण की मंजूरी दी जाएगी। 
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सुरंग खोदने से पहले इन बातों का रखना होगा ध्यान
सरकार ने निर्देशों में कहा है कि कटाव या तटबंध की स्थिति में मृदा क्षरण, भू-धंसाव और पहाड़ टूटने की घटनाओं की समीक्षा करना जरूरी होगा। साथ ही अगर प्रस्तावित रूट पर सुरंग बनाई जानी है तो सुरंग खोदने से भूगर्भीय स्थिति पर सुरंग खोदने के असर का अध्ययन करना अनिवार्य होगा, जिससे जान-माल के नुकसान को रोका जा सके। प्रोजेक्ट के 10 किलोमीटर के क्षेत्रफल में पानी संग्रह और ड्रेनेज पैटर्न की भी समीक्षा करना अनिवार्य होगा। नदी-नालों के रास्तों में बदलाव करने की मनाही होगी। सभी छोटे-बड़े पुल ड्रेनेज सिस्टम को प्रभावित नहीं करने चाहिए। साथ ही सड़कों के दोनों तरफ वर्षा जल संचय के भी इंतजाम करने के निर्देश दिए गए हैं। 
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जोशीमठ घटना से सरकार ने लिया सबक
पर्यावरण विभाग ने निर्देशों में कहा है कि अगर सड़क किसी बाढ़ प्रभावित इलाके से गुजर रही है तो उसके लिए भी विस्तृत समीक्षा रिपोर्ट तैयार करानी होगी। साथ ही एयरपोर्ट्स और शहरी इलाकों में ट्रैफिक प्लान की भी समीक्षा करने के निर्देश दिए गए हैं। बता दें कि बीते दिनों चमोली जिले के जोशीमठ में भू-धंसाव हुआ था, जिसके चलते जोशीमठ के बड़े हिस्से में घरों और व्यापारिक प्रतिष्ठानों में बड़ी-बड़ी दरारें आ गई हैं। जिसके चलते बड़ी संख्या में लोगों को विस्थापित होना पड़ा है। इसरो की सैटेलाइट इमेजों से पता चला है कि भू धंसाव के चलते जोशीमठ शहर 5.4 सेंटीमीटर तक खिसक गया है।  

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