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Pollution: असुरक्षा का माहौल बच्चों में खेलने की क्षमता को कर सकता है सीमित, प्रदूषित वातावरण विकास में बाधा
Tue, 02 Jan 2024 05:39 AM IST
जलज मिश्रा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: जलज मिश्रा
Updated Tue, 02 Jan 2024 05:39 AM IST
सार
शोधकर्ताओं के अनुसार शहरी जीवन की तेज तर्रार प्रकृति अक्सर माता-पिता और देखभाल करने वालों को बच्चों की परवरिश के लिए पर्याप्त समय उपलब्ध नहीं करा पाती है। इसकी वजह से समग्र रूप से स्वस्थ शिशु विकास के लिए महत्वपूर्ण चीजों का अभाव उनके भविष्य के लिए नुकसानदायक है।
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Air Pollution
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
वायु और ध्वनि प्रदूषण, भीड़भाड़ तथा सीमित हरियाली वाली जगह जीवन के शुरुआती दौर में बच्चों के सामग्र विकास पर विपरीत असर डाल रही हैं। ऑस्ट्रेलिया में सिडनी के यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी की अगुवाई में किए अध्ययन में 41 देशों के 235 शोधों का विश्लेषण किया गया है, जिसमें बचपन में विकास को प्रभावित करने वाले पर्यावरणीय खतरों के प्रमुख पहलुओं पर प्रकाश डाला गया है।
शोधकर्ताओं ने पब्लिक हेल्थ रिसर्च एंड प्रैक्टिस जर्नल में प्रकाशित अध्ययन में कहा कि बच्चों के विकास के लिए महत्वपूर्ण अन्य खतरों में वातावरण, रासायनिक और धातु संबंधित खतरे, पड़ोस में निर्मित माहौल, सामुदायिक समर्थन, आवास और रहने का वातावरण शामिल है। शोध के अनुसार जीवन के पहले 2000 दिन या शून्य से पांच वर्ष के बाद के जीवन को शारीरिक, ज्ञान संबंधी, सामाजिक और भावनात्मक स्वास्थ्य पर असर डालने वाली एक महत्वपूर्ण अवधि के रूप में पहचाना जाता है। अध्ययन में शहरी जीवन से संबंधित जिन चिंताओं की सबसे अधिक जांच की गई उनमें से एक वायु प्रदूषण था।
तेज तर्रार शहरी जीवन भी विकास में बाधक
शोधकर्ताओं के अनुसार शहरी जीवन की तेज तर्रार प्रकृति अक्सर माता-पिता और देखभाल करने वालों को बच्चों की परवरिश के लिए पर्याप्त समय उपलब्ध नहीं करा पाती है। इसकी वजह से समग्र रूप से स्वस्थ शिशु विकास के लिए महत्वपूर्ण चीजों का अभाव उनके भविष्य के लिए नुकसानदायक है।
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सुरक्षित स्थानों की कमी सामाजिक विकास में बाधक
सुरक्षा संबंधी चिंताएं, बच्चों की खोज करने और स्वतंत्र रूप से खेलने की क्षमता को सीमित कर सकती हैं, जिससे उनकी स्वतंत्रता और सामाजिक विकास की भावना प्रभावित होती है। शहरीकरण डिजिटल निर्भरता को बढ़ाता है, जिससे अत्यधिक स्क्रीन समय और आमने-सामने की बातचीत कम हो जाती है। यह स्थिति बच्चों के संचार कौशल और भावनात्मक बुद्धिमत्ता को प्रभावित करती है।
स्वास्थ्य व कल्याण की दिशा में बच्चों के अनुकूल वातावरण की जरूरत
प्रमुख शोधकर्ता एरिका मैकइंटायर के अनुसार शहरी योजनाकारों और नीति निर्माताओं को उस भूमिका को पहचानने की जरूरत है जो रोजमर्रा के शहरी वातावरण स्वास्थ्य और कल्याण की दिशा में बच्चों के अनुकूल हो। इसके तहत अधिक हरियाली वाली जगहों की वकालत करना, शोर और प्रदूषण कम करने के उपाय शामिल हैं। इसके अलावा बच्चों के पैदल चलने योग्य जगहों का विकास करना जो शारीरिक गतिविधि को प्रोत्साहित करती हैं, ऐसे कुछ उपाय हैं जो बच्चों के स्वस्थ विकास के लिए अनुकूल वातावरण बनाने में मदद करते हैं। पेरेंटिंग कक्षाएं, प्लेग्रुप और सामुदायिक केंद्र प्रदान करने वाले कार्यक्रम पेरेंटिंग की चुनौतियों से निपटने में बढ़ावा दे सकते हैं।
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शोधकर्ताओं ने पब्लिक हेल्थ रिसर्च एंड प्रैक्टिस जर्नल में प्रकाशित अध्ययन में कहा कि बच्चों के विकास के लिए महत्वपूर्ण अन्य खतरों में वातावरण, रासायनिक और धातु संबंधित खतरे, पड़ोस में निर्मित माहौल, सामुदायिक समर्थन, आवास और रहने का वातावरण शामिल है। शोध के अनुसार जीवन के पहले 2000 दिन या शून्य से पांच वर्ष के बाद के जीवन को शारीरिक, ज्ञान संबंधी, सामाजिक और भावनात्मक स्वास्थ्य पर असर डालने वाली एक महत्वपूर्ण अवधि के रूप में पहचाना जाता है। अध्ययन में शहरी जीवन से संबंधित जिन चिंताओं की सबसे अधिक जांच की गई उनमें से एक वायु प्रदूषण था।
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तेज तर्रार शहरी जीवन भी विकास में बाधक
शोधकर्ताओं के अनुसार शहरी जीवन की तेज तर्रार प्रकृति अक्सर माता-पिता और देखभाल करने वालों को बच्चों की परवरिश के लिए पर्याप्त समय उपलब्ध नहीं करा पाती है। इसकी वजह से समग्र रूप से स्वस्थ शिशु विकास के लिए महत्वपूर्ण चीजों का अभाव उनके भविष्य के लिए नुकसानदायक है।
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सुरक्षित स्थानों की कमी सामाजिक विकास में बाधक
सुरक्षा संबंधी चिंताएं, बच्चों की खोज करने और स्वतंत्र रूप से खेलने की क्षमता को सीमित कर सकती हैं, जिससे उनकी स्वतंत्रता और सामाजिक विकास की भावना प्रभावित होती है। शहरीकरण डिजिटल निर्भरता को बढ़ाता है, जिससे अत्यधिक स्क्रीन समय और आमने-सामने की बातचीत कम हो जाती है। यह स्थिति बच्चों के संचार कौशल और भावनात्मक बुद्धिमत्ता को प्रभावित करती है।
स्वास्थ्य व कल्याण की दिशा में बच्चों के अनुकूल वातावरण की जरूरत
प्रमुख शोधकर्ता एरिका मैकइंटायर के अनुसार शहरी योजनाकारों और नीति निर्माताओं को उस भूमिका को पहचानने की जरूरत है जो रोजमर्रा के शहरी वातावरण स्वास्थ्य और कल्याण की दिशा में बच्चों के अनुकूल हो। इसके तहत अधिक हरियाली वाली जगहों की वकालत करना, शोर और प्रदूषण कम करने के उपाय शामिल हैं। इसके अलावा बच्चों के पैदल चलने योग्य जगहों का विकास करना जो शारीरिक गतिविधि को प्रोत्साहित करती हैं, ऐसे कुछ उपाय हैं जो बच्चों के स्वस्थ विकास के लिए अनुकूल वातावरण बनाने में मदद करते हैं। पेरेंटिंग कक्षाएं, प्लेग्रुप और सामुदायिक केंद्र प्रदान करने वाले कार्यक्रम पेरेंटिंग की चुनौतियों से निपटने में बढ़ावा दे सकते हैं।