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पर्यावरण मंत्रालय ने प्लास्टिक पेन के दोबारा इस्तेमाल के तीन मॉडल सुझाए, बाई बैक की नीति पर विचार
Mon, 14 Sep 2020 03:04 AM IST
Jeet Kumar
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Jeet Kumar
Updated Mon, 14 Sep 2020 03:04 AM IST
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- फोटो : अमर उजाला
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वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल को बताया है कि उसने पेन सहित प्लास्टिक कचरे के निपटान के लिए उत्पादकों, आयातकों और ब्रांड स्वामियों को तीन उपाय सुझाए हैं।
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एनजीटी अवनी मिश्रा की उस याचिका पर सुनवाई कर रहा है, जिसमें बिना जांचे प्लास्टिक पेन के इस्तेमाल से पर्यावरण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की शिकायत की गई है।
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याचिका में कहा गया है कि बाजार में हर साल 160 करोड़ से 240 करोड़ नग उतारा जाता है और उसके रिसाइकिल नहीं होने से 91 फीसदी प्लास्टिक कचरा पैदा होता है। उसमें कहा गया है कि विस्तारित निर्माता जिम्मेदारी (ईपीआर) को उचित तरीके से लागू नहीं किया जाता है।
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उन्होंने सुझाव दिया कि वापस खरीद (बाई बैक) की नीति को लागू किया जाना चाहिए। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने भी एनजीटी को बताया कि पर्यावरण मंत्रालय के तहत ईपीआर के लिए राष्ट्रीय रूपरेखा पर विचार किया जा रहा है।
ईपीआर का अर्थ है कि जब उपभोक्ताओं के लिए उत्पाद उपयोगी न रहे तो उत्पादकों को उसके निपटान की जिम्मेदारी उठानी होगी। पीठ ने मंत्रालय को अगली सुनवाई 14 अक्तूबर तक कार्रवाई रिपोर्ट पेश करने को कहा है।