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पर्यावरण मंत्रालय ने चंबल नदी पर मध्य प्रदेश सरकार के प्रोजेक्ट पर लगाई रोक
Tue, 28 Jan 2020 04:40 AM IST
संजीव कुमार झा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: संजीव कुमार झा
Updated Tue, 28 Jan 2020 04:40 AM IST
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चंबल नदी पर मध्य प्रदेश सरकार के प्रोजेक्ट पर पर्यावरण मंत्रालय ने रोक लगा दी है। प्रदेश सरकार चंबल नदी के मीठे पानी को पेयजल के लिए इस्तेमाल करने को लेकर पाइप लाइन बिछाने और प्रवाह को रोकने के लिए कुएं बनाने का प्रस्ताव दिया था। रोक के पीछे मंत्रालय का तर्क है कि क्योंकि इस इलाके में नदी में मगरमच्छ, डॉल्फिन और कछुए जैसे संरक्षित प्रजाति के जीवों का बसेरा है, इसलिए उनके संरक्षण के लिए नदी का अविरल प्रवाह बना रहना जरूरी है।
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इस प्रस्ताव को हालांकि राज्य वनजीव बोर्ड ने मंजूरी दे दी थी, लेकिन नदी के इकोलॉजिकल सिस्टम और वन्य जीव के लिए खतरा होने के कारण इसे राज्य वाइल्ड लाइफ वार्डन ने पहले ही रोक लगाने के लिए कहा था। पिछले दिनों पर्यावरण मंत्रालय में हुई नेशनल बोर्ड ऑफ वाइल्ड लाइफ की स्थायी समिति में इस पर चर्चा की गई।
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इसमें पाया गया कि चंबल से 25 किलोमीटर दूर श्योपुर की पेयजल जरूरतों को पूरा करने के लिए इस योजना का प्रस्ताव किया गया है। राज्य सरकार ने अपने प्रस्ताव में इसका खुलासा नहीं किया था कि जल संरक्षण के लिए चुना गया स्थान घड़ियाल, डॉल्फिन आदि के निवास के बिलकुल करीब है।
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बोर्ड ने कहा कि घड़ियालों के लिए नदी की अविरलता का न्यूनतम पैमाना होना चाहिए। इसी तरह डॉल्फिन भी गहरे मीठे पानी में रहती है। देहरादून की एजेंसी ने चंबल नदी की धारा की अविरलता को जांचा तो पाया कि यह जीवों की जरूरतों के मुताबिक जरूरी पैमाने से खासी धीमी गति से बह रही है। ऐसे में इसमें पाइप डालने व कुएं बनाने से सैकड़ों संरक्षित प्रजातियों का अस्तित्व ही खतरे में पड़ जाएगा।