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अगस्ता घोटाला: प्रवर्तन निदेशालय ने सात महीने तक लटकाए रखी जांच

Thu, 05 May 2016 11:58 AM IST
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, नई दिल्ली
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Thu, 05 May 2016 11:58 AM IST
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enforcement directorate hold the agustawestland scam enquiry
- फोटो : PTI

अगस्ता वेस्टेलैंड मामले में लेनदेन की जांच कर रहे प्रवर्तन निदेशालय ने एम्मार एमजीएफ के बॉस श्रवण गुप्ता से पूछताछ के बाद अब पूर्व वायुसेना प्रमुख एस.पी.त्यागी से फिर पूछताछ करेगी। अगस्ता मामले की शुरुआत में निदेशालय प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉंड्रिंग एक्ट (पीएमएलए) 2002 के अंतर्गत जांच करने को लेकर रुचि नहीं दिखा रहा था। साल 2009 में सितंबर से दिसंबर के बीच एम्मार एमजीएफ में कथित तौर पर यूरोपीय दलाल गुइडो हश्के के स्वतंत्र निदेशक होने के चलते श्रवण से पूछताछ हो रही है।

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अंग्रेजी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया के अनुसार सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय को इस मामले में प्राथमिकी की कॉपी दिसंबर 2013 में ही मिली थी लेकिन जांच को सात महीने तक दबाए रखा गया। निदेशालय के पूर्व अधिकारी ने इस मामले की जांच फेमा के तहत करने की सिफारिश भी की थी। अगस्ता मामले में सीबीआई ने 14 मार्च 2013 को ही प्राथमिकी दर्ज कर ली थी और प्रवर्तन निदेशालय  ने सीबीआई और पुलिस की प्राथमिकी के आधार पर मामले को पीएमएलए एक्ट के अंतर्गत दर्ज किया था।
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उस समय लेनदेन की जांच के लिए प्रवर्तन निदेशालय ने सीबीआई से प्राथमिकी की कॉपी मांगी। लेकिन सीबीआई ने प्रवर्तन निदेशालय द्वारा दो बार रिमाइंडर भेजने के बाद भी कॉपी उपलब्ध नहीं कराई। सीबीआई ने प्रवर्तन निदेशालय को प्राथमिकी की कॉपी 13 दिसंबर 2013 में मिली जिसके बाद निदेशालय ने 7 और महीने लगा दिए। इस दौरान निदेशालय के प्रमुख अधिकारी ने फाइल पर लिखा था कि इस डील में फेमा के तहत जांच होनी चाहिए।

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