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भूमि घोटाला मामले में प्रवर्तन निदेशालय ने रॉबर्ट वाड्रा को भेजा सम्मन
Fri, 30 Nov 2018 01:03 PM IST
Trainee Trainee
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Trainee Trainee
Updated Fri, 30 Nov 2018 01:03 PM IST
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robert vadra
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सोनिया गांधी के दामाद और कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के जीजा रॉबर्ट वाड्रा की मुश्किलें अब और बढ़ने जा रही हैं। शुक्रवार को भूमि सौदे के एक मामले में प्रवर्तन निदेशालय ने रॉबर्ट वाड्रा को समन भेजा है। प्रवर्तन निदेशालय इस मामले में बहुत जल्द रॉबर्ट वाड्रा से पूछताछ भी कर सकती है।
हरियाणा में चल रहे भूमि सौदा मामले की जांच ईडी कर रही है। बता दें कि डीएलएफ और ओंकारेश्वर प्रॉपर्टीज मामले की जांच ईडी के हाथों में है। हरियाणा के शिकोहपुर जमीन सौदे की जांच ईडी के पास है। करीब पांच हजार करोड़ के मुनाफाखोरी का मामला सीबीआई के पास भी है।
उल्लेखनीय है कि कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के जीजा रॉबर्ट वाड्रा और हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेन्द्र सिंह हुड्डा की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।
भूमि सौदे के हरियाणा और राजस्थान में चल रहे हैं मामले
गुरुग्राम के भूमि सौदा मामला 2008 का है। 2008 के भूमि सौदे के लिए खेरकी दौला पुलिस स्टेशन में वाड्रा, डीएलएफ और हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपिंदर सिंह हुड्डा के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई थी। यह केस तीन लोगों के खिलाफ था जिसमें एक ओंकारेश्वर प्रॉपर्टीज भी थी। इस सौदे के कारण राजकोष के घाटे का आरोप लगाया गया था। वाड्रा और हुड्डा दोनों ने आरोपों का खंडन किया था।
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रॉबर्ट ने फेसबुक पर लिखा पोस्ट- विधानसभा चुनाव हारने की कही है बात
शुक्रवार सुबर रॉबर्ट ने अपने ऊपर लगे आरोपों पर सोशल मीडिया पर लंबा चौड़ा एक पोस्ट लिखा है। रॉबर्ट वाड्रा ने फेसबुक पर लिखा, मीडिया से जुड़े कुछ प्रश्न मेरे पास झूठे आरोपों के संबंध में आ रहे हैं। जिन्हें सरकार ने लीक किया है क्योंकि राजस्थान में चुनाव नजदीक हैं। दिलचस्प बात यह है कि उठाए जा रहे बहुत से मुद्दे न्यायालय में हैं। क्या यह केवल एक संयोग है कि सरकार की कुछ चुनिंदा एजेंसियों ने अपनी गतिविधियों को तेज करते हुए उन मुद्दों को उठाया है जिनका मुझसे कोई संबंध नहीं है या फिर जिनपर मैं सालों पहले जवाब दे चुका हूं और पिछले चार सालों से पूरी तरह सहयोग कर रहा हूं।
दुखद बात यह है कि भाजपा के अलावा हर कोई यह देख सकता है कि ये रणनीति कितनी हताश, साफ तौर से राजनीतिक और विरोधाभासी है। मुझे उम्मीद है कि स्वतंत्र और मीडिया में मौजूद पेशेवर व्यक्ति उन मुद्दों से अपना ध्यान नहीं हटाएंगे जिनका राजस्थान की जनता से सरोकार है। जैसे- भारी बेरोजगारी और कुशासन और खुद को सरकार के प्लान बी में नहीं उलझाएगी। जिसका इस्तेमाल बैकफुट पर जाने के बाद किया जाता है। फिर चाहे वह राफेल हो या फिर विधानसभा चुनाव हारने का डर।
राजस्थान के भूमि घोटाले में भी चल रही है जांच
राबर्ट वाड्रा पर भूमि सौदे का एक मामला राजस्थान में भी चल रहा है। जिसमें आरोप है कि एक कंपनी ने रॉबर्ट को जमीन खरीदने के लिए गलत तरीके से फायदा पहुंचाया था। बीकानेर में विवादास्पद भूमि लेनदेन के एक मामले की जांच करते हुए प्रवर्तन निदेशालय ने आयकर निपटान आयोग से भूषण पावर लिमिटेड एंड स्टील लिमिटेड (बीपीएसएल) से जुड़े सभी विवरण मांगे हैं। यह वही कंपनी है जिसने रॉबर्ड वाड्रा की कंपनी को लागत से सात गुना ज्यादा दाम पर जमीन खरीदने के लिए कर्ज दिया था।
दो महीने पहले उस समय प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के निदेशक रहे करनाल सिंह ने आयोग को पत्र लिखकर उस फाइल के ब्योरे के बारे में पूछा था जिसमें बीपीएसएल मामले पर विचार-विमर्श किया गया था और उस आदेश को सुरक्षित रख लिया गया था। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार निदेशक ने बीएसपीएल को राहत प्रदान करने के आदेश को कमजोर करने के आरोप में पुनर्निर्मित खंडपीठ का ब्योरा देने के लिए भी कहा था।
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हरियाणा में चल रहे भूमि सौदा मामले की जांच ईडी कर रही है। बता दें कि डीएलएफ और ओंकारेश्वर प्रॉपर्टीज मामले की जांच ईडी के हाथों में है। हरियाणा के शिकोहपुर जमीन सौदे की जांच ईडी के पास है। करीब पांच हजार करोड़ के मुनाफाखोरी का मामला सीबीआई के पास भी है।
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उल्लेखनीय है कि कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के जीजा रॉबर्ट वाड्रा और हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेन्द्र सिंह हुड्डा की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।
भूमि सौदे के हरियाणा और राजस्थान में चल रहे हैं मामले
गुरुग्राम के भूमि सौदा मामला 2008 का है। 2008 के भूमि सौदे के लिए खेरकी दौला पुलिस स्टेशन में वाड्रा, डीएलएफ और हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपिंदर सिंह हुड्डा के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई थी। यह केस तीन लोगों के खिलाफ था जिसमें एक ओंकारेश्वर प्रॉपर्टीज भी थी। इस सौदे के कारण राजकोष के घाटे का आरोप लगाया गया था। वाड्रा और हुड्डा दोनों ने आरोपों का खंडन किया था।
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रॉबर्ट ने फेसबुक पर लिखा पोस्ट- विधानसभा चुनाव हारने की कही है बात
शुक्रवार सुबर रॉबर्ट ने अपने ऊपर लगे आरोपों पर सोशल मीडिया पर लंबा चौड़ा एक पोस्ट लिखा है। रॉबर्ट वाड्रा ने फेसबुक पर लिखा, मीडिया से जुड़े कुछ प्रश्न मेरे पास झूठे आरोपों के संबंध में आ रहे हैं। जिन्हें सरकार ने लीक किया है क्योंकि राजस्थान में चुनाव नजदीक हैं। दिलचस्प बात यह है कि उठाए जा रहे बहुत से मुद्दे न्यायालय में हैं। क्या यह केवल एक संयोग है कि सरकार की कुछ चुनिंदा एजेंसियों ने अपनी गतिविधियों को तेज करते हुए उन मुद्दों को उठाया है जिनका मुझसे कोई संबंध नहीं है या फिर जिनपर मैं सालों पहले जवाब दे चुका हूं और पिछले चार सालों से पूरी तरह सहयोग कर रहा हूं।
दुखद बात यह है कि भाजपा के अलावा हर कोई यह देख सकता है कि ये रणनीति कितनी हताश, साफ तौर से राजनीतिक और विरोधाभासी है। मुझे उम्मीद है कि स्वतंत्र और मीडिया में मौजूद पेशेवर व्यक्ति उन मुद्दों से अपना ध्यान नहीं हटाएंगे जिनका राजस्थान की जनता से सरोकार है। जैसे- भारी बेरोजगारी और कुशासन और खुद को सरकार के प्लान बी में नहीं उलझाएगी। जिसका इस्तेमाल बैकफुट पर जाने के बाद किया जाता है। फिर चाहे वह राफेल हो या फिर विधानसभा चुनाव हारने का डर।
Enforcement Directorate has summoned Robert Vadra in the land deal case. More details awaited pic.twitter.com/XkjFMu2Q2h
— ANI (@ANI) November 30, 2018
राजस्थान के भूमि घोटाले में भी चल रही है जांच
राबर्ट वाड्रा पर भूमि सौदे का एक मामला राजस्थान में भी चल रहा है। जिसमें आरोप है कि एक कंपनी ने रॉबर्ट को जमीन खरीदने के लिए गलत तरीके से फायदा पहुंचाया था। बीकानेर में विवादास्पद भूमि लेनदेन के एक मामले की जांच करते हुए प्रवर्तन निदेशालय ने आयकर निपटान आयोग से भूषण पावर लिमिटेड एंड स्टील लिमिटेड (बीपीएसएल) से जुड़े सभी विवरण मांगे हैं। यह वही कंपनी है जिसने रॉबर्ड वाड्रा की कंपनी को लागत से सात गुना ज्यादा दाम पर जमीन खरीदने के लिए कर्ज दिया था।
दो महीने पहले उस समय प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के निदेशक रहे करनाल सिंह ने आयोग को पत्र लिखकर उस फाइल के ब्योरे के बारे में पूछा था जिसमें बीपीएसएल मामले पर विचार-विमर्श किया गया था और उस आदेश को सुरक्षित रख लिया गया था। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार निदेशक ने बीएसपीएल को राहत प्रदान करने के आदेश को कमजोर करने के आरोप में पुनर्निर्मित खंडपीठ का ब्योरा देने के लिए भी कहा था।