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सुप्रीम कोर्ट: ईडी की पूरक आरोप-पत्र पर अदालत ने जताई आपत्ति, मनी लॉन्ड्रिंग मामले पर कही यह बात

Wed, 20 Mar 2024 06:42 PM IST
आदर्श शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: आदर्श शर्मा Updated Wed, 20 Mar 2024 06:42 PM IST
सार

झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के कथित सहयोगी प्रेम प्रकाश की डिफॉल्ट जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट की नाराजगी का ईडी को सामना करना। पीठ ने अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू से कहा कि हम आपको (ईडी) नोटिस दे रहे हैं, आप मामले की जांच पूरी हुए बिना किसी व्यक्ति को गिरफ्तार नहीं कर सकते।

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Enforcement Directorate faces SC ire for keeping accused in custody without trial in money laundering cases
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : ANI

विस्तार

झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के कथित सहयोगी प्रेम प्रकाश की डिफॉल्ट जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए मनी लॉन्ड्रिंग मामलों में आरोपियों को बिना सुनवाई के हिरासत में रखने पर ईडी को सुप्रीम कोर्ट की नाराजगी का सामना करना पड़ा है। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि किसी आरोपी को बिना मुकदमे के हिरासत में रखना स्वतंत्रता में बाधा उत्पन्न करने जैसा है। 
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ईडी की सप्लीमेंट्री चार्जशीट पर कोर्ट ने जताई आपत्ति
न्यायमूर्ति संजीव खन्ना और न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता की पीठ ने झारखंड में कथित अवैध खनन से उत्पन्न धन शोधन मामले में ईडी द्वारा 1 मार्च, 2024 को नवीनतम चार पूरक आरोप-पत्र (सप्लीमेंट्री चार्जशीट) दाखिल करने पर आपत्ति जताई। बता दें आरोपी प्रेम प्रकाश को अगस्त, 2022 में छापेमारी के बाद गिरफ्तार किया गया था, जिसके दौरान दावा किया गया था कि रांची में उनके घर पर दो एके-47 राइफलें, 60 जिंदा राउंड और दो मैगजीन मिली थीं। उन पर मनी लॉन्ड्रिंग के अपराध और शस्त्र अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया था।
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'जांच हुए बिना किसी व्यक्ति को गिरफ्तार नहीं कर सकते'
पीठ ने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू से कहा कि चार पूरक आरोप पत्र दायर होने के बावजूद मामले में जांच अभी भी जारी है। पीठ ने राजू से कहा कि हम आपको (ईडी) नोटिस दे रहे हैं। आप मामले की जांच पूरी हुए बिना किसी व्यक्ति को गिरफ्तार नहीं कर सकते। मुकदमा शुरू किए बिना किसी व्यक्ति को हिरासत में नहीं रखा जा सकता। कुछ मामलों में हमें इस मुद्दे को सुलझाना होगा
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डिफॉल्ट जमानत के लाभ से वंचित नहीं रख सकते- कोर्ट
न्यायमूर्ति संजीव खन्ना ने कहा कि किसी आरोपी को सप्लीमेंट्री चार्जशीट दायर करके डिफॉल्ट जमानत के लाभ से वंचित नहीं किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि डिफॉल्ट जमानत का पूरा उद्देश्य यह है कि आप जांच पूरी होने तक गिरफ्तारी नहीं करते हैं। आप यह नहीं कह सकते कि मामले की जांच पूरी होने तक मुकदमा शुरू नहीं होगा। आप पूरक आरोप पत्र दायर करना जारी नहीं रख सकते हैं। गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू को एक महीने के भीतर पीठ द्वारा पूछे गए सभी सवालों का जवाब देने को कहा और मामले की अगली सुनवाई 29 अप्रैल को तय की है।
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