फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Endangered eagle species among 11 lakh birds sighted in Odisha's Chilika Lagoon

Odisha: ओडिशा की चिल्का लैगून झील में दिखी लुप्तप्राय ईगल प्रजाति, पक्षी विज्ञानियों में उत्साह

Fri, 05 Jan 2024 08:09 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गुवाहाटी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गुवाहाटी Published by: निर्मल कांत Updated Fri, 05 Jan 2024 08:09 PM IST
सार

Odisha: करीब दस वर्षों के बाद पल्लस फिश ईगल को ओडिशा की चिल्का लैगून झील में देखा गया है। चिल्का वन्यजीव प्रभाग के संभागीय वन अधिकारी (डीएफओ) अमलान नायक ने बताया कि पिछली सर्दियों की तुलना में इन सर्दियों में विशाल झील में आने वाले पक्षियों की संख्या में कुछ हजार की वृद्धि हुई है।

विज्ञापन
Endangered eagle species among 11 lakh birds sighted in Odisha's Chilika Lagoon
Pallas's fish eagle - फोटो : Social Media

विस्तार

ओडिशा के पक्षी विज्ञानी इस बात से उत्साहित हैं कि चिल्का लैगून में वार्षिक गणना के दौरान देखे गए 11.37 लाख पक्षियों में लुप्तप्राय पल्लस फिश ईगल भी शामिल है। चिल्का लैगून भारतीय उपमहाद्वीप में प्रवासी पक्षियों के लिए सर्दियों के लिए सबसे बड़ी झीलों में से एक है। एक अधिकारी ने यह जानकारी दी। 

विज्ञापन

करीब दस वर्षों के बाद पल्लस फिश ईगल को ओडिशा की चिल्का लैगून झील में देखा गया है। चिल्का वन्यजीव प्रभाग के संभागीय वन अधिकारी (डीएफओ) अमलान नायक ने बताया कि मध्यम आकार के इस पक्षी को लगभग दस साल के अंतराल के बाद नीले लैगून में फिर से देखा गया है। उन्होंने कहा कि हो सकता है कि पक्षी हिमालयी क्षेत्र से परे से झील में आया हो। नायक ने कहा कि पिछली सर्दियों की तुलना में इन सर्दियों में विशाल झील में आने वाले पक्षियों की संख्या में कुछ हजार की वृद्धि हुई है।

विज्ञापन
विज्ञापन

डीएफओ ने कहा कि ओडिशा के गंजम, पुरी और खुर्दा जिलों में 1100 वर्ग किलोमीटर में फैली झील में 187 प्रजातियों के 11,37,759 पक्षियों की गणना की गई है। इन पक्षियों में से 108 प्रजातियों में से 10,98,813 प्रवासी पक्षी थे और 79 प्रजातियों में से 38,946 लैगून के निवासी थे। पिछली सर्दियों (2023) में 184 विभिन्न प्रजातियों के 11,31,929 पक्षियों ने झील में शरण ली थी। इनमें 105 प्रजातियों के 10,93,049 जलपक्षी और 79 प्रजातियों के 38,880 जल-निर्भर पक्षी शामिल थे।

विज्ञापन

उन्होंने कहा कि प्रवासी पक्षियों की संख्या में वृद्धि के लिए वन्यजीव अधिकारियों द्वारा सुरक्षा उपाय किए गए। उन्होंने कहा कि इन सर्दियों में झील में अवैध शिकार का एक भी मामला सामने नहीं आया है। इस साल पाई जाने वाली सबसे प्रमुख प्रजातियों में बत्तख, नॉर्थ पिनटेल (2,18,654), गडवाल (1,56,636), यूरेशियन विगियन (1,40,322), ब्लैक टेल्ड गॉडविट (66,853) और कॉमन कूट (66,552) शामिल हैं।

कैस्पियन सागर, बैकाल झील, रूस के दूरदराज के हिस्सों, मध्य और दक्षिण पूर्व एशिया, लद्दाख और हिमालय सहित दूर-दराज के स्थानों से पंख वाले मेहमान हर सर्दियों में भोजन के लिए झील में उतरते हैं। वे गर्मियों की शुरुआत के साथ ही अपने घर वापस चले जाते हैं।  

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed