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अंग्रेजी राज की परंपरा होगी खत्म, जनवरी में पेश हो सकता है बजट
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Mon, 22 Aug 2016 01:26 PM IST
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बजट
- फोटो : bbc
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केंद्र सरकार आम बजट फरवरी के आखिर में पेश किए जाने की ब्रिटिश काल की परंपरा को बदलने पर विचार कर रही है।
सूत्रों का कहना है कि इस संबंध में आखिरी फैसला अभी होना बाकी है। सरकार चाहती है कि बजट आदि की प्रक्रिया वित्तीय वर्ष समाप्त होने की तारीख 31 मार्च से पहले ही पूरी कर ली जाए ताकि पॉलिसी क्रियान्वयन को तेज किया जा सके। सामान्य तौर पर बजट आवंटन मई के आसपास शुरू हो पाता है, इसलिए सरकार की कोशिश है कि यह अप्रैल से ही शुरू हो जाए।
सूत्रों का कहना है, 'हमने अभी तारीख तय नहीं है कि लेकिन हम जनवरी के आखिर में बजट के बारे में सोच रहे हैं।' सूत्रों के मुकाबिक, गणतंत्र दिवस की तैयारियों को ध्यान में रखते हुए तारीख तय किए जाएंगी। मौजूदा व्यवस्था के हिसाब से संसद द्वारा कर आदि का फाइनेंस बिल और अन्य संबंधित बिल मई के पहले या दूसरे हफ्ते में पास किए जाते हैं।
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सूत्रों का कहना है कि इस संबंध में आखिरी फैसला अभी होना बाकी है। सरकार चाहती है कि बजट आदि की प्रक्रिया वित्तीय वर्ष समाप्त होने की तारीख 31 मार्च से पहले ही पूरी कर ली जाए ताकि पॉलिसी क्रियान्वयन को तेज किया जा सके। सामान्य तौर पर बजट आवंटन मई के आसपास शुरू हो पाता है, इसलिए सरकार की कोशिश है कि यह अप्रैल से ही शुरू हो जाए।
सूत्रों का कहना है, 'हमने अभी तारीख तय नहीं है कि लेकिन हम जनवरी के आखिर में बजट के बारे में सोच रहे हैं।' सूत्रों के मुकाबिक, गणतंत्र दिवस की तैयारियों को ध्यान में रखते हुए तारीख तय किए जाएंगी। मौजूदा व्यवस्था के हिसाब से संसद द्वारा कर आदि का फाइनेंस बिल और अन्य संबंधित बिल मई के पहले या दूसरे हफ्ते में पास किए जाते हैं।
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अटल सरकार ने बदली थी एक परंपरा
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- फोटो : Demo Pic.
सरकार का यह कदम ऐसे समय में सामने आया है जब वह अगले वित्तीय वर्ष में आर्थिक नीतियों में व्यापक परिवर्तन पर विचार कर रही है। साथ ही बजट पेश करने के तरीकों में भी परिवर्तन किए जाएंगे।
संविधान में बजट पेश करने के समय के बारे में कोई व्याख्या नहीं देता है। ब्रिटिश परंपरा के हिसाब से 1999 तक भारत में आम बजट शाम 5 बजे पेश किया जाता था। अटल बिहारी वाजपेयी सरकार ने इसका समय बदलकर सुबह 11 बजे कर दिया था।
सरकार ने वित्तीय वर्ष के रिव्यू के लिए भी एक पैनल गठित किया है और कमेटी इस साल के आखिर तक इस संबंध में रिपोर्ट दे सकती है। अगर सरकार ने फैसला लिया तो बजट के लिए रिव्यू मीटिंग सितंबर या अक्टूबर में शुरू हो जाएगी।
संविधान में बजट पेश करने के समय के बारे में कोई व्याख्या नहीं देता है। ब्रिटिश परंपरा के हिसाब से 1999 तक भारत में आम बजट शाम 5 बजे पेश किया जाता था। अटल बिहारी वाजपेयी सरकार ने इसका समय बदलकर सुबह 11 बजे कर दिया था।
सरकार ने वित्तीय वर्ष के रिव्यू के लिए भी एक पैनल गठित किया है और कमेटी इस साल के आखिर तक इस संबंध में रिपोर्ट दे सकती है। अगर सरकार ने फैसला लिया तो बजट के लिए रिव्यू मीटिंग सितंबर या अक्टूबर में शुरू हो जाएगी।