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रिटायरमेंट पर सूचना आयुक्त का मार्मिक पत्र, आरबीआई गवर्नर को नोटिस भेजने में संविधान ने की मदद

Tue, 20 Nov 2018 12:59 PM IST
हरेन्द्र, नई दिल्ली
हरेन्द्र, नई दिल्ली Updated Tue, 20 Nov 2018 12:59 PM IST
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emotional letter of information commissioner Madabhushanam Sridhar Acharyulu on retirement
Sridhar Acharyulu
केंद्रीय सूचना आयुक्त श्रीधर आचार्यालु ने अपने रिटायरमेंट से पहले मुख्य सूचना आयुक्त को पत्र लिखा है। आचार्यालु ने 8 नवंबर को आरबीआई गवर्नर उर्जित पटेल को नोटिस जारी कर बड़े कर्ज डिफॉल्टरों के नामों का खुलासा करने को कहा था। अपने पत्र में सफाई पेश करते हुए आचार्यालु ने कहा कि उन्होंने जो भी आदेश जारी किया, वह अपने कार्यक्षेत्र के भीतर रहते हुए किया। आचार्यालु का कार्यकाल 20 नवंबर को समाप्त हो रहा है।
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मुख्य सूचना आयुक्त को लिखे पत्र में सूचना आयुक्त श्रीधर आचार्यालु ने लिखा है कि केन्द्रीय सूचना आयोग को इन तथ्यों की अनदेखी नहीं करनी चाहिए कि आरबीआई ने 2015 के जयंती लाल एन मिस्त्री मामले में सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के बावजूद बड़े कर्ज डिफॉल्टरों की सूची का खुलासा करने से इनकार कर दिया था। साथ ही, इस मामले में केन्द्रीय सूचना आयोग के 11 आदेशों पर माननीय सुप्रीम कोर्ट ने भी सहमति जताई थी।
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प्रोफेसर श्रीधर आचार्यालु का कहना है कि उनका मानना है कि केन्द्रीय सूचना आयोग के पास अधिकार है कि वह रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के घोषणापत्र 4(1)बी की जांच कर सकता है, जिसमें आरबीआई का तर्क है कि माननीय सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के बावजूद वह ऐसे मामलों की जानकारी सार्वजनिक नहीं कर सकता। शीर्ष अदालत ने आरबीआई से आरटीआई के तहत बड़े कर्ज डिफॉल्टरों की सूची के खुलासे के तत्कालीन सूचना आयुक्त शैलेश गांधी के आदेशों में से एक का पालन करने का आदेश जारी किया था।
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पत्र में आचार्यालु ने सवाल उठाए

अपने पत्र में आचार्यालु ने सवाल उठाए हैं कि क्या सुप्रीम कोर्ट के आदेशों और कानून के शब्दों के ऊपर कुछ और भी है। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में केन्द्रीय सूचना आयोग को अपने आदेशों को लागू करने के लिए अदालत में मानहानि की शिकायत जैसे कदम भी उठाने चाहिए। उन्होंने पूछा है कि क्या यह आयोग की कानूनी जिम्मेदारी नहीं बनती है कि बड़े कर्ज डिफॉल्टरों के नाम सामने आने चाहिए। उनके रिकॉर्ड के मुताबिक जून, 2017 तक 9 हजार कर्ज डिफाल्टरों ने 9.5 लाख करोड़ रुपए जनता का पैसा भारतीय बैंकों को वापस नहीं किया है।

उन्होंने सवाल उठाए हैं कि ऐसे हालात में जब देश में अब तक 3 लाख से ज्यादा किसान छोटे लोन न चुकाने की स्थिति में आत्महत्या कर चुके हैं, तो ऐसे बड़े धोखाधड़ी करने वाले कर्ज डिफाल्टर्स के नाम सामने क्यों नहीं आने चाहिए। उन्होंने लिखा है कि इस मामले में आदेश जारी करते हुए न केवल संविधान बल्कि उनके विवेक ने भी मदद की है।  

उन्होंने केन्द्रीय सूचना आयोग से अपील की है कि जयंति लाल मिस्त्री मामले में सुप्रीम कोर्ट और पूर्व मुख्य सूचना आयुक्त शैलेष गांधी के आदेशों को लागू करने के लिए आयोग जल्द से जल्द कदम उठाए, ताकि आम जनता का सूचना के अधिकार कानून और संस्थान पर भरोसा बरकरार रहे।


आचार्युलू ने अपने 67 पन्नों के आदेश में कहा था कि सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की इस तरह की अवहेलना केंद्रीय लोक सूचना अधिकारी के स्तर पर नहीं हो सकती। साथ ही, आरटीआई कानून के प्रावधानों के तहत आरबीआई के गवर्नर को केंद्रीय लोक सूचना अधिकारी (सीपीआईओ) माना जाना चाहिए।
 
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