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Gautam Navlakha case: सुप्रीम कोर्ट ने कहा, गौतम नवलखा को घर में नजरबंद रखने के अनुरोध पर कर रहे विचार

Wed, 09 Nov 2022 07:04 PM IST
Amit Mandal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Amit Mandal Updated Wed, 09 Nov 2022 07:04 PM IST
सार

नवलखा की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने कहा कि मेडिकल रिपोर्ट से पता चलता है कि जेल में उनके इलाज की कोई संभावना नहीं है।

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Elgar Parishad-Maoist link case: Considering allowing house arrest request of Gautam Navlakha, says SC
गौतम नवलखा (file photo) - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को कहा कि वह एल्गार परिषद-माओवादी लिंक मामले में जेल में बंद कार्यकर्ता गौतम नवलखा को घर में नजरबंद करने के अनुरोध पर विचार कर रहा है। शीर्ष अदालत ने राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एस वी राजू से निर्देश मांगे और उसे कुछ दिनों के लिए नजरबंद रखने के दौरान नवलखा पर लगाए जा सकने वाले प्रतिबंधों के बारे में सूचित करने को कहा। न्यायमूर्ति के एम जोसेफ और न्यायमूर्ति हृषिकेश रॉय की पीठ ने कहा कि वह एएसजी की सुनवाई के बाद गुरुवार को आदेश पारित करेगी।

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हम उन्हें जमानत पर रिहा नहीं करने जा रहे हैं...
अदालत ने कहा कि नवलखा 70 वर्षीय व्यक्ति है। हम नहीं जानते कि वह कब तक जीवित रहेंगे। ऐसा नहीं है कि हम उन्हें जमानत पर रिहा करने जा रहे हैं। उन्हें कॉमरेड सुधा भारद्वाज की तरह जमानत नहीं मिलेगी। हम सचेत हैं कि हमें सावधानी से चलना होगा। हम सहमत हैं कि एक विकल्प के रूप में घर में नजरबंद रखने का सावधानी से इस्तेमाल किया जाना चाहिए। हम इस बात से चिंतित हैं कि आप क्या प्रतिबंध लगाना चाहेंगे। जो भी प्रतिबंध लगाएं, ऐसा नहीं है कि वह देश को तबाह करने वाले हैं। कम से कम उन्हें कुछ दिनों के लिए नजरबंद कर दिया जाए।  
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नवलखा की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने कहा कि मेडिकल रिपोर्ट से पता चलता है कि जेल में उनके इलाज की कोई संभावना नहीं है। सिब्बल ने कहा कि दुनिया में कोई रास्ता नहीं है कि आप जेल में इस तरह का इलाज कर सकें। उनका वजन काफी कम हो गया है। जेल में इस तरह का इलाज संभव नहीं है। एनआईए की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एस वी राजू ने कहा कि नवलखा के साथ कुछ भी गलत नहीं हो रहा है। हम उन्हें गद्दा और खाट सब कुछ मुहैया कराएंगे। हम उन्हें घर का खाना भी लाने देंगे। 
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शीर्ष अदालत ने 29 सितंबर को तलोजा जेल अधीक्षक को नवलखा को तुरंत इलाज के लिए मुंबई के जसलोक अस्पताल में स्थानांतरित करने का निर्देश दिया था। अदालत ने कहा था कि चिकित्सा उपचार प्राप्त करना एक कैदी का मौलिक अधिकार है। कार्यकर्ता ने मुंबई के पास तलोजा जेल में पर्याप्त चिकित्सा और अन्य बुनियादी सुविधाओं की कमी की आशंकाओं को लेकर बंबई उच्च न्यायालय के 26 अप्रैल के आदेश के खिलाफ शीर्ष अदालत में अपील की थी।

भ्रष्ट लोग पैसे के दम पर बच निकलते हैं : सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को कहा, भ्रष्ट लोग देश को तबाह कर रहे हैं और पैसे की मदद से वह भ्रष्टाचार के आरोपों से बच भी जाते हैं। शीर्ष अदालत की यह मौखिक टिप्पणी कार्यकर्ता गौतम नवलखा की याचिका पर सुनवाई के दौरान आई। नवलखा ने एल्गार परिषद मामले में न्यायिक हिरासत के बजाय घर में नजरबंद रखे जाने की मांग की है। 

जस्टिस केएम जोसेफ और जस्टिस ऋषिकेश रॉय की पीठ के समक्ष नवलखा की अर्जी का विरोध करते हुए एनआईए की ओर से एडिशनल सॉलिस्टिर जनरल एसवी राजू ने कहा, नवलखा जैसे लोग देश को बर्बाद करना चाहते हैं। इनकी विचारधारा ही इस तरह की है। ऐसा नहीं है कि वे निर्दोष लोग हैं, वे वास्तविक युद्ध में शामिल व्यक्ति हैं। 

इस पर पीठ ने कहा, क्या आप जानना चाहते हैं कि देश को कौन बर्बाद कर रहा है? जो लोग भ्रष्ट हैं। आप जिस भी कार्यालय में जाते हैं, क्या होता है? भ्रष्टों के खिलाफ कौन कार्रवाई करता है? हम पर पक्षपाती होने का आरोप लगाया जाना चाहिए। नवलखा ने बॉम्बे हाईकोर्ट के 26 अप्रैल के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी। हाईकोर्ट ने मुंबई के पास तलोजा जेल में पर्याप्त चिकित्सा और अन्य बुनियादी सुविधाओं की कमी की आशंकाओं पर नजरबंदी के लिए उनकी याचिका खारिज कर दी थी।

पैसों से भरे बैग हों तो बच निकलने से कोई नहीं रोक सकता
पीठ ने कहा, हमने लोगों का एक वीडियो देखा जहां लोग हमारे तथाकथित निर्वाचित प्रतिनिधियों को करोड़ों रुपये में खरीदने की बात करते हैं। क्या आप कह रहे हैं कि वे हमारे देश के खिलाफ कुछ नहीं कर रहे हैं? मुद्दा यह है कि आप उनका बचाव नहीं करते हैं लेकिन वे बच निकलते हैं। पैसों से भरे बैग हों तो आपको बच निकलने से कोई नहीं रोक सकता। अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ने कहा, मैं भ्रष्टों का बचाव नहीं कर रहा, उनके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।


धरना जैसे अपराधों में सजा की जानकारी नहीं देने पर चुनाव शून्य नहीं होगा  
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को कहा कि धरना जैसे अपराधों के लिए सजा का खुलासा करने में किसी उम्मीदवार की विफलता जन प्रतिनिधित्व अधिनियम के तहत भ्रष्ट आचरण नहीं होगा। जस्टिस एस अब्दुल नजीर और जस्टिस वी रामसुब्रमण्यम की पीठ ने कहा कि कानून के प्रावधानों को इस हद तक नहीं बढ़ाया जा सकता कि इस तरह की जानकारी नहीं देने पर उम्मीदवार के चुनाव को शून्य घोषित किया जा सके।

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