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Bombay HC: 'बिना सुनवाई लंबे समय तक जेल.. आर्टिकल 21 का उल्लंघन; एल्गार परिषद मामले में 9 माह में आरोप तय हों'

Wed, 15 Jan 2025 02:35 AM IST
दीपक कुमार शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई Published by: दीपक कुमार शर्मा Updated Wed, 15 Jan 2025 02:35 AM IST
सार

एल्गार परिषद-माओवादी संबंध मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा कि बिना सुनवाई के लंबे समय तक जेल में रहना संविधान के तहत जीवन के अधिकार का उल्लंघन है। हाईकोर्ट ने कहा कि विशेष अदालत नौ महीने में आरोप तय करेगी। आरोप तय करना मुकदमे की शुरुआत की दिशा में पहला कदम है। 

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Elgar Parishad-Maoist connection case Bombay HC says jail for long time without trial right to life violation
बॉम्बे हाईकोर्ट - फोटो : एएनआई

विस्तार

बॉम्बे हाईकोर्ट ने 2018 के एल्गार परिषद-माओवादी संबंध मामले में सुनवाई में तेजी लाने के लिए एक विशेष अदालत से अपील की। अदालत ने कहा कि बिना सुनवाई के लंबे समय तक जेल में रहना संविधान के तहत जीवन के अधिकार का उल्लंघन है। हाईकोर्ट ने कहा कि विशेष अदालत नौ महीने में आरोप तय करेगी। आरोप तय करना मुकदमे की शुरुआत की दिशा में पहला कदम है। 

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न्यायमूर्ति ए एस गडकरी और न्यायमूर्ति कमल खता की खंडपीठ ने 8 जनवरी को शोधकर्ता रोना विल्सन और कार्यकर्ता सुधीर धावले को जमानत दे दी। दोनों को 2018 में एल्गार परिषद-माओवादी संबंध मामले में गिरफ्तार किया गया था। जस्टिस ए एस गडकरी और कमल खता की खंडपीठ ने उनके लंबे समय तक जेल में रहने और मामले के जल्द निपटारे की संभावना कम होने पर यह निर्णय लिया। 
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मंगलवार को उपलब्ध कराए गए अपने विस्तृत आदेश में पीठ ने कहा कि यह एक स्थापित सिद्धांत है कि बिना सुनवाई के अभियुक्तों को लंबे समय तक जेल में रखना संविधान के अनुच्छेद 21 का उल्लंघन है। पीठ ने कहा, 'लंबे समय तक जेल में रहने और निकट भविष्य में मुकदमा पूरा होने की संभावना नहीं होने के कारण विचाराधीन कैदी को जमानत पर रिहा करना आवश्यक है।'
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छह साल से अधिक समय जेल में बिता चुके विल्सन और धावले
बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा कि विल्सन और धावले पहले ही छह साल से अधिक समय जेल में बिता चुके हैं। हाईकोर्ट ने कहा, 'हम विशेष न्यायाधीश (एनआईए अधिनियम) से अपील करते हैं कि वे आरोप तय करने के चरण में तेजी लाएं और जहां तक संभव हो, मुकदमा भी पूरा करें। आरोप तय करने का चरण आज से 9 महीने की अवधि के भीतर पूरा किया जाना चाहिए।'

एक-एक लाख जमानत राशि जमा करने का निर्देश
हाईकोर्ट ने विल्सन और धावले को एक-एक लाख रुपए की जमानत राशि जमा करने का निर्देश दिया। आदेश की प्रति मिलने के बाद, अब दोनों अपनी जमानत औपचारिकताओं को पूरा करने के लिए विशेष अदालत का दरवाजा खटखटा सकते हैं, जिसके बाद उन्हें नवी मुंबई की तलोजा जेल से रिहा कर दिया जाएगा। 

बॉम्बे हाईकोर्ट ने ये भी दिए निर्देश
बॉम्बे हाईकोर्ट ने विल्सन और धावले को मुकदमे के दौरान विशेष एनआईए अदालत के समक्ष पेश होने, अपने पासपोर्ट जमा करने और मुकदमे खत्म होने तक शहर से बाहर न जाने का निर्देश भी दिया है।

31 दिसंबर, 2017 में भड़काऊ भाषण दिए जाने का मामला
बता दें कि यह मामला 31 दिसंबर 2017 को पुणे में आयोजित एल्गार परिषद सम्मेलन में कथित तौर पर दिए गए भड़काऊ भाषणों से संबंधित है, जिसके कारण अगले दिन पुणे जिले के कोरेगांव-भीमा में हिंसा भड़क गई थी। पुलिस के अनुसार, इस सम्मेलन को माओवादियों का समर्थन प्राप्त था। 

इस मामले में अब तक 10 को मिल चुकी जमानत 
इस मामले में विल्सन और धावले सहित गिरफ्तार किए गए 16 लोगों में से 10 को अब तक जमानत मिल चुकी है। जमानत पाने वाले अन्य आरोपियों में वरवर राव, सुधा भारद्वाज, आनंद तेलतुम्बडे, वर्नोन गोंजाल्विस, अरुण फरेरा, शोमा सेन, गौतम नवलखा और महेश राउत शामिल हैं।


राउत को विशेष अदालत ने एलएलबी परीक्षा में बैठने के लिए अंतरिम जमानत दी
हालांकि, एनआईए द्वारा सुप्रीम कोर्ट में उनकी जमानत को चुनौती दिए जाने के बाद राउत जेल में ही रहे। विशेष एनआईए अदालत ने मंगलवार को उन्हें एलएलबी परीक्षा में बैठने के लिए 18 दिनों की अंतरिम जमानत दी। इस मामले में एक आरोपी स्टेन स्वामी की 2021 में जेल में मौत हो गई। एनआईए ने इस मामले की जांच अपने हाथ में ली थी, लेकिन अभी तक आरोपियों के खिलाफ आरोप तय नहीं किए गए हैं।






 

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