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एल्गार मामला: 'कार्यकर्ता गौतम नवलखा के ISI एजेंट से संबंध होने का शक', NIA कोर्ट का जमानत देने से इनकार
Thu, 13 Apr 2023 10:07 PM IST
निर्मल कांत
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
Published by: निर्मल कांत
Updated Thu, 13 Apr 2023 10:07 PM IST
सार
नवलखा को अगस्त 2018 में गिरफ्तार किया गया था और शुरुआत में नजरबंद किया गया था। उन्हें सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के बाद अप्रैल 2020 में नवी मुंबई के तलोजा सेंट्रल जेल में स्थानांतरित कर दिया गया था।
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गौतम नवलखा
- फोटो : सोशल मीडिया
विस्तार
राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की एक विशेष अदालत ने कहा कि एल्गार परिषद-माओवादी संबंध मामले में आरोपी मानवाधिकार कार्यकर्ता गौतम नवलखा और पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई के एजेंट सैयद गुलाम नबी फई के बीच संबंध प्रतीत होते हैं। पिछले महीने बंबंई उच्च न्यायालय ने विशेष न्यायाधीश के पूर्व के आदेश को रद्द कर दिया था और उन्हें नवलखा की जमानत याचिका पर फिर से सुनवाई करने का निर्देश दिया था।
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उच्च न्यायालय ने कहा था कि विशेष अदालत के आदेश में अभियोजन पक्ष द्वारा दिए गए विश्वसनीय सबूतों का विश्लेषण नहीं है। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) अदालत की अध्यक्षता कर रहे विशेष न्यायाधीश राजेश कटारिया ने दलीलें नए सिरे से सुनने के बाद नवलखा (69 वर्षीय) को छह अप्रैल को जमानत देने से इनकार कर दिया था। विस्तृत आदेश गुरुवार को उपलब्ध कराया गया।
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नवलखा को अगस्त 2018 में गिरफ्तार किया गया था और शुरुआत में नजरबंद किया गया था। उन्हें सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के बाद अप्रैल 2020 में नवी मुंबई के तलोजा सेंट्रल जेल में स्थानांतरित कर दिया गया था। हालांकि, पिछले साल 10 नवंबर को सर्वोच्च न्यायालय ने उनकी एक महीने के लिए घर में नजरबंदी की याचिका को स्वीकार कर लिया था। वह वर्तमान में नवी मुंबई में रह रहे हैं।
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एनआईए ने दावा किया है कि मानवाधिकार कार्यकर्ता भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) का सक्रिय सदस्य था। आतंकवाद रोधी एजेंसी ने अपने आरोपपत्र में आरोप लगाया है कि आवेदक (नवलखा) नबी फई के नेतृत्व वाले 'कश्मीरी अमेरिकन काउंसिल' (केएसी) द्वारा आयोजित सम्मेलनों को संबोधित करने के लिए तीन बार अमेरिका गया था। केंद्रीय एजेंसी के अनुसार, कार्यकर्ता अमेरिका में रहने वाले कश्मीरी अलगाववादी नबी फई के साथ ईमेल के माध्यम से और कभी-कभी फोन के माध्यम से संपर्क में था।
नबी फई को जुलाई 2011 में अमेरिका के एफबीआई ने आईएसआई और पाकिस्तान सरकार से पैसा स्वीकार के लिए गिरफ्तार किया था। केंद्रीय जांच एजेंसी ने आरोप लगाया है कि नवलखा ने नबी फई के मामले की सुनवाई कर रहे अमेरिकी अदालत के न्यायाधीश को एक पत्र लिखा था। आतंकवाद रोधी एजेंसी ने आगे दावा किया कि नवलखा को आईएसआई के निर्देश पर नबी फई द्वारा भर्ती के लिए पाकिस्तानी आईएसआई जनरल से मिलवाया गया था, जो कश्मीरी अलगाववादी और पड़ोसी देश की खुफिया एजेंसी के साथ उनकी सांठगांठ और मिलीभगत को दिखाता है।
एनआईए अदालत ने अपने आदेश में कहा कि अभियोजन पक्ष ने 'संयुक्त राज्य अमेरिका बनाम सैयद गुलाम नबी फई मामले' से संबंधित "सप्लीमेंटल पॉजिशन ऑफ द यूनाइटेड स्टेट्स विद रेस्पेक्ट टू सेंटेंसिंग फैक्टर्स" शीर्षक वाले दस्तावेज की एक प्रति प्रस्तुत की थी। विशेष अदालत ने कहा, 'यह (दस्तावेज) प्रथम दृष्टया आवेदक (नवलखा) और सैयद गुलाम नबी फई के बीच संबंध प्रतीत होता है।
हालांकि, अदालत ने कहा कि नवलखा और अन्य दस्तावेजों पर रिपोर्ट से आवेदक की ओर से कुछ विचलित आचरण प्रतीत होता है, लेकिन यह जमानत के लिए आवेदक को कोई लाभ नहीं दे सकता है। विशेष न्यायाधीश ने कहा कि अभियोजन पक्ष द्वारा जिन पूरक आरोप पत्र और दस्तावेजों पर भरोसा किया गया है, प्रथम दृष्टया बताता है कि आवेदक उक्त प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन (सीपीआई-माओवादी) का सक्रिय सदस्य है और वह उक्त संगठन के उद्देश्य को आगे बढ़ाने के लिए गतिविधियों को अंजाम देता है।
विशेष अदालत ने कहा कि आरोपपत्र के साथ पेश दस्तावेजों से पता चलता है कि आवेदक (नवलखा) अपराध में सक्रिय रूप से शामिल था और साजिश में शामिल था और उसने अन्य आरोपियों के साथ हथियारों का प्रशिक्षण लिया था।