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केरल से लेकर दिल्ली तक में बैठे हैं गजराज के दुश्मन, जानें क्यों हो रहा है ये घिनौना काम
Tue, 16 Feb 2021 10:11 PM IST
गौरव पाण्डेय
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: गौरव पाण्डेय
Updated Tue, 16 Feb 2021 10:11 PM IST
सार
- वन्य अपराध नियंत्रण ब्यूरो ने पिछले दस सालों में हाथी दांत के अवैध खरीद-फरोख्त के 509 मामलों में 957 लोगों को गिरफ्तार किया है।
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हाथी
- फोटो : पेक्सेल्स
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विस्तार
इंसान के लालच की वजह से दुनिया में जानवरों का रहना दूभर हो गया है। शेर, बाघ, चीता, कछुआ से लेकर बच्चों के बेहद प्रिय पशु हाथी तक का अवैध शिकार किया जा रहा है। यह शिकार इन पशुओं के दांत, खाल और अन्य चीजों के लिए किया जा रहा है। वन्य अपराध नियंत्रण ब्यूरो ने बताया है कि पिछले दस सालों में हाथी दात के अवैध खरीद-फरोख्त के 509 मामले उसके सामने आए हैं जिनमें 957 लोगों को गिरफ्तार किया गया है।
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अधिवक्ता रंजन तोमर की ओर से मांगी गई एक जानकारी के जवाब में वन्य अपराध नियंत्रण ब्यूरो ने बताया है कि हाथियों का सबसे ज्यादा शिकार केरल राज्य में हुआ है जहां बहुतायत में हाथी पाए जाते हैं। केरल में पिछले दस सालों के दौरान हाथी दांत के अवैध शिकार के 101 मामले सामने आए जिनमें 203 शिकारियों को गिरफ्तार किया गया है। इसी प्रकार तमिलनाडु में 68 मामले सामने आए जिनमें 163 लोगों को गिरफ्तार किया गया।
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पश्चिम बंगाल में 67 मामलों में 105 शिकारी ब्यूरो की गिरफ्त में आए तो कर्नाटक में 57 मामलों में 81 और ओडिशा में 56 मामलों में 160 पकड़े गए। इस मामले में देश की राजधानी दिल्ली भी अछूती नहीं रही जहां इस तरह के छह मामले सामने आए और इनमें दस लोगों को पुलिस ने गिरफ्तार किया। हाथी दांत के अवैध व्यापार के सबसे ज्यादा मामले 2010 में सामने आए थे। इस वर्ष में 96 मामले मिले तो 2013 तक इनकी संख्या 33 हो गई।
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