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Elections 2023: कर्ज लेकर मुफ्त रेवड़ियां बांट रहे MP-राजस्थान और छत्तीसगढ़; देनदारी में तेलंगाना पहले नंबर पर

Thu, 12 Oct 2023 07:54 PM IST
Rahul Sampal राहुल संपाल
Updated Thu, 12 Oct 2023 07:54 PM IST
सार

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की ओर से संसद को दी जानकारी के अनुसार, राज्यों में कुल बकाया देनदारियां वित्त वर्ष 2019 में 1.9 लाख करोड़ थी। जबकि यह बढ़कर वित्त वर्ष 2023 में बजट अनुमान में 3.66 लाख करोड़ हो गई हैं। इन पांच सालों के दौरान प्रतिशत के हिसाब से देखने पर बकाया देनदारियां में सालाना बढ़ोतरी के मामले में तेलंगाना के बाद राजस्थान का नंबर है। 

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Elections 2023 Madhya Pradesh Rajasthan Chhattisgarh distributing free rabri after taking loan Telangana first
Elections 2023 - फोटो : AMAR UJALA

विस्तार

आचार संहिता लगने के बाद मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ चुनावी मोड में आ चुका है। वोटरों को लुभाने के लिए अब पार्टियां नए वादे कर रही हैं और पुरानी घोषणाओं को दोहराती हुई नजर आ रही हैं। रैलियों में मुफ्त बिजली, राशन, फ्री स्कूटी जैसी स्कीमों की पेशकशों से मतदाताओं को आकर्षित किया जा रहा है। ये तीनों राज्य सरकारें ऐसे समय लाखों करोड़ों की घोषणाएं कर रही हैं, जबकि पिछले पांच साल में इन पर कर्ज और बढ़ा है। तीनों राज्य गहरे वित्तीय संकट से जूझ रहे हैं। 

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केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की ओर से संसद को दी जानकारी के अनुसार, राज्यों में कुल बकाया देनदारियां वित्त वर्ष 2019 में 1.9 लाख करोड़ थी। जबकि यह बढ़कर वित्त वर्ष 2023 में बजट अनुमान में 3.66 लाख करोड़ हो गई हैं। इन पांच सालों के दौरान प्रतिशत के हिसाब से देखने पर बकाया देनदारियां में सालाना बढ़ोतरी के मामले में तेलंगाना के बाद राजस्थान का नंबर है। 
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राजस्थान: गहलोत सरकार पर लगातार बढ़ रहा कर्ज, नई योजनाओं से मुश्किल बढ़ी
उपलब्ध सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, चुनावी राज्य राजस्थान की बकाया देनदारियों में सालाना 17.2 प्रतिशत की बढ़ोतरी देखी गई है। गहलोत सरकार का मार्च 2019 में कर्ज 3,11,854 करोड़ था। जो मार्च 2023 में बढ़कर 5,37,013 करोड़ तक पहुंच गया है। राज्य की गहलोत सरकार की तरफ शुरु की गई प्रमुख योजना और उनके बजट पर नजर डाली जाए तो सवाल उठता है कि कर्ज में डूबे होने के बावजूद लाखों करोड़ों रुपए की योजनाओं का अतिरिक्त भार सरकार कैसे उठाएगी।

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  • प्रदेश सरकार की योजनाओं पर नजर डालें तो सामने आता है कि कई ऐसी योजनाएं हैं जिस पर सरकार करोड़ों रुपए खर्च कर रही है। सरकार राज्य की महिलाओं के लिए स्मार्ट फोन देने की योजनाएं लेकर आई है। इसमें पात्र महिलाओं को लाभ पहुंचाने के लिए 12 सौ करोड़ का बजट खर्च कर रही है। राजस्थान मुफ्त योजनाओं की लिस्ट में लगभग 1.33 करोड़ महिलाओं को मुफ्त मोबाइल उपलब्ध करवाने का लक्ष्य रखा गया है।
  • इसके अलावा सरकार ने 30 हजार मेधावी छात्रों को फ्री स्कूटी देने का वादा किया है। इसकी कुल 390 करोड़ लागत है। इसके अलावा भारत सरकार ने 70 लाख से ज्यादा उपभोक्ताओं को सब्सिडी वाले सिलेंडर देने का ऐलान किया है। इस घोषणा से राज्य सरकार पर हर साल लगभग 3,300 करोड़ रुपए का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा।
  • प्रदेश सरकार अन्नपूर्णा फूड पैकेट योजना लेकर आई है। इसमें हर लाभार्थियों को हर माह फेयर प्राइस शॉप से ये फूड पैकेट मुफ्त मिलेंगे। इसके लिए फेयर प्राइस शॉप को हर एक पैकेट पर 10 रुपए का कमीशन मिलेगा। इस योजना पर राज्य सरकार सालाना 4,500 करोड़ रुपए खर्च करेगी। सीएम ने इसी साल पेश किए बजट में इस योजना की घोषणा की है।
  • राजस्थान सरकार ने नई युवा नीति के लिए 500 करोड़ रुपए का युवा कल्याण फंड बनाने का एलान किया है। सभी प्रकार की भर्ती परीक्षा फ्री में कराने की घोषणा हुई है। इससे प्रदेश के खजाने पर 200 करोड़ बोझ बढ़ेगा।
  • गहलोत सरकार ने 500 रुपए प्रतिमाह मिलने वाली सामाजिक सुरक्षा पेंशन को बढ़ाकर 1 हजार रुपए कर दिया है। खुद सीएम गहलोत ने बताया था कि, इससे प्रदेश सरकार पर 12 हजार करोड़ रुपए का अतिरिक्त बोझ बढ़ा है। अगर इन सभी योजनाओं के बजट को जोड़कर देखे तो ये करीब 7,990 करोड़ रुपए बैठ रहा है।


मध्यप्रदेश: एक ही योजना का बजट आठ हजार करोड़
राजस्थान के अलावा मध्य प्रदेश सरकार भी नई योजनाओं की घोषणा करने के मामले में पीछे नहीं हैं। राज्य में चुनावी आचार संहिता लगने से पहले तक सीएम शिवराज सिंह चौहान नई योजनाओं की घोषणा करते नजर आए। इस मामले पर कांग्रेस ने कई बार शिवराज पर निशाना भी साधा लेकिन पार्टी 2023 के चुनाव में जीत हासिल करने ये कदम उठा रही है। मध्यप्रदेश सरकार के वित्तीय हालत पर नजर डालें तो सामने आता है कि प्रदेश का कुल कर्ज 1,83,439 रुपए तक बढ़ा है। सरकारी आंकड़े बताते हैं कि, मार्च 2019 में मध्यप्रदेश सरकार का कर्ज 1,95,178 रुपए था। जो मार्च में 2023 में बढ़कर 3,78,617 पहुंच गया है।

  • एमपी की शिवराज सरकार की सबसे प्रमुख योजना लाडली बहना स्कीम है। इसके तहत 1.25 करोड़ महिलाओं के बैंक खाते में 1210 रुपए राज्य सरकार के खाते से दिए जाएंगे। प्रदेश सरकार के अफसरों का कहना है कि, इस योजना के लिए बजट में शुरुआत में 8,000 करोड़ रुपए का प्रावधान किया है।  लेकिन अब सीएम ने चुनाव जीतने के लिए ऐलान कर दिया है कि 2023 के चुनाव में सरकार फिर सत्ता में वापसी करती है तो महिलाओं को 3 हजार प्रतिमाह दिए जाएंगे। मध्यप्रदेश भाजपा द्वारा मिली जानकारी के अनुसार,सितंबर तक राज्य सरकार ने पिछले तीन माह में 12.25 करोड़ महिलाओं को लाड़ली बहन योजना के तहत 3,600 करोड़ रुपए दिए है।
  • इसके अलावा राज्य ने 11.19 लाख किसानों का ब्याज माफ करने के लिए 2,123 करोड़ रुपए खर्च किए और अकेले पिछले तीन माह में पीएम किसान निधि के तहत 25,000 करोड़ रुपए खर्च किए है।
  • हाल ही में सीएम ने रक्षाबंधन से पहले सिलेंडर रिफिलिंग योजना की भी घोषणा की थी। इसमें पीएम उज्जवल योजना और मुख्यमंत्री लाड़ली बहन योजना के सभी लाभार्थियों को 1 सितंबर से प्रतिमाह 450 रुपए में एक घरेलू एलपीजी सिलेंडर मिलेगा। इसका अतिरिक्त बोझ भी राज्य सरकार के कंधे पर ही पड़ेगा। इसके अलावा सीएम ने लाभार्थी को महिलाओं के खाते में रक्षाबंधन के दौरान 250 रुपए शगुन भी भेजा ।


छत्तीसगढ़: बेरोजगार युवा को भत्ता दे रही सरकार
लोकलुभावन योजनाओं की घोषणा करने के मामले में छत्तीसगढ़ की कांग्रेस सरकार भी पीछे नहीं है। छत्तीसगढ़ में इन पांच सालों में कर्ज में 10.6 फीसदी का इजाफा देखा गया है। मार्च 2019 में सरकार का कर्ज 68,982 करोड़ रुपए से बढ़कर मार्च 2023 तक 1,18,166 करोड़ पहुंच गया है।

  • मार्च 2023-24 का प्रदेश सरकार का बजट पेश करते हुए प्रदेश के सीएम भूपेश बघेल ने बेरोजगार युवाओं को 2500 रुपए मासिक भत्ता देने की घोषणा की थी। इस योजना का लाभ 18 से 35 साल के बेरोजगार युवाओं को मिल रहा है। जिन्होंने 12 वीं कक्षा पास की हो और उनके पारिवारिक सालाना आय 2.50 लाख से कम है। इस योजना के लिए सरकार ने 250 करोड़ का बजट तक किया है।
  • इसके अलावा भूपेश सरकार ने छत्तीसगढ़ ग्रामीण आवास योजना शुरु की है। इस योजनाओं में ग्रामीण लोगों को पक्के घर मुहैया कराए जाएंगे। जो परिवार पीएम आवास योजना के तहत छूट गए थे, उन्हें इस योजना के दायरे में लाया गया है। ये योजना पीएम आवास योजना के तर्ज पर शुरू की गई है। राज्य सरकार ने इसके लिए 100 करोड़ रुपए का बजट तय किया है। 


ज्यादा कर्ज का राज्यों को ये हो सकता है नुकसान

  1. किसी भी देश या राज्य की अर्थव्यवस्था पर जरूरत से ज्यादा कर्ज भार के कई दुष्परिणाम हो सकते हैं। क्या कारण है कि गुजरात, महाराष्ट्र, कर्नाटक, तमिलनाडु, हरियाणा, पंजाब, केरल, उत्तर प्रदेश देश के विकसित और खुशहाल राज्यों में शामिल हैं। वहीं पश्चिमी बंगाल, छत्तीसगढ़, राजस्थान, बिहार, झारखंड, मध्यप्रदेश पिछड़े राज्यों में शामिल हैं। जरूरत से ज्यादा कर्ज भार कभी भी किसी राज्य को आर्थिक रूप से विकसित नहीं बल्कि दिवालिया बनाता है।
  2. प्रदेश की आर्थिक स्थिति खराब हो सकती है। सरकार को अपने मेंटिनेंस, वेतन, पेंशन, ब्याज आदि के भुगतान के लिए संकट खड़ा हो सकता है।
  3. स्कूल-कॉलेज, अस्पताल, सड़क, पानी, बिजली की व्यवस्थाएं ठप हो सकती हैं।
  4. हाल ही केन्द्र सरकार ने जिस तरह से एनपीएस (न्यू पेंशन स्कीम-2004) का पैसा ओपीएस (ओल्ड पेंशन स्कीम-2022) के तहत (करीब 40,000 करोड़ रुपए) देने से मना किया है, आगे भी बहुत सी मदों में पैसा रोका जा सकता है।


कर्ज और आय में संतुलन जरूरी
जानकारों का कहना है कि उधार लेकर उसे फिर से फ्री की चीजों में बांटा जाएगा तो उस पैसे की वापसी (सरकार को आय-राजस्व) तो कभी होगी ही नहीं। अगले वर्ष फिर सरकार को उधार लेकर छूट-राहत का इंतजाम करना पड़ेगा। यह चक्र निरंतर आगे से आगे चलता ही रहता है। यही दिवालिया होने की तरफ जाने वाला रास्ता होता है। कर्ज और आय में इतना संतुलन जरूर होना चाहिए कि प्रदेश भविष्य में आर्थिक दुष्चक्र में नहीं फंसे।

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