गुजरात में चुनावी उठापटक शुरू, तीन विधायकों के इस्तीफे के बाद कांग्रेस ने बाकियों को रिजॉर्ट में भेजा
गुजरात में राज्यसभा चुनाव की तारीखें नजदीक आने के बाद अब वहां पर राजनीतिक पार्टियों में हलचल तेज हो गई है, साथ ही पार्टी के नेताओं के इस्तीफों का दौर भी शुरू हो गया है। शनिवार को कांग्रेस के तीन और विधायकों द्वारा इस्तीफे के बाद पार्टी हरकत में आई और बाकी के नेताओं की रिजॉर्ट भेज दिया।
गुजरात में चार सीटों के लिए 19 जून को चुनाव होने वाले हैं लेकिन उससे पहले ही कांग्रेस के कई नेताओं ने इस्तीफा दे दिया है, जून में अब तक पार्टी के करीब तीन विधायक ऐसा कर चुके हैं, जिसने पार्टी की चिंता बढ़ा दी है। इसी को देखते हुए कांग्रेस ने किसी भी तरह के दलबदल की संभावना को ध्यान में रखकर अपने बाकी के विधायकों को बचाने के लिए उन्हें रिजॉर्ट में भेज दिया है।
तीन जून को अक्षय पटेल और जीतू चौधरी और पांच जून को बृजेश मेरजा द्वारा इस्तीफा दिए जाने के बाद अब 182 सदस्यों वाले सदन में कांग्रेस की संख्या घटकर 65 हो गई है। कांग्रेस के प्रवक्ता मनीष दोषी के मुताबिक विधायकों को पार्टी हाई कमांड की तरफ से काम ख़त्म कर आनंद, अम्बाजी और राजकोट के रिजॉर्ट में पहुंचने के लिए कहा गया है।
दोषी के मुताबिक यहां कांग्रेस के वरिष्ठ नेता इन सभी विधायकों से राज्यसभा चुनाव और मौजूदा स्थिति के बारे में चर्चा करेंगे। पार्टी प्रवक्ता के अनुसार इन विधायकों को यहां 19 जून तक रखा जा सकता है. इससे पहले मार्च में भी पार्टी के पांच विधायकों द्वारा इस्तीफे के बाद कांग्रेस ने अपने विधायकों को जयपुर के रिजॉर्ट में भेज दिया था।
इन सबके बीच कांग्रेस ने बीजेपी पर विधायकों की खरीद-फरोख्त का आरोप लगाया है।
एक सीट के लिए 36 वोट की जरूरत
चार सीटों पर हो रहे चुनाव में से तीन फिलहाल भाजपा और एक कांग्रेस के पास है। नियमानुसार, राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए उम्मीदवार को एकल हस्तांतरित वोट के तहत 36 वोट की जरूरत है। भाजपा अपने विधायकों के दम पर दो सीटें आसानी से हासिल कर लेगी लेकिन तीसरी सीट के लिए उसे अन्य पार्टी के विधायकों की जरूरत पड़ेगी।
कांग्रेस को बीटीपी, एनसीपी और निर्दलीय विधायकों की मदद से दो सीटें आसानी से जीतने का भरोसा था लेकिन लगातार इस्तीफों से उसकी राह मुश्किल होती जा रही है।
2017 जैसे हालात
राज्य में एक बार फिर 2017 जैसे हालात बनते दिख रहे हैं। उस समय भाजपा ने एक अतिरिक्त उम्मीदवार खड़ा कर कांग्रेस के दिग्गज नेता अहमद पटेल की सीट फंसा दी थी। कांग्रेस के 6 विधायकों ने चुनाव से ठीक पहले इस्तीफा दे दिया था। एक वोट रद्द होने की वजह से किसी तरह अहमद जीत पाए थे लेकिन इसके लिए कांग्रेस को चुनाव आयोग से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक लड़ाई लड़नी पड़ी थी।