फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Election results: Big blow to SP, BSP and AAP before 2024! Now these parties are seeing a path full of hope

Election results: 2024 से पहले लगा सपा, बसपा और आप को बड़ा झटका! अब दिख रहा इन दलों को एक उम्मीदों भरा रास्ता

Mon, 04 Dec 2023 12:57 PM IST
Ashish Tiwari आशीष तिवारी
Updated Mon, 04 Dec 2023 12:57 PM IST
विज्ञापन
सार
सियासी गलियारों में अनुमान यही लगाया जा रहा था, अगर यह राजनीतिक दल किसी भी तरीके से कुछ महत्वपूर्ण सीटों पर हराने-जिताने जैसा बड़ा उलटफेर कर सकेंगे, तो लोकसभा चुनावों के लिहाज से उनकी अहमियत विपक्षी दलों के गठबंधन में ज्यादा हो जाएगी...
loader
Election results: Big blow to SP, BSP and AAP before 2024! Now these parties are seeing a path full of hope
Election results - फोटो : Amar Ujala/Rahul Bisht

विस्तार

चार राज्यों के विधानसभा चुनावों के परिणामों ने बड़े सियासी दलों की परिस्थितियां तो बदल ही दीं, साथ ही साथ उन छोटे दलों की भी दशा और दिशा बदल दी, जो बड़े सियासी उलटफेर का दावा करते थे। समाजवादी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी और आम आदमी पार्टी से लेकर कई अन्य दल मध्यप्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़ और तेलंगाना में बड़े सियासी उलट फेर का दावा कर रहे थे। सियासी गलियारों में अनुमान यही लगाया जा रहा था, अगर यह राजनीतिक दल किसी भी तरीके से कुछ महत्वपूर्ण सीटों पर हराने-जिताने जैसा बड़ा उलटफेर कर सकेंगे, तो लोकसभा चुनावों के लिहाज से उनकी अहमियत विपक्षी दलों के गठबंधन में ज्यादा हो जाएगी। लेकिन चुनाव परिणाम के बाद आई तस्वीर ने सब कुछ साफ कर दिया।

चुनाव आयोग के आंकड़ों के मुताबिक मध्यप्रदेश में समाजवादी पार्टी को 0.46 फीसदी वोट मिले हैं। राजस्थान में समाजवादी पार्टी को महज 0.01 फीसदी वोट मिले। जबकि छत्तीसगढ़ में समाजवादी पार्टी को 0.04 फीसदी वोट मिले। बहुजन समाज पार्टी को मध्यप्रदेश में 3.40 फीसदी वोट मिले। राजस्थान में बहुजन समाज पार्टी को 1.82 फीसदी ही वोट मिले। इसी तरह मध्यप्रदेश में आम आदमी पार्टी को 0.54 फीसदी वोट मिले। जबकि राजस्थान में आम आदमी पार्टी को 0.38 फीसदी मत मिले। वहीं छत्तीसगढ़ में आम आदमी पार्टी को 0.93 फीसदी वोट मिले। मध्यप्रदेश में एआईएमआईएम को महज 0.09 फीसदी मत मिले। जबकि राजस्थान में यह प्रतिशत ओवैसी की पार्टी का महज 0.01 फीसदी ही रहा। हालांकि मध्यप्रदेश में कुल हुए मतदान का तकरीबन एक फीसदी नोटा भी दबा है। जबकि राजस्थान में नोटा का प्रतिशत भी तकरीबन एक फीसदी ही रहा।

सियासी जानकारों का कहना है कि जिस तरीके से समाजवादी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी और आम आदमी पार्टी समेत ओवैसी की पार्टी ने बड़ा माहौल बनाते हुए चुनावी फील्डिंग सजाई थी, वह चुनाव परिणामों में पूरी तरीके से ध्वस्त हो गई। वरिष्ठ पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक बृजेंद्र शुक्ला कहते हैं कि समाजवादी पार्टी का प्रदर्शन तो मध्यप्रदेश में अब तक लड़े गए चुनावों में सबसे बदहाल रहा है। वह  भी तब जब समाजवादी पार्टी के सभी बड़े नेताओं ने मध्यप्रदेश में लगातार कैंप किया और इस बार बीते चुनावों की तुलना में सबसे ज्यादा आक्रामक तरीके से रणनीति बनाई। शुक्ल कहते हैं कि इसके पीछे समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के बीच में हुई सीटों के बंटवारे को लेकर जुबानी जंग और राजनीतिक टशन बड़ी वजह रही। उनका कहना है कि जिस वजह से समाजवादी पार्टी ने मध्यप्रदेश में अपनी आक्रामक नीति अपनाई थी, चुनाव परिणाम और वोट प्रतिशत इस बात की तस्दीक करते हैं कि वह रणनीति समाजवादी पार्टी की पूरी तरह फेल हो गई।

इसी तरह बहुजन समाज पार्टी भी इन चार प्रमुख राज्यों के विधानसभा चुनावों में अपने सबसे बदहाल प्रदर्शन पर पहुंच गई है। चुनाव आयोग के आंकड़े बताते हैं कि 2018 में राजस्थान के विधानसभा चुनाव में चार फीसदी वोटों के साथ मायावती की 6 सीटें विधानसभा में थीं। जबकि इस चुनाव में महज दो सीटें ही मायावती के हिस्से आई हैं, और वोट फीसदी गिरकर 1.82 रह गया है। इसी तरह मध्यप्रदेश में भी 2018 के विधानसभा चुनाव में मायावती 5 फ़ीसदी से ज्यादा वोटों के साथ दो सीटें जीतने में कामयाब रहीं थीं। इस बार मायावती का वोट बैंक खिसक कर 3.40 फीसदी पर रह गया और एक भी सीट नहीं मिली। छत्तीसगढ़ में भी मायावती को पिछले चुनाव में दो सीटें मिली थीं और 3.9 फीसदी वोट प्रतिशत भी था। लेकिन इस बार न तो कोई सीट मिली और वोट प्रतिशत भी कम होकर 2.2 पर पहुंच गया। तेलंगाना में भी बहुजन समाज पार्टी को इस बार भी कोई सीट नहीं मिली और पिछले चुनाव में भी कोई सीट नहीं मिली थी। लेकिन दलितों के वोट बैंक को अपना आधार बनाने वाली मायावती तेलंगाना में पिछले चुनाव में तीन फ़ीसदी की बजाय इस बार के विधानसभा चुनाव में 1.37 फीसदी पर सिमट गई।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि जिस तरीके से समाजवादी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी और एआईएमआईएम समेत आम आदमी पार्टी का प्रदर्शन रहा है, उससे एक बात तो स्पष्ट हो गई है कि भारतीय जनता पार्टी की आंधी में कोई भी दल मजबूती से नहीं टिक सके। वरिष्ठ पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक एस प्रभाकर कहते हैं कि भारतीय जनता पार्टी में जिस तरह से सभी बड़े राजनीतिक दलों और छोटे स्थानीय सियासी दलों के वोट बैंक में सेंधमारी की है। इसी वजह से इन सभी सियासी दलों का यह हाल हुआ है। प्रभाकर कहते हैं कि समाजवादी पार्टी को इस बात का अंदाजा था कि उत्तर प्रदेश से लगती हुई मध्यप्रदेश की बेल्ट में वह अपने पीडीए जैसे फॉर्मूले के साथ कई बड़ी सीटों का सियासी समीकरण बिगाड़ देंगे, लेकिन ऐसा नहीं हो सका।

बहुजन समाज पार्टी ने तो मध्यप्रदेश जैसे राज्यों में वहां की स्थानीय गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के साथ मिलकर आदिवासी और दलितों के सियासी गणित को थामने की कोशिश की। लेकिन भारतीय जनता पार्टी की आंधी में वह भी उड़ गई। प्रभाकर मानते हैं कि आम आदमी पार्टी के प्रमुख बड़े नेताओं के जेल में होने की वजह से उनका सियासी चुनाव मजबूती से आगे नहीं बढ़ सका। हालांकि वह कहते हैं कि दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान इन राज्यों में जाकर सियासी समीकरण साधने की कोशिश तो करते रहे, लेकिन राज्य में मिले वोट प्रतिशत से स्थिति स्पष्ट हो गई कि वहां पर इनका प्रभाव न के बराबर रहा। राजनीतिक विश्लेषण प्रभाकर मानते हैं कि ऐसी दशाओं में अगर यह सभी दल अपने गठबंधन INDIA में मजबूती और ईमानदारी के साथ जुड़े रहे, तभी लोकसभा चुनाव में इनके टिकने की संभावनाएं बनी रह सकती हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

Next Article

Followed