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निर्वाचन आयुक्त राजीव कुमार बोले- मुझे सजा दे दें मगर चुनाव आयोग को संदेहों से मुक्ति दिलाएं
Sat, 08 May 2021 03:40 AM IST
संजीव कुमार झा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: संजीव कुमार झा
Updated Sat, 08 May 2021 03:40 AM IST
सार
कुमार ने अपने हलफनामे में कहा था कि हाल ही में हुए विधानसभा चुनावों के कुछ चरणों को कोरोना महामारी के चलते स्थगित करने से शेष चरणों के चुनाव राष्ट्रपति शासन के तहत कराने की नौबत आ सकती थी
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चुनाव आयुक्त राजीव कुमार
- फोटो : ANI
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विस्तार
निर्वाचन आयुक्त राजीव कुमार ने अपने एक मसौदा हलफनामे में कहा था कि भले ही मुझे सजा दे दें, मगर लोकतंत्र की रक्षा के लिए चुनाव आयोग को संदेहों से मुक्ति दिलाएं। कुमार ने इस हलफनामे को मद्रास हाईकोर्ट और फिर सुप्रीम कोर्ट में पेश करने की योजना बनाई थी। हालांकि, कुछ तकनीकी प्रक्रिया के चलते यह मसौदा दाखिल नहीं किया जा सका था।
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दरअसल, कुमार ने अपने हलफनामे में कहा था कि हाल ही में हुए विधानसभा चुनावों के कुछ चरणों को कोरोना महामारी के चलते स्थगित करने से शेष चरणों के चुनाव राष्ट्रपति शासन के तहत कराने की नौबत आ सकती थी और ऐसा होने पर आयोग पर एक दल के खिलाफ दूसरे दल का पक्ष लेने के आरोप लगते।
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आयोग के सूत्रों ने बताया कि वकील की सलाह के अनुसार कुमार की ओर से अतिरिक्त हलफनामा पेश किया जाना फिलहाल तकनीकी रूप से संभव नहीं था। सूत्रों के मुताबिक, कुमार ने मद्रास हाईकोर्ट की उन टिप्पणियों के जवाब में यह हलफनामा दायर करने की योजना बनाई थी, जिनमें अदालत ने कहा था कि कोविड-19 मामलों में तेजी के लिए आयोग अकेले जिम्मेदार है और उसके जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ हत्या के आरोपों में मामला दर्ज किया जा सकता है।
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कुमार का यह मसौदा हलफनामा आयोग की ओर से मद्रास हाईकोर्ट में पेश अर्जी और हाईकोर्ट की इन टिप्पणियों पर रोक लगाने के लिए सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका का हिस्सा नहीं था। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने आयोग की याचिका को यह कहते हुए खारिज कर दिया था कि हाईकोर्ट की मौखिक टिप्पणियां न्यायिक रिकॉर्ड का हिस्सा नहीं हैं, लिहाजा उन पर रोक लगाने का कोई सवाल पैदा नहीं होता।