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ECI: 'चुनावी कामों के लिए नागरिकता जांचने का हमें अधिकार', एसआईआर पर सुप्रीम कोर्ट में चुनाव आयोग की दलील

Tue, 13 Jan 2026 09:13 PM IST
शुभम कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शुभम कुमार Updated Tue, 13 Jan 2026 09:13 PM IST
सार

मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण पर उठे सवालों के बीच चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में कहा है कि चुनाव और मतदाता सूची से जुड़े मामलों में वही मूल प्राधिकारी है। आयोग ने स्पष्ट किया कि एसआईआर के दौरान नागरिकता जांचने का अधिकार उसे है, लेकिन इसका असर सिर्फ नाम हटाने तक सीमित रहेगा, निर्वासन नहीं होगा।

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Election Commission tells Supreme Court on SIR issue We have the right verify citizenship electoral purposes
चुनाव आयोग - फोटो : PTI

विस्तार

देशभर में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में अपनी दलील पेश की है। आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में दावा किया कि मतदाता सूची और चुनाव संचालन संबंधित मामलों में आयोग मूल प्राधिकारी है और इन उद्देश्यों के लिए उसे लोगों की नागरिकता जांचने का अधिकार है। यही नहीं, किसी व्यक्ति ने अन्य देश की नागरिकता प्राप्त कर ली है तो इस बारे में आयोग की राय राष्ट्रपति के लिए बाध्यकारी होती है।

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आयोग ने यह तर्क इस वजह से सामने रखा क्योंकि देश के कई राज्यों में चल रही मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को चुनौती देने वाले लोगों ने कहा था कि संविधान में आयोग को लोगों की नागरिकता तय करने का अधिकार नहीं दिया गया है।
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सुप्रीम कोर्ट में आयोग की दलील

चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में साफ किया है कि विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान अगर किसी व्यक्ति के खिलाफ प्रतिकूल निष्कर्ष निकलता है, तो उसका असर सिर्फ मतदाता सूची से नाम हटने तक सीमित रहता है। इससे किसी व्यक्ति का अपने आप निर्वासन नहीं होता। आयोग ने कहा कि अगर जांच में नागरिकता से जुड़ी कोई जानकारी सामने आती है, तो उसे केंद्र सरकार को भेजा जा सकता है, ताकि नागरिकता कानूनों के तहत आगे की कार्रवाई हो सके।

इस दौरान चुनाव आयोग ने यह भी बताया कि कई सरकारी और कानूनी प्रक्रियाओं में नागरिकता एक जरूरी शर्त होती है, जैसे खनन पट्टे या अन्य वैधानिक लाभ। ऐसे मामलों में सक्षम अधिकारी नागरिकता की जांच कर सकते हैं। इससे यह साबित होता है कि एसआईआर के दौरान नागरिकता की जांच करना आयोग के अधिकार क्षेत्र से बाहर नहीं है। यह दलील चुनाव आयोग की ओर से वरिष्ठ वकील राकेश द्विवेदी ने मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की पीठ के सामने दी।



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एसआईआर पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई और आयोग का तर्क
बता दें कि सुप्रीम कोर्ट बिहार समेत कई राज्यों में एसआईआर प्रक्रिया को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर अंतिम सुनवाई कर रहा है। इन याचिकाओं में चुनाव आयोग की शक्तियों, नागरिकता और मतदान अधिकार से जुड़े अहम संवैधानिक सवाल उठाए गए हैं। द्विवेदी ने एसआईआर का बचाव करते हुए कहा कि यह प्रक्रिया चुनाव आयोग के संवैधानिक और कानूनी दायित्वों के तहत आती है और इसे एनआरसी जैसी नागरिकता तय करने की प्रक्रिया नहीं कहा जा सकता।

उन्होंने बताया कि चुनाव आयोग की निगरानी में काम करने वाला निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी (ईआरओ) चुनावी उद्देश्यों के लिए सीमित जांच कर सकता है। मतदाता सूची और चुनाव संचालन से जुड़े मामलों में चुनाव आयोग ही अंतिम प्राधिकारी होता है।

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