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EC: चुनाव आयोग ने थरूर को दी चेतावनी, इंटरव्यू में चंद्रशेखर के खिलाफ दिए बयान को बताया आचार संहिता का उल्लंघन
Mon, 15 Apr 2024 09:49 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र
Updated Mon, 15 Apr 2024 09:49 PM IST
सार
आरोप लगाया था कि थरूर ने एक इंटरव्यू में चंद्रशेखर के खिलाफ निराधार आरोप लगाए। इस मामले में थरूर ने चुनाव आयोग से कहा था कि उन्होंने पूरे इंटरव्यू में कहीं भी चंद्रशेखर या उनकी पार्टी के नाम का जिक्र नहीं किया। कांग्रेस नेता ने सफाई में कहा था कि उनका बयान केवल एक सामान्य टिप्पणी था।
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राजीव चंद्रशेखर पर दिए बयान को लेकर घिरे शशि थरूर।
- फोटो : एएनआई
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विस्तार
चुनाव आयोग ने शशि थरूर को प्रतिद्वंद्वी राजीव चंद्रशेखर के खिलाफ एक इंटरव्यू में बयान देने को लेकर चेतावनी दी है। आयोग ने कहा कि इंटरव्यू में भाजपा नेता के खिलाफ कांग्रेस नेता ने अनुचित बयान दिया, जो कि आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन है। थरूर को आगे कथित अपुष्ट आरोप लगाने के खिलाफ चेतावनी दी गई है।
चुनाव आयोग की तरफ से यह चेतावनी भाजपा के चुनाव कानूनी संयोजक और एनडीए की चुनाव समिति के संयोजक की शिकायतों पर आई। इनकी तरफ से आरोप लगाया था कि थरूर ने एक इंटरव्यू में चंद्रशेखर के खिलाफ निराधार आरोप लगाए। इस मामले में थरूर ने चुनाव आयोग से कहा था कि उन्होंने पूरे इंटरव्यू में कहीं भी चंद्रशेखर या उनकी पार्टी के नाम का जिक्र नहीं किया। कांग्रेस नेता ने सफाई में कहा था कि उनका बयान केवल एक सामान्य टिप्पणी था।
उनके दावे से असहमति जताते हुए निर्वाचन आयोग ने कहा कि उनका तर्क सही नहीं है। चुनाव आयोग ने कहा, "साक्षात्कार में लगाए गए आरोप राजीव चंद्रशेखर पर केंद्रित थे। कोई भी समझदार व्यक्ति साक्षात्कार से यह निष्कर्ष निकाल सकता है कि आरोप राजीव चंद्रशेखर पर लगाए गए थे।" आयोग ने कहा कि थरूर ने चंद्रशेखर के खिलाफ दिए गए बयानों को लेकर कोई सबूत पेश नहीं किया। ईसी ने कहा, "आरोपों की गंभीरता को देखते हुए, ऐसा बयान गैरजरूरी है और यह आदर्श आचार संहिता (एमसीसी) का उल्लंघन है।’’
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हालांकि, चुनाव आयोग ने माना कि यह साबित नहीं किया जा सकता कि थरूर ने अपने बयानों के माध्यम से जाति, सांप्रदायिक या धार्मिक भावनाओं को लेकर टिप्पणी की। 12 अप्रैल के अपने आदेश में आयोग ने कहा, "बयान सामान्य थे और इन्हें ऐसी भावनाओं को लक्षित करने का इरादा नहीं बताया जा सकता। शशि थरूर को एमसीसी (चुनाव आचार संहिता) के उल्लंघन के मद्देनजर भविष्य में अपुष्ट आरोप न लगाने की सख्त चेतावनी दी जाती है।"
आयोग ने साक्षात्कार लेने वाले टीवी चैनल को भी निर्देश दिया कि आदर्श आचार संहिता लागू रहने तक साक्षात्कार के विवादित हिस्से का प्रसारण न किया जाए। बता दें कि इस मामले में केंद्रीय राज्य मंत्री चंद्रशेखर पहले ही थरूर को कानूनी नोटिस भेज चुके हैं। नोटिस में कहा गया है कि थरूर छह अप्रैल को चंद्रशेखर के खिलाफ लगाए गए सभी आरोपों को वापस लें और मीडिया पर उनसे बिना शर्त सार्वजनिक माफी मांगें।
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चुनाव आयोग की तरफ से यह चेतावनी भाजपा के चुनाव कानूनी संयोजक और एनडीए की चुनाव समिति के संयोजक की शिकायतों पर आई। इनकी तरफ से आरोप लगाया था कि थरूर ने एक इंटरव्यू में चंद्रशेखर के खिलाफ निराधार आरोप लगाए। इस मामले में थरूर ने चुनाव आयोग से कहा था कि उन्होंने पूरे इंटरव्यू में कहीं भी चंद्रशेखर या उनकी पार्टी के नाम का जिक्र नहीं किया। कांग्रेस नेता ने सफाई में कहा था कि उनका बयान केवल एक सामान्य टिप्पणी था।
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उनके दावे से असहमति जताते हुए निर्वाचन आयोग ने कहा कि उनका तर्क सही नहीं है। चुनाव आयोग ने कहा, "साक्षात्कार में लगाए गए आरोप राजीव चंद्रशेखर पर केंद्रित थे। कोई भी समझदार व्यक्ति साक्षात्कार से यह निष्कर्ष निकाल सकता है कि आरोप राजीव चंद्रशेखर पर लगाए गए थे।" आयोग ने कहा कि थरूर ने चंद्रशेखर के खिलाफ दिए गए बयानों को लेकर कोई सबूत पेश नहीं किया। ईसी ने कहा, "आरोपों की गंभीरता को देखते हुए, ऐसा बयान गैरजरूरी है और यह आदर्श आचार संहिता (एमसीसी) का उल्लंघन है।’’
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हालांकि, चुनाव आयोग ने माना कि यह साबित नहीं किया जा सकता कि थरूर ने अपने बयानों के माध्यम से जाति, सांप्रदायिक या धार्मिक भावनाओं को लेकर टिप्पणी की। 12 अप्रैल के अपने आदेश में आयोग ने कहा, "बयान सामान्य थे और इन्हें ऐसी भावनाओं को लक्षित करने का इरादा नहीं बताया जा सकता। शशि थरूर को एमसीसी (चुनाव आचार संहिता) के उल्लंघन के मद्देनजर भविष्य में अपुष्ट आरोप न लगाने की सख्त चेतावनी दी जाती है।"
आयोग ने साक्षात्कार लेने वाले टीवी चैनल को भी निर्देश दिया कि आदर्श आचार संहिता लागू रहने तक साक्षात्कार के विवादित हिस्से का प्रसारण न किया जाए। बता दें कि इस मामले में केंद्रीय राज्य मंत्री चंद्रशेखर पहले ही थरूर को कानूनी नोटिस भेज चुके हैं। नोटिस में कहा गया है कि थरूर छह अप्रैल को चंद्रशेखर के खिलाफ लगाए गए सभी आरोपों को वापस लें और मीडिया पर उनसे बिना शर्त सार्वजनिक माफी मांगें।