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चुनाव आयोग ने वीवीपीएटी मशीन में खामियों के आरोप को किया खारिज
ब्यूरो/ अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Wed, 19 Sep 2018 05:52 AM IST
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वीवीपीएटी
चुनाव आयोग ने कहा है कि वह कांग्रेस या उसके नेताओं की मर्जी के मुताबिक देश में चुनाव कराने के लिए बाध्य नहीं है। आयोग ने मंगलवार को कहा कि वह एक संवैधानिक संस्था है और उसे नियमों के तहत काम करना होता है न कि राजनीतिक दलों के निर्देशों पर।
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कांग्रेस नेता कमलनाथ की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दायर कर आयोग ने कहा कि वह याचिकाकर्ता व उनकी पार्टी के क्षेत्राधिकार से बाहर है। आयोग ने कहा कि कमलनाथ या उनकी पार्टी एक ही मसले को लेकर बार-बार अदालत का दरवाजा खटखटाए और वह सांविधानिक अथॉरिटी के कार्यकलापों पर दखल नहीं दे सकते।
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आयोग ने कहा कि कमलनाथ और उनकी पार्टी अदालत को चुनाव आयोग को किसी खास तरीके से चुनाव कराने का निर्देश देने के लिए नहीं कह सकते। चाहे वह वीवीपीएटी से संबंधित हो या किसी और मामले से। आयोग ने कमलनाथ की याचिका को झूठ पर आधारित बताया। आयोग ने इस याचिका को खारिज करने का आग्रह करते हुए कहा कि उसे याचिकाकर्ता व उनकी पार्टी के सभी सुझावों को मानने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता। आयोग ने कहा कि इस याचिका को न केवल खारिज किया जाना चाहिए, बल्कि जुर्माना भी लगाया जाना चाहिए।
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‘आयोग अपनी भूमिका को लेकर हमेशा सचेत’
आयोग ने कहा कि वह अपनी भूमिका और कार्यों को लेकर सदैव सचेत है। यहीं कारण है कि ईवीएम की सुरक्षा व उसकी खरीद, वीवीपीएटी की प्रिंटिंग, मशीन का मॉक टेस्ट, अधिकारियों की तैनाती को लेकर जरूरी निर्देश जारी करता रहता है। आयोग ने मध्यप्रदेश में मतदाताओं के नामों के दोहराव के आरोप को खारिज कर दिया। दरअसल कमलनाथ ने अपनी याचिका में आरोप लगाया है कि राज्य की मतदाता सूची में करीब 60 लाख फर्जी मतदाता हैं।