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लोकसभा चुनाव के साथ जम्मू कश्मीर विधानसभा चुनाव कराने की तैयारी में निर्वाचन आयोग
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Fri, 30 Nov 2018 12:00 AM IST
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governor satyapal malik
- फोटो : बासित जरगर
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निर्वाचन आयोग जम्मू कश्मीर विधानसभा चुनाव अगले वर्ष प्रस्तावित लोकसभा चुनाव के साथ कराने की तैयारी में है। उच्च पदस्थ सूत्रों ने गुरुवार को यह जानकारी दी। चुनाव आयोग आगामी 21 मई से पहले जम्मू-कश्मीर में विधानसभा चुनाव आयोजित करा सकता है।
राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने 21 नवम्बर को "राज्य में नाजुक सुरक्षा परिदृश्य" और राजनीतिक दलों के विरोध के बीच स्थिर सरकार बनाने की असंभवता का हवाला देते हुए राज्य विधानसभा भंग कर दी थी। उच्चतम न्यायालय के एक निर्देश का उल्लेख करते हुए सूत्रों ने बताया कि विधानसभा भंग होने के बाद नए चुनाव छह माह के भीतर कराने होते हैं।
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राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने 21 नवम्बर को "राज्य में नाजुक सुरक्षा परिदृश्य" और राजनीतिक दलों के विरोध के बीच स्थिर सरकार बनाने की असंभवता का हवाला देते हुए राज्य विधानसभा भंग कर दी थी। उच्चतम न्यायालय के एक निर्देश का उल्लेख करते हुए सूत्रों ने बताया कि विधानसभा भंग होने के बाद नए चुनाव छह माह के भीतर कराने होते हैं।
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जम्मू कश्मीर के लिए ये अवधि अगले वर्ष 21 मई तक है। उच्चतम न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि चुनाव आयोग को पहले उपलब्ध अवसर पर चुनाव कराने चाहिए। इसलिए ऐसी संभावनाएं बन रही हैं कि जम्मू कश्मीर विधानसभा चुनाव लोकसभा चुनावों के साथ कराये जा सकते हैं।
जम्मू कश्मीर विधानसभा का कार्यकाल छह वर्ष का होता है जबकि अन्य विधानसभाओं और लोकसभा का कार्यकाल पांच वर्ष का होता है। इस बीच सरकार के सूत्रों ने बताया कि जब राज्य में लोकसभा चुनाव के लिए सुरक्षा बल तैनात किये जाते हैं तब चुनाव अधिकारियों के लिए विधानसभा चुनाव एक साथ कराना सुविधाजनक रहेगा।
जम्मू कश्मीर विधानसभा का कार्यकाल छह वर्ष का होता है जबकि अन्य विधानसभाओं और लोकसभा का कार्यकाल पांच वर्ष का होता है। इस बीच सरकार के सूत्रों ने बताया कि जब राज्य में लोकसभा चुनाव के लिए सुरक्षा बल तैनात किये जाते हैं तब चुनाव अधिकारियों के लिए विधानसभा चुनाव एक साथ कराना सुविधाजनक रहेगा।
पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) की नेता महबूबा मुफ्ती ने नेशनल कांफ्रेंस और कांग्रेस के समर्थन से सरकार बनाने का दावा पेश किया था। उन्होंने 87 सदस्यीय सदन में कुल 56 विधायकों के समर्थन का दावा किया था। लेकिन महबूबा के दावा पेश करने के तुरन्त बाद मलिक ने विधानसभा भंग कर दी थी।
दो सदस्यों वाली पीपुल्स कांफ्रेंस के सज्जाद लोन ने भी सरकार बनाने का दावा पेश किया था। लोन ने भारतीय जनता पार्टी और अन्य पार्टियों के 18 विधायकों के समर्थन से यह दावा पेश किया था। ज्ञात हो पीडीपी के साथ भाजपा ने अपना गठबंधन समाप्त कर लिया था जिसके बाद राज्य में जून से राज्यपाल शासन लागू था।
दो सदस्यों वाली पीपुल्स कांफ्रेंस के सज्जाद लोन ने भी सरकार बनाने का दावा पेश किया था। लोन ने भारतीय जनता पार्टी और अन्य पार्टियों के 18 विधायकों के समर्थन से यह दावा पेश किया था। ज्ञात हो पीडीपी के साथ भाजपा ने अपना गठबंधन समाप्त कर लिया था जिसके बाद राज्य में जून से राज्यपाल शासन लागू था।