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सोशल मीडिया पर चुनाव आयोग ने केंद्र से मांगा अधिकार
Thu, 07 Feb 2019 09:40 PM IST
Avdhesh Kumar
पीयूष पांडेय, नई दिल्ली
पीयूष पांडेय, नई दिल्ली
Published by: Avdhesh Kumar
Updated Thu, 07 Feb 2019 09:40 PM IST
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चुनाव आयोग
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सोशल मीडिया का गलत इस्तेमाल कर चुनाव प्रक्रिया को प्रभावित करने के मामले पर निर्वाचन आयोग ने केंद्र सरकार से कार्रवाई का अधिकार देने को कहा है। उसने सूचना एवं प्रौद्योगिकी (आईटी) अधिनियम की धारा 79 के संशोधन में आयोग के निर्देशों और चुनाव कानून का उल्लेख करने को कहा है। ताकि उल्लंघन होने पर आयोग सीधे तौर पर कदम उठा सके और निवार्चन कानूनके तहत कार्रवाई कर सके।
निवार्चन आयोग ने सोशल मीडिया को सुरक्षित बनाने के लिए आईटी मंत्रालय द्वारा तैयार किए जा रहे इंटरमीडिएटरी नियमों में अपनी राय दी है। मंत्रालय ने नियमों का मसौदा पिछले साल जारी किया था। मंत्रालय द्वारा इंटरमीडिएटरी नियमों के लिए आईटी एक्ट की धारा-79 में संशोधन किया जाएगा। आयोग ने इसी में चुनावी कानून के उल्लंघन का उल्लेख करने को कहा है।
मौजूदा समय सोशल मीडिया केखिलाफ सीधे तौर पर चुनाव आयोग सीधे तौर पर कदम नहीं उठा सकता है। इसके मद्देनजर आयोग ने फेसबुक, ट्विटर जैसे सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर आचार संहिता लागू करना तय किया था। उसका मकसद देश की चुनावी प्रक्रिया को सोशल मीडिया के प्रभाव से बचाना है। याद रहे कि फेसबुक डेटा लीक मामला सामाने आने के बाद आयोग इस मामले में सतर्क हो गया था। फेसबुक डेटा लीक का मामला कैंब्रिज एनालिटिका के एक प्रतिनिधि द्वारा किए गए खुलासे के बादसामने आया था।
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आईटी मंत्रालय द्वारा जारी इंटरमीडिएटरी नियमों के मसौदे में कहा गया था कि उल्लंघन से जुड़े किसी भी मामले में सोशल मीडिया कंपनियों को 72 घंटे के अंदर सरकार के सवालों का जवाब देना होगा। इसके लिए कंपनियों को नोडल अधिकारियों की नियुक्ति करनी होगी और नोडल अधिकारी की जिम्मेदारी कंपनी के प्रति (24*7) हर पल अपडेट होने वाले संदेशों पर होगी।
मसौदे में कहा गया है कि कंपनियों को मैसेज का एनक्रिप्शन (एक से दूसरे सिरे तक संरक्षित) सरकार को देना होगा। निर्वाचन आयोग के निर्देश और चुनावी कानून का उल्लेख अगर संशोधन में शामिल किया जाता है तो आयोग किसी भी मामले में कदम उठाने का अधिकारी होगा। ऐसे में चुनाव के दौरान राजनीतिक हितों को साध रहे दल और उम्मीदवार को चेतावनी, कार्रवाई और आपराधिक मामला दर्ज कराने का अधिकार भी आयोग के पास होगा।
नियमों के मसौदे में कहा है कि देश के किसी भी कानून का उल्लंघन करने वाला, उत्पीड़न करने वाला, देश की एकता-अखंडता या सौहार्द को नुकसान पहुंचाने वाला और आपत्तिजनक या अश्लील सामग्री का सोशल मीडिया में पोस्ट प्रतिबंधित होगा। सरकार का मानना है कि इसके जरिए व्हाट्सऐप, फेसबुक और ट्विटर जैसे सोशल मीडया प्लेटफार्म पर आने वाले भड़काऊ, फर्जी संदेशों या खबरों पर पूरी तरह से रोक लगेगी।
गौरतब है कि आयोग के अलावा नैस्कॉम, विप्रो, सीआईआई, फिक्की और सीओएआई ने इन नियमों पर अपनी राय दी है। सरकार ने विभिन्न पक्षों की राय पर 14 फरवरी तक प्रति-उत्तर मांगे है।
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निवार्चन आयोग ने सोशल मीडिया को सुरक्षित बनाने के लिए आईटी मंत्रालय द्वारा तैयार किए जा रहे इंटरमीडिएटरी नियमों में अपनी राय दी है। मंत्रालय ने नियमों का मसौदा पिछले साल जारी किया था। मंत्रालय द्वारा इंटरमीडिएटरी नियमों के लिए आईटी एक्ट की धारा-79 में संशोधन किया जाएगा। आयोग ने इसी में चुनावी कानून के उल्लंघन का उल्लेख करने को कहा है।
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मौजूदा समय सोशल मीडिया केखिलाफ सीधे तौर पर चुनाव आयोग सीधे तौर पर कदम नहीं उठा सकता है। इसके मद्देनजर आयोग ने फेसबुक, ट्विटर जैसे सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर आचार संहिता लागू करना तय किया था। उसका मकसद देश की चुनावी प्रक्रिया को सोशल मीडिया के प्रभाव से बचाना है। याद रहे कि फेसबुक डेटा लीक मामला सामाने आने के बाद आयोग इस मामले में सतर्क हो गया था। फेसबुक डेटा लीक का मामला कैंब्रिज एनालिटिका के एक प्रतिनिधि द्वारा किए गए खुलासे के बादसामने आया था।
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आईटी मंत्रालय द्वारा जारी इंटरमीडिएटरी नियमों के मसौदे में कहा गया था कि उल्लंघन से जुड़े किसी भी मामले में सोशल मीडिया कंपनियों को 72 घंटे के अंदर सरकार के सवालों का जवाब देना होगा। इसके लिए कंपनियों को नोडल अधिकारियों की नियुक्ति करनी होगी और नोडल अधिकारी की जिम्मेदारी कंपनी के प्रति (24*7) हर पल अपडेट होने वाले संदेशों पर होगी।
मसौदे में कहा गया है कि कंपनियों को मैसेज का एनक्रिप्शन (एक से दूसरे सिरे तक संरक्षित) सरकार को देना होगा। निर्वाचन आयोग के निर्देश और चुनावी कानून का उल्लेख अगर संशोधन में शामिल किया जाता है तो आयोग किसी भी मामले में कदम उठाने का अधिकारी होगा। ऐसे में चुनाव के दौरान राजनीतिक हितों को साध रहे दल और उम्मीदवार को चेतावनी, कार्रवाई और आपराधिक मामला दर्ज कराने का अधिकार भी आयोग के पास होगा।
नियमों के मसौदे में कहा है कि देश के किसी भी कानून का उल्लंघन करने वाला, उत्पीड़न करने वाला, देश की एकता-अखंडता या सौहार्द को नुकसान पहुंचाने वाला और आपत्तिजनक या अश्लील सामग्री का सोशल मीडिया में पोस्ट प्रतिबंधित होगा। सरकार का मानना है कि इसके जरिए व्हाट्सऐप, फेसबुक और ट्विटर जैसे सोशल मीडया प्लेटफार्म पर आने वाले भड़काऊ, फर्जी संदेशों या खबरों पर पूरी तरह से रोक लगेगी।
गौरतब है कि आयोग के अलावा नैस्कॉम, विप्रो, सीआईआई, फिक्की और सीओएआई ने इन नियमों पर अपनी राय दी है। सरकार ने विभिन्न पक्षों की राय पर 14 फरवरी तक प्रति-उत्तर मांगे है।