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फरवरी में घोषित हो सकती है पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव की तारीखें
Sun, 10 Jan 2021 05:12 AM IST
देव कश्यप
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
Published by: देव कश्यप
Updated Sun, 10 Jan 2021 05:12 AM IST
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Election commission
- फोटो : social media
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निर्वाचन आयोग फरवरी में पांच राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनाव की तारीखों की घोषणा कर सकता है। सूत्रों के मुताबिक, आयोग मई में 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षाओं के चलते अप्रैल तक इन राज्यों में चुनाव कराना चाहता है। आयोग 15 जनवरी को अंतिम मतदाता सूची जारी करेगा और इसके बाद कभी भी तारीखों का एलान हो सकता है।
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पश्चिम बंगाल, असम, केरल, तमिलनाडु और पुडुचेरी की विधानसभाओं का कार्यकाल मई-जून में पूरा होगा। लेकिन परीक्षाओं को देखते हुए आयोग समय से पहले चुनाव करा सकता है। चुनाव समय से पहले कराने की एक और वजह पश्चिम बंगाल और असम में चुनावी हिंसा का इतिहास भी है।
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आयोग के सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, केंद्रीय बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन द्वारा मई में कक्षा 10 और 12 की बोर्ड परीक्षा कराने की घोषणा के बाद अप्रैल और मई में परीक्षा के साथ चुनाव संभव नहीं है। इसलिए इन राज्यों में आयोग को समस्त चुनावी गतिविधियों को अप्रैल तक समाप्त करना होगा।
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इन राज्यों में बड़े पैमाने सीबीएसई के विद्यार्थी हैं। इसमें अकेले केरल में 1.86 लाख बच्चें इस माध्यम से पढ़ाई कर रहें हैं। वही पश्चिम बंगाल में 260 स्कूल हैं। तमिलनाडु में 642 सीबीएसई माध्यम से पढ़ाई कराने वाले स्कूल हैं। असम में 232 और पुडुचेरी में 30 स्कूल हैं। ऐसे में यदि मई-जून में चुनाव होते हैं बच्चों के साथ प्रशासन की सिरदर्दी बढ़ेगी। इस दौरान प्रचार भी प्रभावित होगा क्योंकि लाउडस्पीकर पर पाबंदी रहेगी। ऐसे में आयोग के सामने तय समय से पहले चुनाव का विकल्प है।
देश के सांस्कृतिक और पर्यटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण राज्यों पश्चिम बंगाल, असम, केरल, तमिलनाडु और पुडुचेरी की विधानसभाओं का कार्यकाल मई जून में समाप्त हो रहा है। ऐसे में चुनाव आयोग के सामने कोरोना संक्रमण के साथ इन राज्यों में समय से पहले चुनाव कराने की एक वजह पश्चिम बंगाल और केरल में चुनावी हिंसा का इतिहास है।
पश्चिम बंगाल में 2016 के चुनावों में मतदान की शुरुआत चार अप्रैल से होकर 19 मई तक चली थी। राज्य में 2018 पंचायत चुनावों में यहां बड़े पैमाने पर हिंसा हुई थी। इसलिए भाजपा सरीखे राजनीतिक दलों ने यहां विधानसभा चुनाव में हिंसा की संभावना जताई है।