{"_id":"5ac47ee34f1c1bbf618b557a","slug":"election-commission-has-filed-an-affidavit-on-one-candidate-one-seat-before-supreme-court","type":"story","status":"publish","title_hn":"'एक सीट एक उम्मीदवार' मामले पर चुनाव आयोग पहुंचा सुप्रीम कोर्ट","category":{"title":"India News","title_hn":"भारत","slug":"india-news"}}
'एक सीट एक उम्मीदवार' मामले पर चुनाव आयोग पहुंचा सुप्रीम कोर्ट
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Wed, 04 Apr 2018 06:19 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
निर्वाचन आयोग ने कहा है कि वह एक उम्मीदवार द्वारा एक से अधिक सीट से चुनाव लड़ने के पक्ष में नहीं है। आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में दायर उस जनहित याचिका का समर्थन किया है जिसमें एक उम्मीदवार द्वारा एक से अधिक सीट से चुनाव लडने पर रोक लगाने की गुहार की गई है। मालूम हो कि वर्तमान प्रावधान के तहत एक उम्मीदवार दो सीटों से चुनाव लड़ सकता है।
बुधवार को चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष निर्वाचन आयोग की ओर से पेश वकील ने हलफनामा पेश किया। इस मसले पर केंद्र सरकार को अभी अपना पक्ष रखना है। केंद्र सरकार ने अपना पक्ष रखने के लिए पीठ से और वक्त देने की गुहार की, जिस पर पीठ ने सुनवाई छह हफ्ते के लिए टाल दी। अपने हलफनामे में निर्वाचन आयोग ने कहा है कि उम्मीदवारों पर एक से अधिक सीट से लड़ने पर पाबंदी होनी चाहिए।
इसके लिए जन प्रतिनिधि कानून में संशोधन किया जाना चाहिए। आयोग ने बताया कि वर्ष 2004 और 2016 में केंद्र सरकार को भेजे अपने प्रस्ताव में उसने अपना यह रुख स्पष्ट किया था। आयोग ने कहा है कि एक उम्मीदवार का दो सीटों से चुनाव लड़ने से सरकारी पैसे का बेवजह नुकसान होता है। आयोग ने कहा कि यह मतदाताओं के साथ अन्याय है कि विजयी उम्मीदवार एक सीट खाली कर ले और दूसरी सीट पर बने रहे। आयोग ने कहा कि उसके इस रुख का समर्थन विधि आयोग ने अपनी 255वीं रिपोर्ट में किया है।
विज्ञापन
खर्च वहन करे सीट छोड़ने वाला उम्मीदवार
आयोग ने कहा कि अगर सुप्रीम कोर्ट को यह लगता है कि इस तरह की पाबंदी की दरकार नहीं है तो उसे यह कहना चाहिए कि जन प्रतिनिधि कानून में यह प्रावधान हो कि सीट छोड़ने वाले विजयी उम्मीदवार को फिर से होने वाले चुनाव का खर्च वहन करना होगा। आयोग ने वर्ष 2004 में प्रस्ताव दिया था कि विधानसभा सीट छोड़ने वाले उम्मीदवार से पांच लाख और लोकसभा सीट छोड़ने वाले उम्मीदवार से 10 लाख रुपये लिया जाना चाहिए। आयोग ने यह जवाब भाजपा नेता अश्विनी उपाध्याय की याचिका पर दिया है।
विज्ञापन
बुधवार को चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष निर्वाचन आयोग की ओर से पेश वकील ने हलफनामा पेश किया। इस मसले पर केंद्र सरकार को अभी अपना पक्ष रखना है। केंद्र सरकार ने अपना पक्ष रखने के लिए पीठ से और वक्त देने की गुहार की, जिस पर पीठ ने सुनवाई छह हफ्ते के लिए टाल दी। अपने हलफनामे में निर्वाचन आयोग ने कहा है कि उम्मीदवारों पर एक से अधिक सीट से लड़ने पर पाबंदी होनी चाहिए।
विज्ञापन
इसके लिए जन प्रतिनिधि कानून में संशोधन किया जाना चाहिए। आयोग ने बताया कि वर्ष 2004 और 2016 में केंद्र सरकार को भेजे अपने प्रस्ताव में उसने अपना यह रुख स्पष्ट किया था। आयोग ने कहा है कि एक उम्मीदवार का दो सीटों से चुनाव लड़ने से सरकारी पैसे का बेवजह नुकसान होता है। आयोग ने कहा कि यह मतदाताओं के साथ अन्याय है कि विजयी उम्मीदवार एक सीट खाली कर ले और दूसरी सीट पर बने रहे। आयोग ने कहा कि उसके इस रुख का समर्थन विधि आयोग ने अपनी 255वीं रिपोर्ट में किया है।
विज्ञापन
खर्च वहन करे सीट छोड़ने वाला उम्मीदवार
आयोग ने कहा कि अगर सुप्रीम कोर्ट को यह लगता है कि इस तरह की पाबंदी की दरकार नहीं है तो उसे यह कहना चाहिए कि जन प्रतिनिधि कानून में यह प्रावधान हो कि सीट छोड़ने वाले विजयी उम्मीदवार को फिर से होने वाले चुनाव का खर्च वहन करना होगा। आयोग ने वर्ष 2004 में प्रस्ताव दिया था कि विधानसभा सीट छोड़ने वाले उम्मीदवार से पांच लाख और लोकसभा सीट छोड़ने वाले उम्मीदवार से 10 लाख रुपये लिया जाना चाहिए। आयोग ने यह जवाब भाजपा नेता अश्विनी उपाध्याय की याचिका पर दिया है।