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चुनाव आयोग ने वोटरों को दिया बड़ा ‘हथियार’, आचार संहिता का उल्लंघन हुआ तो शिकंजा कसेगी जनता
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Sun, 16 Sep 2018 11:11 PM IST
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मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान, मिजोरम और तेलंगाना राज्यों के विधान चुनावों से पहले चुनाव आयोग ने मतदाताओं को एक बड़ा हथियार दिया है। अगर कोई राजनीतिक दल या उम्मीदवार चुनावों के दौरान चुनाव आचार संहिता का उल्लंघन करता है, तो वोटर उसकी सीधे शिकायत कर सकता है। आयोग ने ऐसे मामलों की सीधी शिकायत करने के लिए एक मोबाइल एप लांच की है।
चुनाव आयोग के मुताबिक C-Vigil (सी-विजिल) मोबाइल एप्लीकेशन के जरिए मतदाता सीधे चुनाव आयोग को शिकायत कर सकता है। मोबाइल में ऐसी व्यवस्था है कि आम मतदाता भी चुनाव आचार संहिता के उल्लंघन का वीडियो या फोटो क्लिक करके संबंधित चुनाव अधिकारियों को भेज सकता है। साथ ही, मोबाइल एप में यह भी सुविधा है कि फोटो या वीडियो भेजते वक्त लोकेशन की सही-सही लॉन्गिट्यूड और लैटिट्यूड की सूचना भी भेज देगी।
आयोग का कहना है कि एप से फोटो या वीडियो भेजने के बाद शिकायकर्ता को उसकी शिकायत पर 100 मिनट के भीतर जानकारी भी दी जाएगी। जैसे ही शिकायतकर्ता की शिकायत संबंधित रिटर्निंग अधिकारी के मेल पर आएगी, उप निर्वाचन अधिकारी उसे वैरिफाई करके कुछ ही मिनटों में एफआईआर दर्ज करवा देगा। हालांकि इस एप का पायलेट प्रोजेक्ट कर्नाटक विधानसभा चुनावों के दौरान बंगलुरू शहर में लॉन्च किया गया था, लेकिन आगामी विधानसभा और लोकसभा चुनावों को देखते हुए इसे सभी के लिए लॉन्च किया गया है।
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आयोग के मुताबिक इस मोबाइल एप्लीकेशन को गूगल प्ले स्टोर और चुनाव आयोग की वेबसाइट से डाउनलोड किया जा सकता है। आयोग का कहा है कि यह मोबाइल एप केवल उन्हीं निर्वाचन क्षेत्रों या राज्यों में काम करेगी, जहां चुनाव प्रस्तावित हैं। आयोग की सोच है कि चुनाव आचार संहिता का उल्लंघन करने से रोकने के लिए जनता को ताकत दी जाए।
साथ ही एप में यह भी विकल्प है कि अगर शिकायतकर्ता अपना नाम और मोबाइल नंबर छुपाना चाहता है, तो वह एप में विकल्प पर टिक करके इसे चुन सकता है। अगर कोई किसी ताकतवर राजनीतिज्ञ की शिकायत करना चाहता है, लेकिन उसे डर है कि कोई बाद उसका उत्पीड़न कर सकता, तो इस विकल्प को चुन कर वह अपनी पहचान छुपा सकता है।
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चुनाव आयोग के मुताबिक C-Vigil (सी-विजिल) मोबाइल एप्लीकेशन के जरिए मतदाता सीधे चुनाव आयोग को शिकायत कर सकता है। मोबाइल में ऐसी व्यवस्था है कि आम मतदाता भी चुनाव आचार संहिता के उल्लंघन का वीडियो या फोटो क्लिक करके संबंधित चुनाव अधिकारियों को भेज सकता है। साथ ही, मोबाइल एप में यह भी सुविधा है कि फोटो या वीडियो भेजते वक्त लोकेशन की सही-सही लॉन्गिट्यूड और लैटिट्यूड की सूचना भी भेज देगी।
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आयोग का कहना है कि एप से फोटो या वीडियो भेजने के बाद शिकायकर्ता को उसकी शिकायत पर 100 मिनट के भीतर जानकारी भी दी जाएगी। जैसे ही शिकायतकर्ता की शिकायत संबंधित रिटर्निंग अधिकारी के मेल पर आएगी, उप निर्वाचन अधिकारी उसे वैरिफाई करके कुछ ही मिनटों में एफआईआर दर्ज करवा देगा। हालांकि इस एप का पायलेट प्रोजेक्ट कर्नाटक विधानसभा चुनावों के दौरान बंगलुरू शहर में लॉन्च किया गया था, लेकिन आगामी विधानसभा और लोकसभा चुनावों को देखते हुए इसे सभी के लिए लॉन्च किया गया है।
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आयोग के मुताबिक इस मोबाइल एप्लीकेशन को गूगल प्ले स्टोर और चुनाव आयोग की वेबसाइट से डाउनलोड किया जा सकता है। आयोग का कहा है कि यह मोबाइल एप केवल उन्हीं निर्वाचन क्षेत्रों या राज्यों में काम करेगी, जहां चुनाव प्रस्तावित हैं। आयोग की सोच है कि चुनाव आचार संहिता का उल्लंघन करने से रोकने के लिए जनता को ताकत दी जाए।
साथ ही एप में यह भी विकल्प है कि अगर शिकायतकर्ता अपना नाम और मोबाइल नंबर छुपाना चाहता है, तो वह एप में विकल्प पर टिक करके इसे चुन सकता है। अगर कोई किसी ताकतवर राजनीतिज्ञ की शिकायत करना चाहता है, लेकिन उसे डर है कि कोई बाद उसका उत्पीड़न कर सकता, तो इस विकल्प को चुन कर वह अपनी पहचान छुपा सकता है।