वोटिंग वाले दिन सोशल मीडिया पर प्रचार पड़ेगा महंगा, चुनाव आयोग ने फेसबुक, ट्विटर को लिखा पत्र
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चुनाव आचार संहिता लागू होने के बावजूद राजनीतिक दलों द्वारा वोटिंग के दौरान सोशल मीडिया पर अपने पक्ष वोटिंग करने की अपील को लेकर चुनाव आयोग ने गंभीरता से लिया है। आयोग के मुताबिक उन्होंने ऐसे मामलों पर संज्ञान लेते हुए कार्रवाई करने के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को पत्र लिखा है।
मुख्य निर्वाचन आयोग के महानिदेशक (एक्सपेंडेचर) धीरेंद्र कुमार ओझा ने अमर उजाला को बताया कि वोटिंग के दिन सोशल मीडिया पर राजनीतिक दलों द्वारा ओपिनियन पोल दिखाने और मतदाताओं से अपने पक्ष में मतदान की अपील करने को लेकर कई शिकायतें मिली थीं। जिसके बाद मुख्य निर्वाचन आयोग ने शिकायतों पर संज्ञान लेते हुए बुधवार को ही सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स फेसबुक और ट्विटर को पत्र लिखा है।
वोट मांगने के लिए एसएमएस का प्रयोग भी नियम विरुद्ध
ओझा ने बताया कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को लिखे पत्र में उन्होंने जन प्रतिनिधित्व कानून की धारा 126 के प्रावधानों के बारे में जानकारी दी है। साथ ही कहा है कि धारा 126 के तहत सुनिश्चित करें कि सोशल मीडिया पर इस तरह का प्रचार न हो और उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।
उन्होंने बताया कि चुनाव आचार संहिता लागू होने के बाद वोटिंग से 48 घंटे पहले टीवी, अखबार या किसी अन्य समकक्ष माध्यम पर ओपिनियन पोल या एग्जिट पोल दिखाने पर पूर्णतया प्रतिबंध है। वहीं अगर कई चरणों में कई राज्यों में चुनाव हो रहे हों, तो सभी राज्यों में चुनाव समाप्ति तक इस तरह का प्रचार नहीं किया जा सकता।
इसके अलावा चुनाव के दौरान एसएमएस के जरिए भी कोई वोट देने की अपील करता है तो यह नियम का उल्लंघन माना जाएगा।