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Election Analysis: असम के चुनाव परिणाम पर परिसीमन का कितना पड़ा असर, एनडीए की प्रचंड जीत की क्या है वजह?
Tue, 05 May 2026 01:14 PM IST
निर्मल कांत
पीटीआई, गुवाहाटी।
पीटीआई, गुवाहाटी।
Published by: निर्मल कांत
Updated Tue, 05 May 2026 01:14 PM IST
सार
Election Analysis: असम में परिसीमन के बाद बदली सीमाओं और आरक्षित सीटों ने एनडीए को विधानसभा चुनाव में बड़ा लाभ दिया, जिससे उसने 126 में से 102 सीटों पर जीत दर्ज की है। भाजपा ने पहली बार अपने दम पर बहुमत हासिल किया है। क्या हैं वजहें, पढ़िए रिपोर्ट-
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हिमंत बिस्व सरमा
- फोटो : पीटीआई
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विस्तार
असम में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) की भारी जीत में परिसीमन एक मुख्य कारण माना जा रहा है। 126 सीटों वाली असम विधानसभा में एनडीए ने 102 सीटें जीतकर बहुत अच्छा प्रदर्शन किया। 2023 में किए गए परिसीमन में विधानसभा क्षेत्रों की सीमाएं बदली गईं और कुछ समय पहले मुस्लिम बहुल सीटों को बदलकर स्थानीय और अनुसूचित जनजाति समुदायों के लिए आरक्षित कर दिया गया। इसका असर चुनाव परिणामों पर साफ दिखा और भाजपा तथा उसके सहयोगी दलों को इसका फायदा मिला।
पहले जिन 35 सीटों पर अल्पसंख्यक मतदाताओं का बड़ा असर था, अब उनकी ताकत घटकर 25 से भी कम सीटों तक रह गई। कई मुस्लिम बहुल क्षेत्रों को दूसरे क्षेत्रों में मिला दिया गया, जिससे उनका वोट बैंक कमजोर हो गया। पहले इन क्षेत्रों में कांग्रेस और अखिल भारतीय संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (एआईयूडीएफ) का अच्छा प्रभाव था। लेकिन अब उनकी पकड़ काफी कम हो गई है। एआईयूडीएफ की सीटें भी 16 से घटकर केवल 2 रह गईं।
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पहले जिन 35 सीटों पर अल्पसंख्यक मतदाताओं का बड़ा असर था, अब उनकी ताकत घटकर 25 से भी कम सीटों तक रह गई। कई मुस्लिम बहुल क्षेत्रों को दूसरे क्षेत्रों में मिला दिया गया, जिससे उनका वोट बैंक कमजोर हो गया। पहले इन क्षेत्रों में कांग्रेस और अखिल भारतीय संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (एआईयूडीएफ) का अच्छा प्रभाव था। लेकिन अब उनकी पकड़ काफी कम हो गई है। एआईयूडीएफ की सीटें भी 16 से घटकर केवल 2 रह गईं।
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परिसीमन के बाद बढ़ीं एससी-एसटी सीटें
परिसीमन के बाद अनुसूचित जनजाति की सीटें 16 से बढ़कर 19 हो गईं और अनुसूचित जाति की सीटें 8 से बढ़कर 9 हो गईं। बारपेटा और गोलपाड़ा (पश्चिम) जैसे क्षेत्र, जहां पहले मुस्लिम आबादी ज्यादा थी, उन्हें आरक्षित कर दिया गया और इन सीटों को इस बार एनडीए ने जीत हासिल कर ली। बोडोलैंड क्षेत्र में भी आदिवासी सीटें बढ़ीं और वहां एनडीए के सहयोगी दलों ने अच्छा प्रदर्शन किया। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा ने पहले ही कहा था कि 2026 के चुनाव में परिसीमन से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को फायदा मिलेगा।
ये भी पढ़ें: कांग्रेस की पाठशाला, भाजपा की प्रयोगशाला; मामा हिमंत बने महानायक
परिसीमन के बाद अनुसूचित जनजाति की सीटें 16 से बढ़कर 19 हो गईं और अनुसूचित जाति की सीटें 8 से बढ़कर 9 हो गईं। बारपेटा और गोलपाड़ा (पश्चिम) जैसे क्षेत्र, जहां पहले मुस्लिम आबादी ज्यादा थी, उन्हें आरक्षित कर दिया गया और इन सीटों को इस बार एनडीए ने जीत हासिल कर ली। बोडोलैंड क्षेत्र में भी आदिवासी सीटें बढ़ीं और वहां एनडीए के सहयोगी दलों ने अच्छा प्रदर्शन किया। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा ने पहले ही कहा था कि 2026 के चुनाव में परिसीमन से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को फायदा मिलेगा।
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किस पार्टी को कितनी सीटें मिलीं?
इस चुनाव में भाजपा ने 82 सीटें जीतीं, उसके सहयोगी असम गण परिषद (एजीपी) और बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट (बीपीएफ) ने 10-10 सीटें जीतीं। विपक्ष में कांग्रेस ने 19 सीटें जीतीं, एआईयूडीएफ और रायजोर दल ने 2-2 सीटें और टीएमसी ने 1 सीट जीती।
इस चुनाव में भाजपा ने 82 सीटें जीतीं, उसके सहयोगी असम गण परिषद (एजीपी) और बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट (बीपीएफ) ने 10-10 सीटें जीतीं। विपक्ष में कांग्रेस ने 19 सीटें जीतीं, एआईयूडीएफ और रायजोर दल ने 2-2 सीटें और टीएमसी ने 1 सीट जीती।
हिमंत बिस्व सरमा
- फोटो : पीटीआई
राज्य की राजनीति को नई दिशा में ढालने की स्थिति में भाजपा
असम में बड़ी जीत के बाद भाजपा अब राज्य की राजनीति को नए तरीके से ढालने की स्थिति में है। इतनी बड़ी जीत मिलने के बाद भाजपा अपने हिंदुत्व के एजेंडे को और मजबूत कर सकती है। जानकारों का मानना है कि इससे असम की क्षेत्रीय राजनीति पीछे छूट सकती है। वहीं, कई मतदाता पार्टी की जीत का कारण उसकी जन कल्याणकारी योजनाओं को मानते हैं। इन योजनाओं ने जीत दिलाने में मदद की। लेकिन आगे चलकर सरकार के लिए इन्हें जारी रखना आर्थिक रूप से चुनौती बन सकता है।
पहली बार अपने दम भाजपा राज्य की सत्ता में आई
पहली बार बीजेपी ने अपने दम पर राज्य में बहुमत हासिल किया है। इससे पहले 2016 और 2021 में उसे 60 सीटें मिली थीं।
असम में बड़ी जीत के बाद भाजपा अब राज्य की राजनीति को नए तरीके से ढालने की स्थिति में है। इतनी बड़ी जीत मिलने के बाद भाजपा अपने हिंदुत्व के एजेंडे को और मजबूत कर सकती है। जानकारों का मानना है कि इससे असम की क्षेत्रीय राजनीति पीछे छूट सकती है। वहीं, कई मतदाता पार्टी की जीत का कारण उसकी जन कल्याणकारी योजनाओं को मानते हैं। इन योजनाओं ने जीत दिलाने में मदद की। लेकिन आगे चलकर सरकार के लिए इन्हें जारी रखना आर्थिक रूप से चुनौती बन सकता है।
पहली बार अपने दम भाजपा राज्य की सत्ता में आई
पहली बार बीजेपी ने अपने दम पर राज्य में बहुमत हासिल किया है। इससे पहले 2016 और 2021 में उसे 60 सीटें मिली थीं।
राजनीतिक विश्लेषकों ने क्या कहा?
राजनीतिक विश्लेषक ब्रोजेन डेका ने कहा कि 2023 में परिसीमन के समय भाजपा ने कहा था कि इससे हिंदुओं के लिए 103-105 सीटें सुनिश्चित होंगी और अब नतीजे उसी दिशा में दिख रहे हैं। उन्होंने कहा कि भाजपा ने खुद को असमिया समाज का 'अंतिम रक्षक' के रूप में पेश किया और 80 से ज्यादा सीटें जीतकर लोगों ने इसे स्वीकार भी किया। इससे राज्य की एजीपी, रायजोर दल और असम जातीय परिषद जैसी क्षेत्रीय पार्टियां कमजोर पड़ गई हैं।
रायजोर दल को इस बार 2 सीटें मिलीं, जबकि असम जातीय परिषद को फिर से कोई सफलता नहीं मिली। ये दोनों कांग्रेस के साथ गठबंधन में थे। डेका ने कहा कि भाजपा की जीत से खासकर बंगाली भाषी मुसलमान और ज्यादा हाशिये पर जा सकते हैं, क्योंकि वे पहले से ही मुख्यमंत्री के कड़े बयानों का सामना कर रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि एआईयूडीएफ 'मिया' समुदाय की पार्टी मानी जाती थी, उसे भी लोगों ने नकार दिया है और वह सिर्फ 2 सीटें ही जीत पाई।
राजनीतिक विश्लेषक ब्रोजेन डेका ने कहा कि 2023 में परिसीमन के समय भाजपा ने कहा था कि इससे हिंदुओं के लिए 103-105 सीटें सुनिश्चित होंगी और अब नतीजे उसी दिशा में दिख रहे हैं। उन्होंने कहा कि भाजपा ने खुद को असमिया समाज का 'अंतिम रक्षक' के रूप में पेश किया और 80 से ज्यादा सीटें जीतकर लोगों ने इसे स्वीकार भी किया। इससे राज्य की एजीपी, रायजोर दल और असम जातीय परिषद जैसी क्षेत्रीय पार्टियां कमजोर पड़ गई हैं।
रायजोर दल को इस बार 2 सीटें मिलीं, जबकि असम जातीय परिषद को फिर से कोई सफलता नहीं मिली। ये दोनों कांग्रेस के साथ गठबंधन में थे। डेका ने कहा कि भाजपा की जीत से खासकर बंगाली भाषी मुसलमान और ज्यादा हाशिये पर जा सकते हैं, क्योंकि वे पहले से ही मुख्यमंत्री के कड़े बयानों का सामना कर रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि एआईयूडीएफ 'मिया' समुदाय की पार्टी मानी जाती थी, उसे भी लोगों ने नकार दिया है और वह सिर्फ 2 सीटें ही जीत पाई।
असम विधानसभा चुनाव में भाजपा की जीत के बाद जश्न मनाते लोग
- फोटो : पीटीआई
कल्याणकारी योजनाओं को चुनाव पर कितना असर?
डेका के अनुसार, सरकार की उन योजनाओं का भी बड़ा असर पड़ा, जिनमें लोगों के खातों में सीधे पैसा भेजा गया। इससे मतदाता भाजपा के पक्ष में गए। उन्होंने कहा कि सरकार ने चुनाव के समय कई वादे किए हैं। लेकिन अगले पांच साल तक उन्हें पूरा करना चुनौती होगा, खासकर तब जब राज्य पर कर्ज बढ़ रहा है। अगर सरकार वादे पूरे नहीं कर पाई तो लोगों में नाराजगी बढ़ सकती है और उसकी लोकप्रियता कम हो सकती है। वहीं, आम लोगों का मानना है कि भाजपा के सत्ता में लौटने से योजनाएं और लाभ जारी रहेंगे।
काम शुरू करने के लिए महिलाओं को मिले पैसे
गृहिणी कल्पना कुमार ने कहा कि शिक्षा सस्ती हुई है और महिलाओं को अपना काम शुरू करने के लिए पैसे मिल रहे हैं। लोगों को उम्मीद है कि ये योजनाएं आगे भी जारी रहेंगी, इसलिए उन्होंने भाजपा को वोट दिया। गुवाहाटी में ऐप आधारित टैक्सी चलाने वाले दीपक दहल ने कहा कि सरकार ने जमीन से अतिक्रमण हटाया है, जिससे स्थानीय लोगों को भरोसा मिला है कि उनके अधिकार सुरक्षित रहेंगे और उनका भविष्य सुरक्षित है।
डेका के अनुसार, सरकार की उन योजनाओं का भी बड़ा असर पड़ा, जिनमें लोगों के खातों में सीधे पैसा भेजा गया। इससे मतदाता भाजपा के पक्ष में गए। उन्होंने कहा कि सरकार ने चुनाव के समय कई वादे किए हैं। लेकिन अगले पांच साल तक उन्हें पूरा करना चुनौती होगा, खासकर तब जब राज्य पर कर्ज बढ़ रहा है। अगर सरकार वादे पूरे नहीं कर पाई तो लोगों में नाराजगी बढ़ सकती है और उसकी लोकप्रियता कम हो सकती है। वहीं, आम लोगों का मानना है कि भाजपा के सत्ता में लौटने से योजनाएं और लाभ जारी रहेंगे।
काम शुरू करने के लिए महिलाओं को मिले पैसे
गृहिणी कल्पना कुमार ने कहा कि शिक्षा सस्ती हुई है और महिलाओं को अपना काम शुरू करने के लिए पैसे मिल रहे हैं। लोगों को उम्मीद है कि ये योजनाएं आगे भी जारी रहेंगी, इसलिए उन्होंने भाजपा को वोट दिया। गुवाहाटी में ऐप आधारित टैक्सी चलाने वाले दीपक दहल ने कहा कि सरकार ने जमीन से अतिक्रमण हटाया है, जिससे स्थानीय लोगों को भरोसा मिला है कि उनके अधिकार सुरक्षित रहेंगे और उनका भविष्य सुरक्षित है।