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Mohan Bhagwat: 'हमें अतिवादिता को छोड़कर आगे बढ़ना होगा...', पुणे में बोले आरएसएस प्रमुख भागवत

Fri, 20 Dec 2024 10:20 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली। Published by: निर्मल कांत Updated Fri, 20 Dec 2024 10:20 PM IST
सार

Mohan Bhagwat: आरएसएस प्रमुख ने पुणे में एक ई-स्कूल के शुभारंभ के मौके पर कहा कि हमें आधुनिकता और प्राचीनता को जोड़कर आगे बढ़ना होगा। इसमें सभी को योगदान देना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि हमें अतिवादियों को छोड़कर आगे बढ़ना चाहिए। 

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Education system must facilitate learning, not be barrier, says Bhagwat; flags regulatory 'rigidity'
मोहन भागवत - फोटो : पीटीआई (फाइल)

विस्तार

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत ने शुक्रवार को कहा कि शिक्षा व्यवस्था को सीखने में बाधा डालने के बजाय सहायक बनना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह जरूरी है कि हम बदलते समय के साथ ढलते हुए भी हमारे मौलिक बुनियादी मूल्यों से जुड़े रहें। भागवत पुणे के बाणेर में लोकसेवा ई-स्कूल के शुभारंभ के मौके पर बोल रहे थे। 

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उन्होंने कहा, शिक्षा कोई व्यापार नहीं है, बल्कि एक व्रत है, जो एक अच्छे इंसान बनने के लिए हासिल की जाती है। भागवत ने यह भी कहा कि शिक्षा व्यवस्था को छात्रों सशक्त बनाने का हथियार बनना चाहिए, न कि केवल एक सख्त नियंत्रक। शिक्षा में नियमन का मकसद प्रक्रिया को सरल और सहज बनाना होना चाहिए, न कि छात्रों की प्रयोग करने वाली सोच को दबाने वाले सख्त नियमों को लागू करना। 
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भागवत ने नई शिक्षा नीति की सराहना की
आरएसएस प्रमुख ने नई शिक्षा नीति (एनईपी) की सराहना करते हुए कहा कि यह हाल ही में लागू की गई है, लेकिन ऐसी शिक्षा प्रणाली पर चर्चा कई वर्षों से चल रही थी। कई स्कूलों में मूल्य आधारित शिक्षा दी जा रही है। उन्होंने कहा कि नई शिक्षा प्रणाली पूरी तरह से लागू होगी, तो यह देश को मनचाही दिशा में आगे बढ़ने में मदद करेगी। 
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'समय के अनुसार बदलें, लेकिन बुनियादी मूल्यों से जुड़ें'
भागवत ने कहा, हमें समय के अनुसार खुद को बदलना होगा। लेकिन इस दौरान हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि हम अपने बुनियादी मूल्यों से जुड़े रहें। हमें आधुनिकता और प्राचीनता को जोड़कर आगे बढ़ना होगा। इसके लिए सभी को योगदान देना चाहिए।


'हमें अतिवादिता को छोड़कर आगे बढ़ना है'
उन्होंने कहा कि शिक्षा का दायरा केवल एक सीमित ढांचे में नहीं रहना चाहिए, बल्कि यह समग्र रूप से समाज के विकास में योगदान देने वाली होनी चाहिए। उन्होंने भरोसा जताया कि भारत अपने बुनियादी मूल्यों को संरक्षित करते हुए दुनिया के एक नेता के रूप में उभरेगा, क्योंकि देश में ऐसी क्षमता है। इस दौरान उन्होंने यह भी कहा कि हमें अतिवादिता को छोड़कर आगे बढ़ना है। भागवत ने यह बात ऐसे समय में कही है, जब देशभर में मंदिर-मस्जिद में सर्वे को लेकर विवाद सामने आ रहे हैं। 

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