फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Education not business to earn profit: SC

मेडिकल कॉलेज फीसः SC ने कहा, शिक्षा लाभ कमाने का व्यवसाय नहीं, याचिकाकर्ताओं पर ठोका पांच लाख रुपये जुर्माना

Tue, 08 Nov 2022 03:57 PM IST
Amit Mandal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Amit Mandal Updated Tue, 08 Nov 2022 03:57 PM IST
सार

शीर्ष अदालत ने आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय के आदेश के खिलाफ कॉलेज द्वारा दायर एक याचिका को खारिज करते हुए यह टिप्पणी की, जिसमें एमबीबीएस छात्रों की ट्यूशन फीस बढ़ाने के सरकार के फैसले को खारिज कर दिया गया था।

विज्ञापन
Education not business to earn profit: SC
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : Social Media

विस्तार

शिक्षा लाभ कमाने का व्यवसाय नहीं है और ट्यूशन फीस हमेशा कम होनी चाहिए, सुप्रीम कोर्ट ने आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय के आदेश को बरकरार रखते हुए ये बात कही। राज्य सरकार ने मेडिकल कॉलेजों में ट्यूशन फीस को 24 लाख रुपये प्रति वर्ष बढ़ा दिया था, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने फैसले पर रोक लगा दी। न्यायमूर्ति एम आर शाह और न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया की पीठ ने याचिकाकर्ता नारायण मेडिकल कॉलेज और आंध्र प्रदेश पर 5 लाख रुपये का जुर्माना लगाते हुए इसे छह सप्ताह की अवधि के भीतर अदालत की रजिस्ट्री में जमा करने का आदेश सुनाया। पीठ ने कहा कि फीस को बढ़ाकर 24 लाख रुपये प्रति वर्ष करना, यानी पहले तय की गई फीस से सात गुना अधिक करना बिल्कुल भी उचित नहीं है। शिक्षा लाभ कमाने का व्यवसाय नहीं है। ट्यूशन फीस हमेशा सस्ती होनी चाहिए। 

विज्ञापन


कॉलेज और राज्य सरकार की याचिका खारिज 
शीर्ष अदालत ने आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय के आदेश के खिलाफ कॉलेज द्वारा दायर एक याचिका को खारिज करते हुए यह टिप्पणी की, जिसमें एमबीबीएस छात्रों की ट्यूशन फीस बढ़ाने के सरकार के फैसले को खारिज कर दिया गया था। उच्च न्यायालय ने माना था कि आंध्र प्रदेश प्रवेश और शुल्क नियामक समिति नियम, 2006 के प्रावधानों पर विचार करते हुए समिति की सिफारिशों/रिपोर्ट के बिना शुल्क को बढ़ाया/निर्धारित नहीं किया जा सकता है। शीर्ष अदालत ने कहा कि ट्यूशन फीस का निर्धारण या समीक्षा करते समय कई कारकों जैसे पेशेवर संस्थान का स्थान, पेशेवर पाठ्यक्रम की प्रकृति, उपलब्ध बुनियादी ढांचे की लागत पर विचार करना आवश्यक है। 
विज्ञापन


इसमें कहा गया है कि कॉलेज प्रबंधन को अवैध सरकारी आदेश के अनुसार एकत्र की गई राशि को अपने पास रखने की अनुमति नहीं दी जा सकती है। उपरोक्त को ध्यान में रखते हुए और ऊपर बताए गए कारणों से दोनों अपीलें विफल हो जाती हैं और वे खारिज किए जाने योग्य हैं। हालांकि, जुर्माने के रूप में 5 लाख रुपये की राशि का भुगतान अपीलकर्ता और आंध्र प्रदेश सरकार द्वारा छह सप्ताह की अवधि के भीतर इस न्यायालय की रजिस्ट्री में जमा किया जाएगा। 

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed