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एडिटर्स गिल्ड बोला- स्वतंत्र पत्रकारिता को दबाने के लिए सरकारी एजेंसियों का हो रहा इस्तेमाल
Fri, 23 Jul 2021 08:05 PM IST
Harendra Chaudhary
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Harendra Chaudhary
Updated Fri, 23 Jul 2021 08:05 PM IST
सार
एडिटर्स गिल्ड का कहना है कि सरकारी एजेंसियों को स्वतंत्र पत्रकारिता को दबाने के लिए एक जबरदस्त उपकरण के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है...
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एडिटर्स गिल्ड (प्रतीकात्मक तस्वीर)
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
एडिटर्स गिल्ड ऑफ़ इंडिया (ईजीआई) ने दैनिक भास्कर और भारत समाचार के दफ़्तरों पर आयकर छापे को स्वतंत्र पत्रकारिता को दबाने वाला करार दिया है। ईजीआई ने बयान जारी कर कहा है कि वह 'स्वतंत्र पत्रकारिता को दबाने के लिए सरकारी एजेंसियों को एक जबरदस्त उपकरण के रूप में इस्तेमाल किए जाने पर चिंतित है।
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एडिटर्स गिल्ड ने अपने बयान में कहा, 22 जुलाई को देश के प्रमुख समाचार पत्र समूह दैनिक भास्कर के साथ-साथ लखनऊ के एक समाचार चैनल भारत समाचार के कार्यालयों पर आयकर छापों को लेकर वह चिंतित है। दैनिक भास्कर द्वारा (कोविड-19) महामारी पर की गई उस गहन रिपोर्टिंग की पृष्ठभूमि के खिलाफ ये छापेमारी की गई हैं, जिसमें सरकारी अधिकारियों द्वारा घोर कुप्रबंधन और मानव जीवन के भारी नुकसान को सामने लाया गया था।
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गिल्ड ने दावा किया कि हाल में उसके द्वारा आयोजित एक वेबिनार में दैनिक भास्कर के राष्ट्रीय संपादक ओम गौड़ ने कहा था कि राज्य अधिकारियों की हालिया आलोचनात्मक कवरेज के बाद सरकारी विभागों से उनके विज्ञापनों को बंद कर दिया है। उन्होंने न्यूयॉर्क टाइम्स में एक ऑप-एड भी लिखा था, जिसका शीर्षक था 'द गंगा इज रिटर्निंग द डेड'। इट डज नॉट लाई।'
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भारत समाचार के बारे में गिल्ड ने कहा कि, इस पर भी आयकर अधिकारियों ने छापे की कार्रवाई की है जो 'उत्तर प्रदेश के कुछ चैनलों में से एक है जो राज्य सरकार से महामारी प्रबंधन के संबंध में कड़े सवाल पूछ रहा है। फरवरी में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने न्यूज़क्लिक.इन के कार्यालय पर छापे मारे थे, जो किसान आंदोलन और संशोधित नागरिक कानून (सीएए) के खिलाफ विरोध प्रदर्शन पर रिपोर्टिंग करने में सबसे आगे था।
एडिटर्स गिल्ड इसलिए चिंतित है कि सरकारी एजेंसियों को स्वतंत्र पत्रकारिता को दबाने के लिए एक जबरदस्त उपकरण के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है। यह पेगासस सॉफ्टवेयर का उपयोग कर पत्रकारों और नागरिक समाज के कार्यकर्ताओं की व्यापक निगरानी पर हालिया मीडिया रिपोर्टों को देखते हुए और अधिक परेशान करने वाला है।