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IT Rules: एडिटर्स गिल्ड हाईकोर्ट के फैसले से खुश, सरकार सोशल मीडिया सामग्री की फैक्ट चेक ईकाई नहीं बना सकेगी
Fri, 20 Sep 2024 11:50 PM IST
दीपक कुमार शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: दीपक कुमार शर्मा
Updated Fri, 20 Sep 2024 11:50 PM IST
सार
बॉम्बे हाईकोर्ट के टाईब्रेकर जज जस्टिस अतुल चंदुरकर ने इन नियमों को रद्द करने का फैसला सुनाते हुए कहा, मेरा मानना है कि संशोधित नियम संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार), 19 (अभिव्यक्ति की आजादी) और 21 (व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार) का उल्लंघन करते हैं और समानता के सिद्धांत के पैमाने पर खरे नहीं उतरते।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : एएनआई
विस्तार
एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया ने संशोधित आईटी नियमों को रद्द करने के बॉम्बे हाईकोर्ट के आदेश का स्वागत किया है। इन नियमों के खिलाफ गिल्ड भी बॉम्बे हाईकोर्ट में जून 2023 में एक पक्षकार बना था। उसने नियमों के कुछ प्रावधानों की सांविधानिक वैधता को चुनौती दी थी।
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बॉम्बे हाईकोर्ट ने शुक्रवार को सूचना प्रौद्योगिकी संशोधन नियम 2023 को असांविधानिक करार देते हुए रद्द कर दिया है। संशोधित आईटी नियम के जरिये केंद्र को सोशल मीडिया साइटों पर सरकार विरोधी सामग्री की जांच के लिए फैक्ट चेक ईकाई (एफसीयू) स्थापित करने का अधिकार दिया गया था और ये ईकाई किसी सामग्री को फर्जी या गुमराह करने वाला करार दे सकती थीं। हाईकोर्ट ने कहा कि आईटी नियमों में संशोधन जनता के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है। अब केंद्र सरकार फैक्ट चेक यूनिट नहीं बना सकेगी।
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बॉम्बे हाईकोर्ट के टाईब्रेकर जज जस्टिस अतुल चंदुरकर ने इन नियमों को रद्द करने का फैसला सुनाते हुए कहा, मेरा मानना है कि संशोधित नियम संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार), 19 (अभिव्यक्ति की आजादी) और 21 (व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार) का उल्लंघन करते हैं और समानता के सिद्धांत के पैमाने पर खरे नहीं उतरते।
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इस मामले में जस्टिस गौतम पटेल और जस्टिस डॉक्टर नीला गोखले की खंडपीठ ने जनवरी, 2024 में एक-दूसरे के विपरीत खंडित फैसला दिया था। जस्टिस पटेल ने नियमों को पूरी तरह रद्द करने का फैसला सुनाया था। जबकि, जस्टिस गोखले नियमों को बनाए रखने के पक्ष में थीं। इस खंडित फैसले के बाद बॉम्बे हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश ने फरवरी में जस्टिस चंदुरकर को टाईब्रेक जज नियुक्त किया। बतौर तीसरे जज, याचिकाओं पर उनकी राय मांगी गई। जस्टिस चंदुरकर के फैसले के बाद 2-1 से जजों का बहुमत संशोधित नियमों को रद्द करने के पक्ष में है। अगर सुप्रीम कोर्ट इस फैसले पर अंतरिम रोक नहीं लगाता है तो संशोधित नियम रद्द माने जाएंगे।
एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया ने 2023 के आईटी संशोधन नियमों के कुछ प्रावधानों की संवैधानिक वैधता को चुनौती देते हुए पिछले साल जून में बॉम्बे हाईकोर्ट का रुख किया था। पिछले साल अप्रैल में अपने बयान में अपनी चिंता व्यक्त की थी, जिसमें कहा गया था कि आईटी नियमों में संशोधन से देश में प्रेस की स्वतंत्रता पर गहरा प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।
बॉम्बे हाईकोर्ट ने यह देखते हुए कि संशोधित नियम समानता और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार का उल्लंघन करते हैं, यह भी कहा कि नियम अस्पष्ट और व्यापक होने के कारण न केवल किसी व्यक्ति पर बल्कि सोशल मीडिया मध्यस्थों पर भी डराने वाला प्रभाव पड़ सकता है। जनवरी 2024 में एक खंड पीठ द्वारा खंडित फैसला सुनाए जाने के बाद 'टाई-ब्रेकर जज' के रूप में कार्यरत न्यायमूर्तिअतुल चंदुरकर ने यह फैसला सुनाया।