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एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया ने कहा- सरकारी एजेंसियों द्वारा स्वतंत्र मीडिया को परेशान करने का खतरनाक चलन बंद हो

Sat, 11 Sep 2021 07:16 PM IST
Harendra Chaudhary डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Harendra Chaudhary Updated Sat, 11 Sep 2021 07:16 PM IST
सार

संपादकों की सर्वोच्च संस्था, एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया ने कहा, देश में सरकारी एजेंसियों द्वारा स्वतंत्र मीडिया को परेशान करने और डराने-धमकाने का खतरनाक चलन बंद होना चाहिए। यह हमारे संवैधानिक लोकतंत्र को कमजोर करता है...

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Editors Guild of India said - Stop the practice of harassing independent media by government agencies
एडिटर्स गिल्ड (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

संपादकों की सर्वोच्च संस्था, एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया (ईजीआई) ने शनिवार को जारी अपने बयान में कहा है कि सरकारी एजेंसियों द्वारा स्वतंत्र मीडिया को परेशान करने और डराने-धमकाने का खतरनाक चलन बंद हो। ईजीआई का यह बयान न्यूज वेबसाइट 'न्यूजलॉन्ड्री' और 'न्यूजक्लिक' पर आयकर विभाग की रेड, जिसे 'सर्वे' कहा जा रहा है, उसके मद्देनजर जारी किया गया है। संपादकों की सर्वोच्च संस्था ने इस तरह के सर्वे पर चिंता व्यक्त की है। यह कार्रवाई देश के संवैधानिक लोकतंत्र को कमजोर करती है।  

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ईजीआई द्वारा जारी बयान के अनुसार, 10 सितंबर को आयकर अधिकारियों की टीमों ने उक्त दोनों संगठनों के कार्यालयों पर दस्तक दी थी। कार्यालय परिसर में दिन भर जांच-पड़ताल चलती रही। आयकर विभाग का कहना था, यह जांच 'सर्वे' का हिस्सा है। दूसरी तरफ न्यूजलॉन्ड्री के सह-संस्थापक अभिनंदन सेखरी द्वारा जारी बयान के अनुसार, यह उनके अधिकारों पर एक स्पष्ट डराने वाला और जबरदस्त हमला था। इसके जरिए प्रेस की स्वतंत्रता को खत्म करने का प्रयास किया गया। आयकर विभाग की टीम ने सेखरी के मोबाइल फोन और लैपटॉप के साथ-साथ कुछ अन्य ऑफिस मशीनों के क्लोन बनाए। इतना ही नहीं, उन्हें कोई हैश वैल्यू भी नहीं दी गई। यह स्पष्ट रूप से आयकर अधिनियम की धारा 133A के तहत परिभाषित सर्वेक्षणों के अधिदेश से परे है। नियमानुसार, केवल जांच से संबंधित डाटा की प्रतिलिपि बनाने की अनुमति होती है। इसकी आड़ में पत्रकारों के व्यक्तिगत और पेशेवर डेटा के साथ छेड़छाड़ नहीं की जा सकती। एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया ने इसे सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 में दी गई निर्धारित प्रक्रियाओं का उल्लंघन करार दिया है।

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संपादकों की सर्वोच्च संस्था, एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया ने आगे कहा, देश में सरकारी एजेंसियों द्वारा स्वतंत्र मीडिया को परेशान करने और डराने-धमकाने का खतरनाक चलन बंद होना चाहिए। यह हमारे संवैधानिक लोकतंत्र को कमजोर करता है। जुलाई 2021 में, देश के प्रमुख समाचार पत्र दैनिक भास्कर के कार्यालयों के साथ-साथ लखनऊ स्थित एक समाचार चैनल, भारत समाचार के कार्यालयों पर भी आयकर विभाग ने छापे मारे थे। ये छापेमारी सरकार द्वारा महामारी से निपटने के लिए दोनों समाचार संगठनों द्वारा बहुत ही महत्वपूर्ण कवरेज की पृष्ठभूमि के खिलाफ की गई थी। गिल्ड ने अपने बयान में कहा कि आयकर विभाग ने अपनी पूरी कार्रवाई को 'सर्वे' बताया है, लेकिन न्यूजलॉन्ड्री के सीईओ अभिनंदन सेखरी के बयान से पता चलता हैं कि यह उनके अधिकारों और मीडिया की आजादी पर हमला है। गिल्ड को इस बात की गहरी चिंता है कि पत्रकारों के डाटा की इस तरह की जब्ती, जिसमें कई संवेदनशील जानकारियां शामिल होती हैं, वह कार्रवाई पूरी तरह गलत है। पत्रकारों के स्रोतों का विवरण, स्टोरी को लेकर किया जा रहा काम और अन्य पत्रकारिता डेटा के साथ छेड़छाड़, यह अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और प्रेस की स्वतंत्रता का उल्लंघन है।

न्यूजलॉन्ड्री के कार्यालय में आयकर विभाग ने दूसरी बार दस्तक दी है। इससे पहले जून में भी आयकर विभाग की टीम न्यूजलॉन्ड्री के कार्यालय में पहुंची थी। न्यूजक्लिक के मामले में, प्रवर्तन निदेशालय ने फरवरी 2021 में उनके कार्यालय के साथ-साथ उनके वरिष्ठ पत्रकारों और अधिकारियों के घरों पर भी छापेमारी की थी। न्यूजक्लिक और न्यूजलॉन्ड्री दोनों ही केंद्र सरकार की नीतियों और कामकाज के आलोचक रहे हैं। गिल्ड की अध्यक्ष सीमा मुस्तफा, महासचिव संजय कपूर और कोषाध्यक्ष अनंत नाथ द्वारा जारी बयान में मांग की गई है कि ऐसी सभी जांचों में बहुत सावधानी और संवेदनशीलता दिखाई जाए। सरकार, पत्रकारों और मीडिया संगठनों के अधिकारों को कमजोर करने का प्रयास न करे। इस तरह की जांच को स्वतंत्र मीडिया को डराने या उसका उत्पीड़न करने के साधन नहीं बनने देना चाहिए।

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