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सुप्रीम कोर्ट ने यौन उत्पीड़न के आरोप में घिरे पूर्व जज को दी नसीहत
Sat, 27 Feb 2021 02:59 AM IST
Jeet Kumar
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली।
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली।
Published by: Jeet Kumar
Updated Sat, 27 Feb 2021 02:59 AM IST
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supreme court
- फोटो : पीटीआई
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सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को कहा कि यौन उत्पीड़न मामलों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। यह कहते हुए कोर्ट ने जूनियर महिला अधिकारी के यौन उत्पीड़न पर अनुशासनात्मक कार्यवाही का सामना कर रहे मध्य प्रदेश के एक सेवानिवृत्त जिला जज को राहत देने से इनकार कर दिया। साथ ही कोर्ट ने उन्हें नसीहत देते हुए कहा कि आप बहुत ही पतली रेखा पर चल रहे हैं और कभी भी गिर सकते हैं।
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जूनियर महिला जज द्वारा शिकायत वापस लेने के बावजूद मध्य प्रदेश हाईकोर्ट द्वारा शुरू की गई अनुशासनात्मक कार्यवाही को पूर्व जिला जज ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी।
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चीफ जस्टिस एसए बोबडे की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने कहा कि हम यौन उत्पीड़न के मामलों को नजरअंदाज नहीं कर सकते हैं। साथ ही पीठ ने पूर्व जिला जज को अपनी याचिका वापस लेने के लिए कहा।
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पीठ ने याचिकाकर्ता के वकील से कहा कि आप बहुत पतली रेखा पर चल रहे हैं। आप किसी भी समय गिर सकते हैं। आपके पास विभागीय जांच में बरी होने का मौका हो सकता है। आपको जांच कमेटी के पास जाना चाहिए।
सुनवाई के बाद पीठ ने कहा कि वह इस संबंध में संक्षिप्त आदेश पारित करेगी और याचिका खारिज कर दी जाएगी। हालांकि याचिकाकर्ता के वकील ने याचिका वापस लेने की अनुमति मांगी और कहा कि उन्हें जांच कमेटी के समक्ष जाने की आजादी दी जाए।
पिछली सुनवाई में पूर्व जिला जज और जूनियर महिला जज के बीच हुए व्हाट्सएप चैट पर गौर करने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने उसे बेहद आपत्तिजनक बताया था। कोर्ट ने कहा था कि किसी जज द्वारा जूनियर न्यायिक अधिकारी के साथ ‘फ्लर्ट’ करना स्वीकारयोग्य आचरण नहीं है।