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ED: गोवा में महिला शाखा प्रबंधक ने अनजान लोगों के नाम पर खोले फर्जी ऋण खाते, बिना गिरवी रखे सोने पर दिया लोन

Fri, 04 Jul 2025 07:36 PM IST
पवन पांडेय डिजिटल ब्यूरो अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: पवन पांडेय Updated Fri, 04 Jul 2025 07:36 PM IST
सार

गोवा में एक बैंक की महिला शाखा प्रबंधक पर 1.28 करोड़ रुपये का गबन का आरोप लगा है। उन पर ये भी आरोप है कि उन्होंने अनजान लोगों के नाम पर खोले फर्जी ऋण खाते, बिना गिरवी रखे सोने पर लोन भी दिया है।

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ED: Woman branch manager opened fake loan accounts in the name of unknown people, gave loans on gold
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : ANI

विस्तार

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), पणजी जोनल कार्यालय ने सदा अर्बन को-ऑपरेटिव क्रेडिट सोसाइटी लिमिटेड (एसयूसीसीएसएल) के शाखा प्रबंधक मामले में अहम खुलासा किया है। एसयूसीसीएसएल की महिला शाखा प्रबंधक पर आरोप है कि उन्होंने अनजान सदस्यों के नाम पर फर्जी ऋण खाते खोले। इतना ही नहीं, क्रेडिट सोसाइटी में बिना गिरवी रखे सोने पर लोन दिया। फर्जी स्वर्ण ऋण खाते बना दिए। इस मामले में कुल 1.28 करोड़ रुपये का गबन सामने आया है।
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दो अचल संपत्तियों को किया गया कुर्क
बता दें कि धोखाधड़ी के इस मामले में धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के प्रावधानों के अंतर्गत तीन जुलाई को वास्को-डा-गामा, गोवा में स्थित दो अचल संपत्तियों को अनंतिम रूप से कुर्क किया गया है। इनका मूल्य 1.05 करोड़ रुपये है। ईडी ने गोवा पुलिस की तरफ से उमा नीलेश होंडाड उर्फ उमा राजू हेलावर उर्फ उमा, एसयूसीसीएसएल की जुआरीनगर शाखा की तत्कालीन शाखा प्रबंधक और अन्य के खिलाफ धोखाधड़ी, जालसाजी और सोसाइटी के 1.28 करोड़ रुपये के धन के गबन के लिए दर्ज एफआईआर के आधार पर जांच प्रारंभ की थी। बाद में ईडी ने एसयूसीसीएसएल में धोखाधड़ी और पद का दुरुपयोग, इस केस की चार्जशीट को भी जांच का आधार बनाया था।
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कई लोगों के साथ मिलकर रची थी साजिश
ईडी की जांच से पता चला है कि उमा ने अन्य लोगों के साथ मिलकर आपराधिक साजिश रची। सोसायटी से धन निकालने के लिए अपने आधिकारिक पद का दुरुपयोग किया। कार्यप्रणाली में अनजान सदस्यों के नाम पर फर्जी ऋण खाते खोलना, बिना किसी गिरवी रखे सोने के फर्जी स्वर्ण ऋण खाते बनाना, सावधि जमाओं का दुरुपयोग करना और सोसायटी के बैंक खाते से अवैध रूप से धन निकालने के लिए वरिष्ठ अधिकारियों के जाली हस्ताक्षर करना शामिल था।

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इस मामले में अपराध की आय (पीओसी) को उनके व्यक्तिगत खातों और परिवार के सदस्यों एवं सहयोगियों के खातों में स्थानांतरित कर दिया गया था। इन निधियों का उपयोग व्यक्तिगत खर्चों और संपत्ति हासिल करने/जारी करने के लिए किया गया था। 1.05 करोड़ रुपये मूल्य की कुर्क की गई संपत्तियों में 'वास्को टाइम्स' नाम की एक वाणिज्यिक दुकान और वास्को-डा-गामा में एक आवासीय घर शामिल है।
 
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