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ED: हजारों निवेशकों को भी अधर में छोड़ा, शेल कंपनियों के जरिए खरीदी लग्जरी गाड़ियां और आलीशान कोठियां

Fri, 07 Feb 2025 02:43 PM IST
अभिषेक दीक्षित डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिषेक दीक्षित Updated Fri, 07 Feb 2025 02:43 PM IST
सार

जांच एजेंसी के मुताबिक, मेसर्स व्यूएनो मार्केटिंग सर्विसेज लिमिटेड और अन्य के खिलाफ धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के प्रावधानों के तहत जांच चल रही है। ईडी ने उत्तर प्रदेश के गौतमबुद्धनगर (नोएडा) पुलिस द्वारा बीएनएस, 2023 की विभिन्न धाराओं के तहत दर्ज एक एफआईआर के आधार पर उक्त मामले की जांच शुरू की थी।

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ED: Thousands investors were left in lurch luxury cars luxurious bungalows were bought through shell companies
ED - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), जालंधर जोनल कार्यालय ने धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के प्रावधानों के तहत कुर्की की एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। यह कार्रवाई मेसर्स व्यूएनो मार्केटिंग सर्विसेज लिमिटेड और अन्य के खिलाफ चल रही जांच में की गई है। अनंतिम कुर्की आदेश में अस्थायी रूप से 6 अचल संपत्तियां, 73 बैंक खाते और 26 लग्जरी वाहनों को कुर्क किया गया है। इनकी कुल कीमत 178.12 करोड़ रुपये  (लगभग) बताई गई है। ईडी द्वारा कंपनी के सीईओ सुखविंदर सिंह खरौर व अन्य को जांच में शामिल होने का नोटिस भेजा गया है, मगर वे अभी तक ईडी के समक्ष पेश नहीं हुए हैं।

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जांच एजेंसी के मुताबिक, मेसर्स व्यूएनो मार्केटिंग सर्विसेज लिमिटेड और अन्य के खिलाफ धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के प्रावधानों के तहत जांच चल रही है। ईडी ने उत्तर प्रदेश के गौतमबुद्धनगर (नोएडा) पुलिस द्वारा बीएनएस, 2023 की विभिन्न धाराओं के तहत दर्ज एक एफआईआर के आधार पर उक्त मामले की जांच शुरू की थी।

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ईडी की जांच से पता चला है कि मेसर्स व्यूएनो मार्केटिंग सर्विसेज लिमिटेड (एम/एस वीएमएसएल) ने अन्य समूह संस्थाओं के साथ मिलकर विभिन्न निवेशकों को क्लाउड पार्टिकल्स बेचने और उच्च किराये के रिटर्न के वादे पर उन पार्टिकल्स (एसएलबी मॉडल) को वापस पट्टे पर देने की आड़ में अपने पैसे का निवेश करने के लिए प्रेरित किया था। हालांकि जिस तरह के निवेश की बात कही गई थी, उसके लिए कंपनी के पास कोई पर्याप्त बुनियादी ढांचा नहीं था। निवेशकों को अंधेरे में रखा गया। 



जिस काम में निवेशकों का पैसा लगाया जाना था, उसे छोड़कर दूसरे कार्यों में पैसा लगाया गया। आपराधिक गतिविधियों से उत्पन्न अपराध की आय (पीओसी) का उपयोग व्यावसायिक उद्देश्यों के अलावा उस पैसे को अन्य उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल किया गया था। मेसर्स वीएमएसएल और समूह की कंपनियों द्वारा उस पैसे से शानदार वाहनों की खरीद की गई।

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शेल कंपनी खोलकर उसमें सैकड़ों करोड़ रुपये की धनराशि और संपत्तियां निवेश की गई। वुएनो समूह के सीईओ सुखविंदर सिंह खरौर सहित इसके प्रमुख व्यक्तियों को जांच में शामिल होने और अपना पक्ष समझाने के लिए कई अवसर दिए गए हैं। हालाँकि, आज तक, सुखविंदर सिंह खरौर सहित अन्य लोगों में से कोई भी जांच में शामिल नहीं हुआ है। इन लोगों ने अपने हजारों निवेशकों को भी अधर में छोड़ दिया है। इससे पहले, पीएमएलए, 2002 के प्रावधानों के तहत गत वर्ष 26 नवंबर और इस साल 17 जनवरी को मेसर्स व्यूनो मार्केटिंग सर्विसेज लिमिटेड व संबंधित संस्थाओं के विभिन्न परिसरों में तलाशी ली गई थी।

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